
Posted by nitin kumar
Uttar Pradesh
27-03-2020 05:16 PM
nitin ji kripya aap apna swal vistar se pooche ke aap apne khet ki fasl ke bare men jankari lena chahte hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake,dhanywad
Posted by Sewak .lSingh
Punjab
27-03-2020 05:07 PM
ਸੇਵਕ ਜੀ, ਇਹ ਮੱਛਰ ਦੇ ਹਮਲੇ ਦੀ ਵਜ੍ਹਾ ਨਾਲ ਹੋ ਰਿਹਾ ਹੈ ਤੁਸੀਂ ਇਸ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ ਇਸ ਵਿਚ imidacloprid @ 1.5ml ਪ੍ਰਤੀ ਲਿਟਰੇ ਪਾਣੀ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੋ, ਧੰਨਵਾਦ

Posted by prabhjot singh
Punjab
27-03-2020 04:55 PM
Prabhjot ji tuci 100kg feed vich 10kg saro paa skde ho..
Posted by shiv pal singh
Uttar Pradesh
27-03-2020 04:40 PM
Shivpal ji aap iski bijai june ke akhri saptah men kar sakte hai.20 biswa men 1.5 kilo beej ki jrurat hoti hai.dhanywad
Posted by kulveer singh sidhu
Punjab
27-03-2020 04:37 PM
ਕੁਲਵੀਰ ਜੀ, ਇਹ ਤੱਤਾਂ ਦੀ ਕਮੀ ਦੀ ਵਜ੍ਹਾ ਨਾਲ ਹੋ ਰਿਹਾ ਹੈ ਤੁਸੀਂ ਇਸ ਵਿਚ NPK 191919 @ 10 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਲੋਟਰੇ ਪਾਣੀ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੋ, ਇਸ ਵਿਚ carbendazim @ 4 ਗ੍ਰਾਮ ਯਾਂ mancozeb @ 4 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੋ, ਦੋਨਾਂ ਸਪ੍ਰੇਹਾਂ ਵਿਚ 3 ਦਿਨ ਦਾ ਫ਼ਾਸਲਾ ਰੱਖੋ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by Gurdeep Singh virdi
Punjab
27-03-2020 04:36 PM
Gurdeep Singh virdi ji seed len lai tusi Harvinder singh Brar 8068211817, 9814097127 Brar Seed Store nal samparak kar sakde ho, Thankyou.
Posted by kulveer singh sidhu
Punjab
27-03-2020 04:31 PM
कुलवीर जी यह फंगस के हमले के कारण हो रहा है इसकी रोकथाम के लिए आप carbendazim @ 4g या mancozeb @ 4g प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे कर सकते है।
Posted by gulshan sahu
Chattisgarh
27-03-2020 04:27 PM
गुलशन जी पशु का भार जब 250—270 किलो तक हो जाता है तब उसे हीट में आने पर टीका भरवा सकते है गायों में यह लगभग 2—2.5 साल तक भार हो जाता है और भैंसों में 3 साल भी हो जाता है यदि अच्छी खुराक हो।
Posted by Gurpreet Brar
Punjab
27-03-2020 04:15 PM
ਤੁਸੀ ਕਲਮੀਸ਼ੋਰਾ 500ਗ੍ਰਾਮ, ਜੋ ਖਾਰ 250ਗ੍ਰਾਮ, ਮਿਠਾਸੋਡਾ 250ਗ੍ਰਾਮ, ਨਸ਼ਾਦਰ 150ਗ੍ਰਾਮ, ਖੰਡ 2 ਕਿਲੋ ਅਤੇ ਮਿਠਾ ਤੇਲ 2 ਕਿਲੋ ਲਉ ਤੇ ਪਹਿਲਾਂ ਖੰਡ ਦੀ ਚਾਸਣੀ ਬਣਾਉਣ ਤੇ ਫਿਰ ਉਸ ਵਿਚ ਮਿੱਠਾ ਤੇਲ ਪਾਉ ਤੇ ਉਬਾਲੋ ਫਿਰ ਉਸ ਵਿਚ ਬਾਕੀ ਸਾਰਾ ਸਾਮਾਨ ਪਾਉ ਤੇ ਉਬਾਲ ਕੇ ਠਾਰ ਕੇ ਪੰਜ ਹਿੱਸੇ ਕਰ ਲਉ ਤੇ ਇਕ ਹਿੱਸਾ ਰੋਜਾਨਾ ਰਾਤ ਵੇਲੇ ਦਿਉ ਤੇ ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ ਤ੍ਰੇਲ ਵਿਚ ਨਾ ਬੰਨ੍ਹੋ ਤੇ ਨਾ ਹੀ 6 ਦਿਨ ਨਵਾਹੋ ਅ.... (Read More)
ਤੁਸੀ ਕਲਮੀਸ਼ੋਰਾ 500ਗ੍ਰਾਮ, ਜੋ ਖਾਰ 250ਗ੍ਰਾਮ, ਮਿਠਾਸੋਡਾ 250ਗ੍ਰਾਮ, ਨਸ਼ਾਦਰ 150ਗ੍ਰਾਮ, ਖੰਡ 2 ਕਿਲੋ ਅਤੇ ਮਿਠਾ ਤੇਲ 2 ਕਿਲੋ ਲਉ ਤੇ ਪਹਿਲਾਂ ਖੰਡ ਦੀ ਚਾਸਣੀ ਬਣਾਉਣ ਤੇ ਫਿਰ ਉਸ ਵਿਚ ਮਿੱਠਾ ਤੇਲ ਪਾਉ ਤੇ ਉਬਾਲੋ ਫਿਰ ਉਸ ਵਿਚ ਬਾਕੀ ਸਾਰਾ ਸਾਮਾਨ ਪਾਉ ਤੇ ਉਬਾਲ ਕੇ ਠਾਰ ਕੇ ਪੰਜ ਹਿੱਸੇ ਕਰ ਲਉ ਤੇ ਇਕ ਹਿੱਸਾ ਰੋਜਾਨਾ ਰਾਤ ਵੇਲੇ ਦਿਉ ਤੇ ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ ਤ੍ਰੇਲ ਵਿਚ ਨਾ ਬੰਨ੍ਹੋ ਤੇ ਨਾ ਹੀ 6 ਦਿਨ ਨਵਾਹੋ ਅਤੇ ਉਸ ਨੂੰ Vitum-H injection ਲਗਵਾਓ
Posted by ram KAILASH
Rajasthan
27-03-2020 04:10 PM
Ram ji kisano ke sath jankari sanjhi karne ke liye aapka bhut bhut dhanywad
Posted by ਸਰਬਜੀਤ ਸਿੰਘ
Punjab
27-03-2020 04:08 PM
ਸਰਬਜੋਤ ਜੀ ਇਸ ਬਾਰੇ ਹਾਲੇ ਕੋਈ ਵੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਨਹੀਂ ਮਿਲੀ ਹੈ ਜਿਵੇ ਹੀ ਇਸ ਬਾਰੇ ਕੋਈ ਸੂਚਨਾ ਮਿਲਦੀ ਹੈ ਤਾ ਤੁਹਾਨੂੰ ਇਸ ਬਾਰੇ ਸੂਚਿਤ ਕਰ ਦਿੱਤਾ ਜਾਏਗਾ |

Posted by Ravinder Sehrawat
Haryana
27-03-2020 04:04 PM
भिंडी काफी तरह की मिट्टी में उगाई जा सकती है भिंडी की फसल के लिए रेतली से चिकनी मिट्टी उचित होती है, जिसमें जैविक तत्व भरपूर मात्रा में हों और जिसकी निकास प्रणाली भी अच्छी ढंग की हो यदि निकास अच्छे ढंग का हो तो यह भारी ज़मीनों में भी अच्छी उगती है मिट्टी का पी एच 6.0 से 6.5 होना चाहिए खारी, नमक वाली या घटिया निकास वà.... (Read More)
भिंडी काफी तरह की मिट्टी में उगाई जा सकती है भिंडी की फसल के लिए रेतली से चिकनी मिट्टी उचित होती है, जिसमें जैविक तत्व भरपूर मात्रा में हों और जिसकी निकास प्रणाली भी अच्छी ढंग की हो यदि निकास अच्छे ढंग का हो तो यह भारी ज़मीनों में भी अच्छी उगती है मिट्टी का पी एच 6.0 से 6.5 होना चाहिए खारी, नमक वाली या घटिया निकास वाली मिट्टी में इसकी खेती ना करें VRO 5, VRO 6, Parbhani Kranti, IIVR 10, Kashi Vibhuti, Kashi Bhairav, Kashi Pragati, Pusa Sawani, Kashi Satdhari, Kashi Kranti किस्में आप बीज सकते हैं मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें जोताई के बाद मिट्टी को समतल करने के लिए सुहागा फेरें आखिरी जोताई के समय गाय का गला हुआ गोबर 40 क्विंटल प्रति एकड़ में डालें उत्तर में यह वर्षा और बसंत के मौसम में उगाई जाती है खरीफ के मौसम में, इसकी बिजाई जून-जुलाई के महीने और बसंत ऋतु में फरवरी-मार्च के महीने में की जाती है गर्मियों में समय पर बिजाई के लिए कतार से कतार में 45 सैं.मी. और पौधे से पौधे में 30 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें गर्मियों में अगेती बिजाई के लिए 30 सैं.मी. x 20 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बारिश के मौसम में कतार से कतार में 60 सैं.मी. और पौधे से पौधे में 20-30 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बीज 2.5 सैं.मी. की गहराई में बोयें खरीफ के मौसम में 4-6 किलो बीज और गर्मियों के मौसम में 8-10 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग किए जाते हैं खेत की तैयारी के समय 8-10 टन गाय का गला हुआ गोबर डालें भिंडी की फसल के लिए नाइट्रोजन 40 किलो (90 किलो यूरिया) फासफोरस 16 किलो (एस एस पी 100 किलो) और पोटाश 20 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 35 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की एक तिहाई मात्रा, फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा खेत की तैयारी के समय डालें नाइट्रोजन की बाकी बची मात्रा बिजाई के बाद 30वें और 50 वें दिन टॉप ड्रेसिंग के तौर पर डालें बिजाई से पहले बसालीन 1 लीटर को प्रति एकड़ में डालें और बिजाई के तुरंत बाद लासो 1.6 मि.ली. को प्रति एकड़ में प्रयोग करें यदि मिट्टी में पर्याप्त मात्रा में नमी मौजूद ना हो तो गर्मियों में फसल के अच्छे अंकुरण के लिए बिजाई से पहले सिंचाई जरूर करनी चाहिए बीज अंकुरण के बाद अगली सिंचाई करें उसके बाद गर्मियों में 4-5 दिन के बाद खेतों को सिंचित करें और बारिश के मौसम में 10 से 12 बाद खेतों को सिंचित करें फसल बिजाई के 60-70 दिनों के बाद पककर तैयार हो जाती है छोटे और कच्चे फलों की तुड़ाई करें फलों की तुड़ाई सुबह और शाम के समय करनी चाहिए तुड़ाई में देरीसे भिंडियों में रेशा भर जाता है और इनका कच्चापन और स्वाद भी चला जाता है

Posted by Gurpreet singh
Punjab
27-03-2020 04:01 PM
Gurpreet ji, tusi is vich vermicompost @ 4-5 kilo prati acre de hisaab nal pao, dhanwad

Posted by jagatpalsingh
Uttar Pradesh
27-03-2020 03:58 PM
अरवी की खेती कई प्रकार की मिट्टी जैसे कि रेतली से दोमट मिट्टी में की जाती है, पर यह रेतली दोमट या जैविक तत्वों की भरपूर मात्रा वाली मिट्टी में उगाने पर बढ़िया परिणाम देती है घटिया निकास वाली मिट्टी में इसकी खेती ना करें कम ऊपजाऊ और नमी वाली मिट्टी इसकी पैदावार को कम कर देती है अरवी की खेती के लिए, ज़मीन को अच्à.... (Read More)
अरवी की खेती कई प्रकार की मिट्टी जैसे कि रेतली से दोमट मिट्टी में की जाती है, पर यह रेतली दोमट या जैविक तत्वों की भरपूर मात्रा वाली मिट्टी में उगाने पर बढ़िया परिणाम देती है घटिया निकास वाली मिट्टी में इसकी खेती ना करें कम ऊपजाऊ और नमी वाली मिट्टी इसकी पैदावार को कम कर देती है अरवी की खेती के लिए, ज़मीन को अच्छी तरह से तैयार करें खेत को भुरभुरा करने के लिए, बिजाई से पहले खेत की 2-3 बार जोताई करें और उसके बाद सुहागा फेरें खेत को नदीन-मुक्त रखें फरवरी महीने के पहले पखवाड़े में गांठों को नर्सरी बैडों पर बोयें पंक्ति से पंक्ति में 60x15 या 45 x 20 सैं.मी. का फासला रखें गांठों को 6-7.5 सैं.मी. की गहराई पर बोयें गांठो की हाथों से बिजाई की जाती है बीजों को मिट्टी में गहराई से बोया जाता है गांठों की बिजाई गड्डे खोद कर की जाती है इसके इलावा इसकी बिजाई आलुओं की तरह मशीन से भी की जा सकती है प्रति एकड़ खेत में 300-400 किलो गांठों का प्रयोग करें बीज के उपचार के लिए बविस्टीन के 2% घोल में 30 मिनट के लिए गांठों को भिगोएं यह गांठों को मिट्टी में पैदा होने वाली बीमारीयों से बचाता है बिजाई से पहले, गली हुई रूड़ी की खाद 40-62.5 क्विंटल प्रति एकड़ में डालें शुरुआती खाद के तौर पर यूरिया 90 किलो, सिंगल सुपर फासफेट 125 किलो और मिउरेट ऑफ़ पोटाश 35 किलो प्रति एकड़ डालें खेत को नदीन मुक्त करने के लिए, 1-2 कसी से गोड़ाई करें और हर एक गोड़ाई के बाद जड़ों पर मिट्टी चढ़ाएं जरूरत से पहले सिंचाई फसल की बढ़िया पैदावार के लिए बहुत लाभदायक होती है गर्मीयों में, सिंचाई 3-4 दिनों के फासले पर करें और बारिश के मौसम में, सिंचाई की जरूरत नहीं होती, पर कई बार आवश्यकता अनुसार जीवन रक्षक के लिए सिंचाई जरूरी होती है इस फसल को नियमित अंकुरण के लिए स्थिर सिंचाई की आवश्यकता होती है इसलिए बिजाई के तुरंत बाद सिंचाई करें बीजों के अंकुरण तक खेत में नमी बनाये रखें धन्यवाद

Posted by Arashdeep
Punjab
27-03-2020 03:51 PM
ਅਰਸ਼ਦੀਪ ਜੀ ਤੁਸੀ ਮੱਕੀ ਦੀ ਕਿਸਮ ਜਿਵੇ J1006 ਕਿਸਮ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ

Posted by Jugraj
Punjab
27-03-2020 03:43 PM
Jugraj ji iss vich koi smasia wali gal nhi hai tuci iss nu pregstay gold powder 30gm rojana 20 din tak de skde ho ja fir tuci keeper plus powder di varto kr skde ho.
Posted by Ravi singh
Uttar Pradesh
27-03-2020 03:42 PM
Ravi ji, kripya ap bataye ke apne konsi kism ki bijai ki hai, taki apko uske hisaab se iske bare mein jankari di ja sake, dhanywad
Posted by Harry
Punjab
27-03-2020 03:38 PM
ਫੈਟ ਵਧਾਉਣ ਲਈ ਅੱਧਾ ਕਿਲੋ ਦੇਸੀ ਕਪਾਹ ਦੇ ਵੜੇਵੇ ਚਾਰੋ ਜੀ ਅਤੇ ਬੀਟੀ ਕਾਟਨ ਦੀ ਵਰਤੋ ਬਿਲਕੁੱਲ ਨਾ ਕਰੋ ਅਤੇ ਦੁੱਧ ਵਧਾਉਣ ਤੁਸੀ ਦਾਣੇ ਨੂੰ ਗਿੱਲਾ ਕਰਕੇ ਉਸ ਵਿੱਚ 10 ਗ੍ਰਾਮ ਲਾਈਵਈਸਟ ਮਿਲਾ ਕੇ ਦੁੱਧ ਚੋਣ ਤੋਂ 10 ਮਿੰਟ ਪਹਿਲਾ ਘੋਲ ਕੇ ਪਾਓ ਇਹ ਲਾਈਵਈਸਟ ਤੁਹਾਨੂੰ ਪੰਸਾਰੀ ਦੀ ਦੁਕਾਨ ਤੋਂ ਮਿਲ ਜਾਵੇਗਾ ਇਹ ਜਿਆਦਾ ਟਾਈਮ ਨਹੀ ਪਿਆ ਰਹਿਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਇਸ ਨਾਲ ਦੁੱਧ ਵੱਧ ਜਾਵੇਗਾ ਜਾਂ ਤੁà¨.... (Read More)
ਫੈਟ ਵਧਾਉਣ ਲਈ ਅੱਧਾ ਕਿਲੋ ਦੇਸੀ ਕਪਾਹ ਦੇ ਵੜੇਵੇ ਚਾਰੋ ਜੀ ਅਤੇ ਬੀਟੀ ਕਾਟਨ ਦੀ ਵਰਤੋ ਬਿਲਕੁੱਲ ਨਾ ਕਰੋ ਅਤੇ ਦੁੱਧ ਵਧਾਉਣ ਤੁਸੀ ਦਾਣੇ ਨੂੰ ਗਿੱਲਾ ਕਰਕੇ ਉਸ ਵਿੱਚ 10 ਗ੍ਰਾਮ ਲਾਈਵਈਸਟ ਮਿਲਾ ਕੇ ਦੁੱਧ ਚੋਣ ਤੋਂ 10 ਮਿੰਟ ਪਹਿਲਾ ਘੋਲ ਕੇ ਪਾਓ ਇਹ ਲਾਈਵਈਸਟ ਤੁਹਾਨੂੰ ਪੰਸਾਰੀ ਦੀ ਦੁਕਾਨ ਤੋਂ ਮਿਲ ਜਾਵੇਗਾ ਇਹ ਜਿਆਦਾ ਟਾਈਮ ਨਹੀ ਪਿਆ ਰਹਿਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਇਸ ਨਾਲ ਦੁੱਧ ਵੱਧ ਜਾਵੇਗਾ ਜਾਂ ਤੁਸੀ ਕੱਦੂ ਜਾਂ ਲੋਕੀ ਖਵਾਓ ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ ਇਹ ਵੀ ਦੁੱਧ ਵਧਾਉਣ ਲਈ ਠੀਕ ਹੈ ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਤੁਸੀ ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ Fatplus ਜਾਂ Fatmax 50 ਗ੍ਰਾਮ ਪਾਊਡਰ ਵੀ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ , ਇਸ ਨਾਲ ਫੈਟ ਵਿੱਚ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ

Posted by Rinku
Uttar Pradesh
27-03-2020 03:30 PM
अच्छे जल निकास वाली हल्की या भारी, रेतली और चिकनी मिट्टी ज़मीनें इसके लिए अच्छी मानी जाती हैं खेत में पानी खड़ा ना होने दें, क्योंकि यह फसल खड़े पानी को सहने योग्य नहीं है प्रसिद्ध किस्में:- Punjab Haldi 1: यह मध्यम कद की, हरे और लंबे पत्तों वाली और मोटी गांठों वाली किस्म है इसका गुद्दा गहरे पीले रंग का और छिल्का भूरे रà.... (Read More)
अच्छे जल निकास वाली हल्की या भारी, रेतली और चिकनी मिट्टी ज़मीनें इसके लिए अच्छी मानी जाती हैं खेत में पानी खड़ा ना होने दें, क्योंकि यह फसल खड़े पानी को सहने योग्य नहीं है प्रसिद्ध किस्में:- Punjab Haldi 1: यह मध्यम कद की, हरे और लंबे पत्तों वाली और मोटी गांठों वाली किस्म है इसका गुद्दा गहरे पीले रंग का और छिल्का भूरे रंग का होता है यह किस्म 215 दिनों में पकती है और औसतन पैदावार 108 क्विंटल प्रति एकड़ है Punjab Haldi 2: यह लंबे कद की हरे और चौड़े पत्तों वाली और मोटी गांठ वाली किस्म है इसका गुद्दा पीले रंग का और छिल्का भूरे रंग का होता है यह किस्म 240 दिनों में पकती है और औसतन पैदावार 122 क्विंटल प्रति एकड़ है खेत को 2-3 बार जोत कर और सुहागे से समतल करके तैयार करें हल्दी की बिजाई के लिए बैड 15 सैं.मी. ऊंचे, 1 मीटर चौड़े और आवश्यकनुसार लंबे होने चाहिए दो बैडों के बीच 50 सैं.मी. का फासला होना चाहिए अधिक पैदावार लेने के लिए बिजाई अप्रैल के अंत में करें इसे पनीरी के साथ भी उगाया जा सकता है इसके लिए जून के पहले पखवाड़े तक पनीरी खेत में लगा दें पनीरी के लिए 35-45 दिनों के पौधों को खेत में लगा दें राईज़ोमस को पंक्तियों में बीजें और पंक्ति से पंक्ति का फासला 30 सैं.मी. और पौधों में 20 सैं.मी. का फासला रखें बिजाई के बाद खेत में 2.5 टन प्रति एकड़ स्ट्रा मलच डालें बीज की गहराई 3 सैं.मी. से ज्यादा नहीं होनी चाहिए इसकी बिजाई सीधे खेत में लगाकर या पनीरी लगाकर की जाती है बिजाई के लिए साफ-सुथरे ताजे और बीमारी रहित राईज़ोमस का प्रयोग करें बीज की मात्रा 6-8 क्विंटल प्रति एकड़ बहुत होती है बिजाई से पहले क्विनलफोस 25 ई.सी. को 20 मि.ली. + कार्बेनडाज़िम 10 ग्राम प्रति लीटर पानी में डालकर बीज का उपचार करें बाद में गांठों को 20 मिनट के लिए इस घोल में भिगोदें ताकि इन्हें फफूंद से बचाया जा सके नाइट्रोजन 10 किलो (25 किलो यूरिया), फासफोरस 10 किलो (60 किलो एस एस पी) और पोटाश 10 किलो (16 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश) की मात्रा प्रति एकड़ में प्रयोग करें सारी पोटाश और आधी फासफोरस बिजाई के समय डालें नाइट्रोजन दो हिस्सों में डालें, आधी बिजाई से 75 दिन बाद और बाकी नाइट्रोजन और आधी फासफोरस बिजाई के 3 महीने बाद डालें बिजाई के 2-3 दिनों के बाद पैंडीमैथालीन 30 ई.सी. 800 मि.ली. या मैटरीब्यूज़िन 70 डब्लयू पी 400 ग्राम को 200 लीटर पानी में डालकर स्प्रे करें नदीन नाशक के प्रयोग के बाद खेत को हरे पत्तों या धान की तूड़ी से ढक दें जड़ों के विकास के लिए बिजाई से 50-60 दिनों के बाद और फिर 40 दिनों के बाद जड़ों को मिट्टी लगाएं यह कम वर्षा वाली फसल है, इसलिए वर्षा के अनुसार सिंचाई करें हल्की ज़मीन में फसल को कुल 35-40 सिंचाइयों की जरूरत पड़ती है बिजाई के बाद फसल को 40-60 क्विंटल प्रति एकड़ हरे पत्तों से ढक दें हर बार खाद डालने के बाद 30 क्विंटल प्रति एकड़ मलच डालें किस्म के अनुसार 6-9 महीनों में कटाई करें पत्ते सूखने और पीले होने पर कटाई का अनुकूल समय होता है गांठों को उखाड़ कर बाहर निकालें और साफ करें गांठों को 2-3 दिनों के लिए छांव में सुखाएं इससे छिल्का सख्त हो जाता है और आसानी से उबलता है साफ करने के बाद गांठों को पानी में सोडियम बाइकार्बोनेट डालकर 1 घंटे के लिए उबालें गांठों को उबालने के लिए कड़ाही जैसे बर्तनों का प्रयोग करें अच्छी किस्म की हल्दी लेने के लिए झाग बनने, भाफ निकलने और महक आने तक उबालें उबालने के बाद इसे 10-15 दिनों तक सुखाएं सुखाने के बाद जाली, बोरियों या मशीन से चमकायें और आकार, बनतर और रंग के अनुसार बांटे छाया में इसकी उपज कम निकलती है

Posted by jaspreet singh
Punjab
27-03-2020 03:17 PM
ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ ਮੱਛਰ ਤੋਂ ਬਚਾਉਣ ਲਈ ਸਰੋਂ ਦਾ ਤੇਲ ਅਤੇ ਡੀਜ਼ਲ ਜਾਂ ਮਿਟੀ ਦਾ ਤੇਲ ਮਿਕਸ ਕਰਕੇ ਸਪਰੇ ਕਰੋ, ਇਸ ਵਿਚ ਡੀਜ਼ਲ ਜਾਂ ਮਿਟੀ ਦੇ ਤੇਲ ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਜ਼ਿਆਦਾ ਨਹੀਂ ਹੋਣੀ ਚਾਹੀਦੀ, ਇਹ ਤੁਸੀ ਸਰੋਂ ਦੇ ਤੇਲ ਨਾਲੋਂ ਥੋੜਾ ਘੱਟ ਹੀ ਪਾਓ, ਕਿਉਕਿ ਡੀਜ਼ਲ ਜਾਂ ਮਿਟੀ ਦਾ ਤੇਲ ਜ਼ਿਆਦਾ ਪਾਉਣ ਨਾਲ ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ ਨੁਕਸਾਨ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਇਸਦੀ ਤੁਸੀ ਪਸ਼ੂ ਦੇ ਜਿਥੇ ਜ਼ਿਆਦਾ ਮੱਛਰ ਬੈਠਦਾ ਹੈ ਉਥੇ ਸਪਰੇ ਕਰੋ ਇਸਦੀ ਮà.... (Read More)
ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ ਮੱਛਰ ਤੋਂ ਬਚਾਉਣ ਲਈ ਸਰੋਂ ਦਾ ਤੇਲ ਅਤੇ ਡੀਜ਼ਲ ਜਾਂ ਮਿਟੀ ਦਾ ਤੇਲ ਮਿਕਸ ਕਰਕੇ ਸਪਰੇ ਕਰੋ, ਇਸ ਵਿਚ ਡੀਜ਼ਲ ਜਾਂ ਮਿਟੀ ਦੇ ਤੇਲ ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਜ਼ਿਆਦਾ ਨਹੀਂ ਹੋਣੀ ਚਾਹੀਦੀ, ਇਹ ਤੁਸੀ ਸਰੋਂ ਦੇ ਤੇਲ ਨਾਲੋਂ ਥੋੜਾ ਘੱਟ ਹੀ ਪਾਓ, ਕਿਉਕਿ ਡੀਜ਼ਲ ਜਾਂ ਮਿਟੀ ਦਾ ਤੇਲ ਜ਼ਿਆਦਾ ਪਾਉਣ ਨਾਲ ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ ਨੁਕਸਾਨ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਇਸਦੀ ਤੁਸੀ ਪਸ਼ੂ ਦੇ ਜਿਥੇ ਜ਼ਿਆਦਾ ਮੱਛਰ ਬੈਠਦਾ ਹੈ ਉਥੇ ਸਪਰੇ ਕਰੋ ਇਸਦੀ ਮਾਲਿਸ਼ ਨਹੀਂ ਕਰਨੀ ਹੈ, ਇਸ ਨਾਲ ਮੱਛਰ ਤੋਂ ਰਾਹਤ ਮਿਲ ਜਾਵੇਗੀ.
Posted by gulshan lal
Uttar Pradesh
27-03-2020 02:59 PM
गुलशन जी, आप मार्च महीने में सब्जियां जैसे कि खीरा, ककड़ी, लोबिया, करेला, तुरई, पेठा, पालक की खेती कर सकते हैं, धन्यवाद
Posted by gulshan lal
Uttar Pradesh
27-03-2020 02:57 PM
गुलशन जी, फंगस की रोकथाम के लिए आप इसमें carbendazim @ 4 ग्राम या mancozeb @ 4 ग्राम प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें, इससे फंगस की रोकथाम हो जाये गी, धन्यवाद

Posted by manpreet singh
Punjab
27-03-2020 02:34 PM
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਸੇਂਜੂ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਸਾਉਣੀ,ਬਸੰਤ ਅਤੇ ਗਰਮੀ ਦੇ ਮੌਸਮ ਵੇਲੇ ਬੀਜੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ। ਇਹ ਲੰਮੇ ਸਮੇਂ ਵਾਲੀ ਫਸਲ ਹੈ ਜੋ 95 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕਦੀ ਹੈ। ਇਸਦਾ ਤਣਾ ਮਜ਼ਬੂਤ ਅਤੇ ਜਾਮਣੀ ਰੰਗ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ। ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 21 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ।

Posted by kalyan mal
Rajasthan
27-03-2020 02:32 PM
श्री मान टमाटर में ज्यादा उपज के लिए आप NPK 13:0:45@1kg प्रती एकड़ सप्रे कर सकते हो।

Posted by Jitu Yadav
Rajasthan
27-03-2020 02:23 PM
Jitu ji, yeh macchar ke hamle ki vajah se ho raha hai, ap iski roktham ke liye isme imidacloprid @ 1.5 ml prati litre pani ke hisaab se spray kar sakte hain, dhanywad
Posted by Ramakant chauhan
Uttar Pradesh
27-03-2020 02:20 PM
खादों की सही आवश्यकता जानने के लिए प्रत्येक तीन वर्ष के बाद मिट्टी की जांच जरूरी है। बिजाई से पहले आखिरी जोताई के समय अच्छी तरह से गला हुआ गाय का गोबर 8 टन या वर्मीकंपोस्ट + रालीगोल्ड 8-10 किलो या पी एस बी 5-10 किलो प्रति एकड़ में डालें।नाइट्रोजन 60-90 किलो (यूरिया 135-200 किलो) और फासफोरस 20 किलो (एस एस पी 125 किलो) प्रति एकड़ मà.... (Read More)
खादों की सही आवश्यकता जानने के लिए प्रत्येक तीन वर्ष के बाद मिट्टी की जांच जरूरी है। बिजाई से पहले आखिरी जोताई के समय अच्छी तरह से गला हुआ गाय का गोबर 8 टन या वर्मीकंपोस्ट + रालीगोल्ड 8-10 किलो या पी एस बी 5-10 किलो प्रति एकड़ में डालें।नाइट्रोजन 60-90 किलो (यूरिया 135-200 किलो) और फासफोरस 20 किलो (एस एस पी 125 किलो) प्रति एकड़ में डालें। फासफोरस की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की 1/3 मात्रा बिजाई के समय डालें। बाकी बची नाइट्रोजन को दूसरी और चौथी सिंचाई के समय डालें।

Posted by lori
Karnataka
27-03-2020 02:14 PM
लौरी जी कृपया आप अपना सवाल विस्तार से पूछे कि आप जानकारी क्या लेना चाहते है ताकि आपको उसके हिसाब से जानकारी दी जा सके। धन्यवाद
Posted by Krishna
Madhya Pradesh
27-03-2020 02:13 PM
यह फसल काफी तरह की मिट्टी में उगाई जाती है चने की खेती के लिए रेतली या चिकनी मिट्टी बहुत अनुकूल मानी जाती है घटिया निकास वाली ज़मीन इसकी बिजाई के लिए अनुकूल नहीं मानी जाती खारी या नमक वाली ज़मीन भी इसके लिए अच्छी नहीं मानी जाती इसके विकास के लिए 5.5 से 7 पी एच वाली मिट्टी अच्छी होती है हर साल एक खेत में एक ही फसल न.... (Read More)
यह फसल काफी तरह की मिट्टी में उगाई जाती है चने की खेती के लिए रेतली या चिकनी मिट्टी बहुत अनुकूल मानी जाती है घटिया निकास वाली ज़मीन इसकी बिजाई के लिए अनुकूल नहीं मानी जाती खारी या नमक वाली ज़मीन भी इसके लिए अच्छी नहीं मानी जाती इसके विकास के लिए 5.5 से 7 पी एच वाली मिट्टी अच्छी होती है हर साल एक खेत में एक ही फसल ना बोयें अच्छा फसली चक्र अपनायें अनाज वाली फसलों को फसल चक्र में प्रयोग करने से ज़मीन से लगने वाली बीमारियां रोकने में मदद मिलती है आमतौर पर फसल चक्र में खरीफ के सफेद चने, खरीफ के काले चने + गेहूं /जौं/राया, चरी-चने, धान/मक्की-चने आदि फसलें आती हैं C 235: यह किस्म तकरीबन 145-150 दिनों में पक जाती है यह किस्म तना गलन और झुलस रोग को सहनेयोग्य है इसके दाने दरमियाने आकार के और पीले-भूरे रंग के होते हैं इसकी औसतन पैदावार 8.4-10 क्विंटल प्रति एकड़ होती है G 24: यह दरमियानी फैलने वाली किस्म है और बारानी क्षेत्रों के लिए अनुकूल है यह किस्म तकरीबन 140-145 दिनों में पक जाती है इसकी औसतन पैदावार 10-12 क्विंटल प्रति एकड़ होती है G 130: यह दरमियाने अंतराल की किस्म है इसकी औसतन पैदावार 8-12 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pant G 114: यह किस्म तकरीबन 150 दिनों में पक जाती है यह झुलस रोग की रोधक किस्म है इसकी औसतन पैदावार 12-14 क्विंटल प्रति एकड़ होती है C 104: यह काबुली चने की किस्म है, जो कि पंजाब और उत्तर प्रदेश के लिए अनुकूल है इसकी औसतन पैदावार 6-8 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pusa 209: यह किस्म तकरीबन 140-165 दिनों में पक जाती है इसकी औसतन पैदावार 10-12 क्विंटल प्रति एकड़ होती है चने की फसल के लिए ज्यादा समतल बैडों की जरूरत नहीं होती यदि इसे मिक्स फसल के तौर पर उगाया जाये तो खेत की अच्छी तरह से जोताई होनी चाहिए यदि इस फसल को खरीफ की फसल के तौर पर बीजना हो, तो खेत की मॉनसून आने पर गहरी जोताई करें, जो बारिश के पानी को संभालने में मदद करेगा बिजाई से पहले खेत की एक बार जोताई करें यदि मिट्टी में नमी की कमी नज़र आये तो बिजाई से एक सप्ताह पहले सुहागा फेरें बारानी हालातों के लिए 10 अक्तूबर से 25 अक्तूबर तक पूरी बिजाई करें सिंचित हालातों के लिए 25 अक्तूबर से 10 नवंबर तक देसी और काबुली चने की किस्मों की बिजाई करें सही समय पर बिजाई करनी जरूरी है क्योंकि अगेती बिजाई से अनआवश्यक विकास का खतरा बढ़ जाता है पिछेती बिजाई से पौधों में सूखा रोग का खतरा बढ़ जाता है, पौधे का विकास घटिया और जड़ें भी उचित ढंग से नहीं बढ़ती बीजों के बीच की दूरी 10 सैं.मी. और पंक्तियों के बीच की दूरी 30-40 सैं.मी. होनी चाहिए बीज को 10-12.5 सैं.मी. गहरा बीजना चाहिए उत्तरी भारत में इसकी बिजाई पोरा ढंग से की जाती है देसी किस्मों के लिए 15-18 किलो बीज प्रति एकड़ डालें और 37 किलो बीज प्रति एकड़ काबुली किस्मों के लिए डालें यदि बिजाई नवंबर के दूसरे पखवाड़े में की जाए तो 27 किलो बीज प्रति एकड़ डालें और यदि बिजाई दिसंबर के पहले पखवाड़े में की जाए तो 36 किलो बीज प्रति एकड़ डालें ट्राइकोडरमा 2.5 किलो प्रति एकड़ + गला हुआ गोबर 50 किलो मिलाएं और फिर जूट की बोरियों से ढक दें फिर इस घोल को नमी वाली ज़मीन पर बिजाई से पहले खिलार दें इससे मिट्टी में पैदा होने वाली बीमारियों को रोका जा सकता है बीजों को मिट्टी में पैदा होने वाली बीमारियों से बचाने के लिए फफूंदीनाशक जैसे कि कार्बेनडाज़िम 12 प्रतिशत + मैनकोज़ेब 63 प्रतिशत डब्लयू पी (साफ) 2 ग्राम से प्रति किलो बीजों को बिजाई से पहले उपचार करें दीमक वाली ज़मीन पर बिजाई के लिए बीजों को क्लोरपाइरीफॉस 20 ई सी 10 मि.ली. से प्रति किलो बीजों का उपचार करें बीजों का मैसोराइज़ोबियम से टीकाकरण करें इससे चने की पैदावार 7 प्रतिशत तक वृद्धि होती है इस तरह करने के लिए बीजों को पानी में भिगोकर, उन पर मैसोराइज़ोबियम डालें टीकाकरण से बीजों को छांव में सुखाएं देसी किस्मों के लिए सिंचित और असिंचित इलाकों में नाइट्रोजन (यूरिया 13 किलो) और फासफोरस (सुपर फासफेट 50 किलो) प्रति एकड़ के हिसाब से बिजाई के समय डालें जबकि काबुली चने की किस्मों के लिए, बिजाई के समय 13 किलो यूरिया और 100 किलो सुपर फासफेट प्रति एकड़ डालें खादों की ज्यादा अच्छे प्रयोग के लिए खादों को खालियों में 7-10 सैं.मी. की गहराई पर बोयें सिंचित हालातों में बिजाई से पहले एक बार पानी दें इससे बीज अच्छे ढंग से अंकुरित होते हैं और फसल की वृद्धि भी अच्छी होती है दूसरी बार पानी फूल आने से पहले और तीसरा पानी फलियों के विकास के समय डालें अगेती वर्षा होने पर सिंचाई देरी से और आवश्यकतानुसार करें अनआवश्यक पानी देने से फसल का विकास और पैदावार कम हो जाती है यह फसल पानी के ज्यादा खड़े रहने को सहन नहीं कर सकती, इसके लिए अच्छे निकास का भी प्रबंध करें

Posted by pritam bhaira
Rajasthan
27-03-2020 02:06 PM
बढ़िया वर्मी कंपोस्ट निम्नलिखित तरीके अनुसार बनायी जा सकती है इसलिए ऐसा स्थान लें जहां धूप ना आये और हवादार हो
इस स्थान पर ईंटों या पत्थर के टुकड़े और मिट्टी की 2—3 इंच मोटी परत बिछायें
मिट्टी पर थोड़ा सा पानी छिड़ककर गीला करें मिट्टी में 25 प्रतिशत से अधिक नमी नहीं होनी चाहिए
इसके ऊपर गंडोए (40 गंडोए प्रति वà.... (Read More)
बढ़िया वर्मी कंपोस्ट निम्नलिखित तरीके अनुसार बनायी जा सकती है इसलिए ऐसा स्थान लें जहां धूप ना आये और हवादार हो
इस स्थान पर ईंटों या पत्थर के टुकड़े और मिट्टी की 2—3 इंच मोटी परत बिछायें
मिट्टी पर थोड़ा सा पानी छिड़ककर गीला करें मिट्टी में 25 प्रतिशत से अधिक नमी नहीं होनी चाहिए
इसके ऊपर गंडोए (40 गंडोए प्रति वर्ग फीट जगह) में मिलायें
इसके बाद वेस्ट जैसे कि बची कुची सब्जियां, फल, कच्चा गोबर, गोबर की सलरी की 8—10 इंच मोटी परत डालें दूसरी परत के बाद इसके ऊपर सूखे पत्ते या पराली से ढक दें हर परत के बाद पानी छिड़कें ताकि नमी बनी रहे
वर्मीकंपोस्ट के बैड को 3—4 इंच मोटी गोबर की परत से ढक दें और इसके ऊपर बोरा या तिरपाल रखें ताकि नमी बनी रहे
रसोई, फसलों या डेयरी के बचे कुचे की परत को रैक से पलटते रहें और आवश्यकतानुसार थोड़ा थोड़ा करके और वेस्ट भी डाल सकते हैं इसके ऊपर कच्चा गोबर भी डाल सकते हैं पर ध्यान रखें कि यह परत पहले जितनी ही मोटी रहें
वर्मी कंपोस्ट की खाद मौसम के हिसाब से 45—60 दिनों में तैयार हो जाती है सबसे ऊपर वाली परत को हटाकर गंडोए छलनी से अलग कर लें और निचली छोड़ दें इसके ऊपर दोबारा रसोई या एग्रो वेस्ट की 6 इंच मोटी परत बिछाकर दोबारा खाद तैयार की जा सकती हैं 45 दिनों के बाद पानी छिड़कना बंद करने से भी गंडोए निचली परत में चले जाते हैं और छलनी से अलग करने में समय कम लगता है तैयार वर्मी कंपोस्ट काले भूरे रंग की गंध रहित और चाय पत्ती जैसी होती है इसे छांव में हवा में सुखकर आवश्यकतानुसार थैले या बोरियों में डालकर रखा जा सकता है एक टन वर्मी कंपोस्ट में 1.0—1.5 किलोग्राम नाइट्रोजन, 5—10 किलोग्राम पोटाश और 3.5—5.0 किलो फासफोरस होता है इसके अलावा इसमें कई तरह के एन्ज़ाइम और सूक्ष्म तत्व कॉपर, आयरन, जिंक, सल्फर, कैलशियम और मैगनीशियम आदि होते हैं
Posted by ਕੁਲਦੀਪ ਸਿੰਘ
Punjab
27-03-2020 02:03 PM
Kuldeep ji, kirpa kar ke daso ke sundi da hamla kis fasal vich hoya hai tajo tuhnu is bare jankari diti ja sake, dhanwad

Posted by Lakhwinder Singh
Punjab
27-03-2020 02:02 PM
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ ਕਣਕ ਵਿੱਚ ਪੀਲੀ ਕੁੰਗੀ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਦੇ ਲਈ Opera@300 ਮਿਲੀ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਸਪਰੇਅ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ।
Posted by Shrijesh Yadav
Uttar Pradesh
27-03-2020 01:54 PM
श्री मान नींबू के पौधे के ऊपर NPK 130045@10gm प्रती लीटर पानी में मिलाकर सप्रे कर सकते हो।
Posted by Shrijesh Yadav
Uttar Pradesh
27-03-2020 01:52 PM
श्रीमान जी सिट्रस में आप NPK 13:00:45@10 gm प्रति एकड़ स्प्रे कर सकते हैं

Posted by amarpal singh
Punjab
27-03-2020 01:51 PM
आप इसका प्रयोग कर सकते हैं अधिक समय तक प्रयोग करने पर ही इसका फायदा होगा
Posted by bhupinder
Punjab
27-03-2020 01:51 PM
ਫੈਟ ਵਧਾਉਣ ਲਈ ਅੱਧਾ ਕਿਲੋ ਦੇਸੀ ਕਪਾਹ ਦੇ ਵੜੇਵੇ ਚਾਰੋ ਜੀ ਅਤੇ ਬੀਟੀ ਕਾਟਨ ਦੀ ਵਰਤੋ ਬਿਲਕੁੱਲ ਨਾ ਕਰੋ ਅਤੇ ਦੁੱਧ ਵਧਾਉਣ ਤੁਸੀ ਦਾਣੇ ਨੂੰ ਗਿੱਲਾ ਕਰਕੇ ਉਸ ਵਿੱਚ 10 ਗ੍ਰਾਮ ਲਾਈਵਈਸਟ ਮਿਲਾ ਕੇ ਦੁੱਧ ਚੋਣ ਤੋਂ 10 ਮਿੰਟ ਪਹਿਲਾ ਘੋਲ ਕੇ ਪਾਓ ਇਹ ਲਾਈਵਈਸਟ ਤੁਹਾਨੂੰ ਪੰਸਾਰੀ ਦੀ ਦੁਕਾਨ ਤੋਂ ਮਿਲ ਜਾਵੇਗਾ ਇਹ ਜਿਆਦਾ ਟਾਈਮ ਨਹੀ ਪਿਆ ਰਹਿਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਇਸ ਨਾਲ ਦੁੱਧ ਵੱਧ ਜਾਵੇਗਾ ਜਾਂ ਤੁà¨.... (Read More)
ਫੈਟ ਵਧਾਉਣ ਲਈ ਅੱਧਾ ਕਿਲੋ ਦੇਸੀ ਕਪਾਹ ਦੇ ਵੜੇਵੇ ਚਾਰੋ ਜੀ ਅਤੇ ਬੀਟੀ ਕਾਟਨ ਦੀ ਵਰਤੋ ਬਿਲਕੁੱਲ ਨਾ ਕਰੋ ਅਤੇ ਦੁੱਧ ਵਧਾਉਣ ਤੁਸੀ ਦਾਣੇ ਨੂੰ ਗਿੱਲਾ ਕਰਕੇ ਉਸ ਵਿੱਚ 10 ਗ੍ਰਾਮ ਲਾਈਵਈਸਟ ਮਿਲਾ ਕੇ ਦੁੱਧ ਚੋਣ ਤੋਂ 10 ਮਿੰਟ ਪਹਿਲਾ ਘੋਲ ਕੇ ਪਾਓ ਇਹ ਲਾਈਵਈਸਟ ਤੁਹਾਨੂੰ ਪੰਸਾਰੀ ਦੀ ਦੁਕਾਨ ਤੋਂ ਮਿਲ ਜਾਵੇਗਾ ਇਹ ਜਿਆਦਾ ਟਾਈਮ ਨਹੀ ਪਿਆ ਰਹਿਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਇਸ ਨਾਲ ਦੁੱਧ ਵੱਧ ਜਾਵੇਗਾ ਜਾਂ ਤੁਸੀ ਕੱਦੂ ਜਾਂ ਲੋਕੀ ਖਵਾਓ ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ ਇਹ ਵੀ ਦੁੱਧ ਵਧਾਉਣ ਲਈ ਠੀਕ ਹੈ ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਤੁਸੀ ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ Fatplus ਜਾਂ Fatmax 50 ਗ੍ਰਾਮ ਪਾਊਡਰ ਵੀ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ , ਇਸ ਨਾਲ ਫੈਟ ਵਿੱਚ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ
Posted by bhupinder
Punjab
27-03-2020 01:46 PM
भूपिंदर जी आप 100 किलो फीड में 2 किलो मिनरल मिक्सचर मिलाकर दे सकते है यदि आप अलग से देना चाहते है तो आप 50—100 ग्राम रोजाना दे सकते है बाकि आप तारामीरा अलग से 50 ग्राम रोजाना दे सकते है। आप मिनरल मिक्सचर Agrimin, Bovimin-b, minfa gold, CRS कोई भी प्रयोग कर सकते है।
Posted by bhupinder
Punjab
27-03-2020 01:35 PM
भूपिंदर जी आप उसे मिनरल मिक्सचर 100 ग्राम रोजाना दे सकते है आप कैल्शियम बंद कर सकते है बाकि फीड आप तीन किलो दूध के मगर एक किलो के हिसाब से दे सकते है यदि दलिया एक समय देते है तो आप फीड कम कर सकते है।
Posted by gurlal bhattal
Punjab
27-03-2020 01:29 PM
ਗੁਰਲਾਲ ਜੀ, ਇਹ ਤੱਤਾਂ ਦੀ ਕਮੀ ਦੀ ਵਜ੍ਹਾ ਨਾਲ ਹੋ ਰਿਹਾ ਹੈ ਤੁਸੀਂ ਇਸ ਵਿਚ NPK 191919 @ 10 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਲੋਟਰੇ ਪਾਣੀ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੋ, ਧੰਨਵਾਦ

Posted by amarpal singh
Punjab
27-03-2020 01:01 PM
Amarpal ji jersey cow di fatt vdia khurak ate sahi dekhbhal nal 4.5-5.0 tak v aa skdi hai.

Posted by himanshu
Haryana
27-03-2020 12:59 PM
Himanshu ji, ap march mein faslein jaise ke kheera, kakdi, lobiya, karela, loki, turai, petha, palak, bhindi or arbi ki kheti kar sakte hain, dhanywad

Posted by Aamir Ahmad Khan
Bihar
27-03-2020 12:34 PM
इसे आप हीट में लाने के लिए Mintab tablet रोजाना एक गोली दें इससे जल्दी हीट में आ जाएगी।

Posted by rajneesh
Uttar Pradesh
27-03-2020 12:26 PM
Rajneesh ji, kripya ap apna sawal visthar se puchein taki apko uske bare mein jankari di ja sake, dhanywad

Posted by Dn Verma
Chattisgarh
27-03-2020 12:24 PM
verma ji kripya aap btaye ke aapke paas jameen kitni hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake aur kripya yeh bhi btaye ke aapne tractor nya lena hai ya second hand taki uske hisab se jankari di ja sake.dhanywad

Posted by Jivan Sony
Bihar
27-03-2020 12:18 PM
Moti ki kheti ek bahut hi accha vavsay hai, es vavsay ko shuru karne ke liye sabse jaruri hai iski training, kyuki isme bahut si esi barikiyan hain jo hme practical training mein hi sikhne ko milti hai agar ap iski training lena chahte hain to ap giltrati pearl farming training kender prashikshan karay karam ayojit kiya ja raha hai, prishiskhan karay karam mein bhaag lene ke liye niche diye gye number par aaj hi samparak karein or 250/- se apna registration karwaye. Achal SIngh (founder): 9711858258, dhanywad

Posted by Gagan Deep Singh Sahota
Chandigarh
27-03-2020 12:16 PM
Gagan ji, eh macchar de hamle di vajah nal ho janda hai, tusi is di roktham layi is vich neem de tel di spray karo, isdi matra prati litre pani de hisaab nal 4 ml di varto. karo, dhanwad

Posted by Gagan Deep Singh Sahota
Chandigarh
27-03-2020 12:15 PM
गगन जी यह फंगस का हमला हुआ है आप इसकी रोकथाम के लिए इसमें खट्टी लस्सी @ 3ml प्रति लीटर पानी के हिसाब से 4 ml का प्रयोग करें धन्यवाद
Posted by Kuldeep Kamboj
Punjab
27-03-2020 12:04 PM
ਕੁਲਦੀਪ ਜੀ, ਤੁਸੀਂ ਵੱਧ ਝਾੜ ਲੈਣ ਲਈ ਇਸ ਵਿਚ NPK 130045 @ 10 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਲਿਟਰੇ ਪਾਣੀ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੋ, ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Jaswinder Singh
Punjab
27-03-2020 11:59 AM
ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ ਮੱਛਰ ਤੋਂ ਬਚਾਉਣ ਲਈ ਸਰੋਂ ਦਾ ਤੇਲ ਅਤੇ ਡੀਜ਼ਲ ਜਾਂ ਮਿਟੀ ਦਾ ਤੇਲ ਮਿਕਸ ਕਰਕੇ ਸਪਰੇ ਕਰੋ, ਇਸ ਵਿਚ ਡੀਜ਼ਲ ਜਾਂ ਮਿਟੀ ਦੇ ਤੇਲ ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਜ਼ਿਆਦਾ ਨਹੀਂ ਹੋਣੀ ਚਾਹੀਦੀ, ਇਹ ਤੁਸੀ ਸਰੋਂ ਦੇ ਤੇਲ ਨਾਲੋਂ ਥੋੜਾ ਘੱਟ ਹੀ ਪਾਓ, ਕਿਉਕਿ ਡੀਜ਼ਲ ਜਾਂ ਮਿਟੀ ਦਾ ਤੇਲ ਜ਼ਿਆਦਾ ਪਾਉਣ ਨਾਲ ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ ਨੁਕਸਾਨ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਇਸਦੀ ਤੁਸੀ ਪਸ਼ੂ ਦੇ ਜਿਥੇ ਜ਼ਿਆਦਾ ਮੱਛਰ ਬੈਠਦਾ ਹੈ ਉਥੇ ਸਪਰੇ ਕਰੋ ਇਸਦੀ ਮà.... (Read More)
ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ ਮੱਛਰ ਤੋਂ ਬਚਾਉਣ ਲਈ ਸਰੋਂ ਦਾ ਤੇਲ ਅਤੇ ਡੀਜ਼ਲ ਜਾਂ ਮਿਟੀ ਦਾ ਤੇਲ ਮਿਕਸ ਕਰਕੇ ਸਪਰੇ ਕਰੋ, ਇਸ ਵਿਚ ਡੀਜ਼ਲ ਜਾਂ ਮਿਟੀ ਦੇ ਤੇਲ ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਜ਼ਿਆਦਾ ਨਹੀਂ ਹੋਣੀ ਚਾਹੀਦੀ, ਇਹ ਤੁਸੀ ਸਰੋਂ ਦੇ ਤੇਲ ਨਾਲੋਂ ਥੋੜਾ ਘੱਟ ਹੀ ਪਾਓ, ਕਿਉਕਿ ਡੀਜ਼ਲ ਜਾਂ ਮਿਟੀ ਦਾ ਤੇਲ ਜ਼ਿਆਦਾ ਪਾਉਣ ਨਾਲ ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ ਨੁਕਸਾਨ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਇਸਦੀ ਤੁਸੀ ਪਸ਼ੂ ਦੇ ਜਿਥੇ ਜ਼ਿਆਦਾ ਮੱਛਰ ਬੈਠਦਾ ਹੈ ਉਥੇ ਸਪਰੇ ਕਰੋ ਇਸਦੀ ਮਾਲਿਸ਼ ਨਹੀਂ ਕਰਨੀ ਹੈ, ਇਸ ਨਾਲ ਮੱਛਰ ਤੋਂ ਰਾਹਤ ਮਿਲ ਜਾਵੇਗੀ.
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