Experts Q&A Search

Posted by Harwinder Singh
Punjab
09-04-2020 07:45 AM
Punjab
04-09-2020 08:44 AM
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ ਬੂਟੇ ਵਿੱਚ ਤੱਤਾਂ ਦੀ ਘਾਟ ਹੈ ਇਸਦੀ ਪੂਰਤੀ ਲਈ NPK 19:19:19@10 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਸਪਰੇਅ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ।
Posted by Ashish
Bihar
09-04-2020 07:39 AM
Punjab
04-09-2020 07:27 PM
isko app pett ke kirro ke liye Fendikind plus bolus den aur her 3 mahine ke badd salt change krke den aur isko achi feed dalen aur acha hara chara dalen, iske sath aap Cafplan powder 100gm rojana dena suru kren, isse achi growth ho jayegi.
Posted by ityanand Singh
Bihar
09-04-2020 07:39 AM
Punjab
04-09-2020 12:47 PM
उत्तर में यह वर्षा और बसंत के मौसम में उगाई जाती है। खरीफ के मौसम में, इसकी बिजाई जून-जुलाई के महीने और बसंत ऋतु में फरवरी-मार्च के महीने में की जाती है।
Posted by Neeraj kumar
Uttar Pradesh
09-04-2020 07:36 AM
Punjab
04-09-2020 08:45 AM
Shri maan g makki mein QUINALPHOS@500 ml per acre spray kr skte ho....
Posted by Gagandeep
Punjab
09-04-2020 07:34 AM
Punjab
04-09-2020 12:43 PM
Gagan ji, eh ik fungicide hai jo ke fungus nal hon valiya bimariyan. di roktham karda hai, isdi matra prati litre de hisaab nal 4 gram di varton kiti jandi hai, dhanwad
Posted by Gurpreet
Haryana
09-04-2020 07:32 AM
Punjab
04-09-2020 12:36 PM
Gurpreet ji, kirpa kar ke daso ke tuhadi tree vich koi dikat a rahi hai, kyu ki iron di spray odo hi kiti jandi hai jad isdi kami de lakshan dikahi dende han, tusi kirpa kar ke photo bhejo taki tuhnu is bare jankari diti ja sake, dhanwad
Posted by rahul
Himachal Pradesh
09-04-2020 07:31 AM
Punjab
04-09-2020 08:46 AM
Shri maan g tomato mein tatvo ki kmi hai iske liye aap NPK 19:19:19@1kg per acre spray kr skte ho.....
Posted by shamsher Singh
Punjab
09-04-2020 07:31 AM
Punjab
04-09-2020 08:47 AM
Shri maan g barseem ch M-45@500gm per acre spray kr skde ho.....
Posted by Sahil Bhagat
Jammu & Kashmir
09-04-2020 07:30 AM
Punjab
04-09-2020 08:47 AM
Shri maan g growth ke liye aap NPK 19:19:19@1kg 150ltr pani mein mila ke per acre spray kr skte ho.....
Posted by satinderbir singh
Punjab
09-04-2020 07:30 AM
Punjab
04-09-2020 12:27 PM
Satinder ji, coragen di sifarish fal vale butea layi nahi kiti jandi hai, kirpa kar ke tusi photo bhejo taki tuhnu dekh ke is bare jankari diti ja sake, dhanwad
Posted by jaswinder singh
Punjab
09-04-2020 07:01 AM
Punjab
05-26-2020 03:04 PM
ਜਸਵਿੰਦਰ ਸਿੰਘ ਜੀ ਮੂੰਗੀ ਦਾ MSP 7050/Q ਹੈ, ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Narinderpal singh
Punjab
09-04-2020 06:59 AM
Punjab
04-09-2020 06:46 PM
Narinderpal ji tuhade swala de jwab ditte gye hai tuci apna swal post krnn ton badd 24 ghntia tak wait kr skde ho tuhade swal da jwab 24 ghntia vich de ditta janda hai.
Posted by Karanveer
Punjab
09-04-2020 06:43 AM
Punjab
04-09-2020 07:15 AM
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ ਟਮਾਟਰ ਨੂੰ ਝੁਲਸ ਰੋਗ ਹੈ ਇਸਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ M-45@500 ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਸਪਰੇਅ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ।
Posted by shergill
Punjab
09-04-2020 06:30 AM
Punjab
04-09-2020 06:44 PM
Shergill ji tuci isdi ehh heat khali shhd ke agli varr heat vich aunn te tika bhrwa skde ho.
Posted by Sahil Bhagat
Jammu & Kashmir
09-04-2020 06:26 AM
Punjab
04-09-2020 07:16 AM
Shri maan g tomato ki growth ke liye aap NPK 19:19:19@1kg 150ltr pani mein mila ke spray kr skte ho.....
Posted by satyendra dwivedi
Uttar Pradesh
09-04-2020 02:19 AM
Rajasthan
04-09-2020 06:43 PM
यदि आप पशुपालन का काम करना चाहते है तो आप अपने नज़दीकी कृषि विज्ञान केन्द्र से ट्रेनिंग ले सकते है वहां समय समय पर किसानों की मांग के अनुसार ट्रेनिंग दी जाती है और उस ट्रेनिंग सर्टीफिकेट से आप लोन और सब्सिड़ी भी ले सकते है आपको इसमें पशु पालन के काम की पूरी जानकारी भी प्राप्त हो जाएगी आप ट्रेनिंग लेने के लिà¤.... (Read More)
यदि आप पशुपालन का काम करना चाहते है तो आप अपने नज़दीकी कृषि विज्ञान केन्द्र से ट्रेनिंग ले सकते है वहां समय समय पर किसानों की मांग के अनुसार ट्रेनिंग दी जाती है और उस ट्रेनिंग सर्टीफिकेट से आप लोन और सब्सिड़ी भी ले सकते है आपको इसमें पशु पालन के काम की पूरी जानकारी भी प्राप्त हो जाएगी आप ट्रेनिंग लेने के लिए Address: KVK Campus, Sultanpur U.P., Uttar Pradesh 228118 Phone: 05362 220 249 से संपर्क कर सकते है। और शुरूआत आप 5 गायों से कर सकते है फिर जैसे जैसे आपको जानकारी होती रहेगी तो आप इस काम को बढ़ा भी सकते है।
Posted by om vijay
Madhya Pradesh
09-04-2020 02:04 AM
Punjab
04-09-2020 06:43 PM
Vijay ji iske vare mai puri jankari lene ke liye aap iss link per click krke video dekh skte hai https://www.youtube.com/watch v=9Ac3GFfX5oM
Posted by Raushan
Bihar
09-04-2020 01:20 AM
Maharashtra
04-09-2020 12:20 PM
सिट्रस को हर तरह की मिट्टी में उगाया जा सकता है हल्की मिट्टी जो अच्छे निकास वाली हो, इसकी खेती के लिए अनुकूल होती है इसके लिए मिट्टी का pH 5.5-7.5 होना चाहिए इन्हें हल्की क्षारीय और तेज़ाबी मिट्टी में भी उगाया जा सकता है हल्की दोमट अच्छे जल निकास वाली मिट्टी सिट्रस की खेती के लिए बहुत अच्छी होती है प्रसिद्ध किस्मà¥.... (Read More)
सिट्रस को हर तरह की मिट्टी में उगाया जा सकता है हल्की मिट्टी जो अच्छे निकास वाली हो, इसकी खेती के लिए अनुकूल होती है इसके लिए मिट्टी का pH 5.5-7.5 होना चाहिए इन्हें हल्की क्षारीय और तेज़ाबी मिट्टी में भी उगाया जा सकता है हल्की दोमट अच्छे जल निकास वाली मिट्टी सिट्रस की खेती के लिए बहुत अच्छी होती है प्रसिद्ध किस्में: Kagzi: यह बड़े क्षेत्र में उगाई जाने वाली नींबू की सामान्य किस्म है इसके वृक्ष ज्यादा घनत्व वाले, छोटे पत्ते और फैलने वाले होते हैं फल छोटे गोल और पतली त्वचा वाले होते हैं इसका रस स्वाद में बहुत तेज़ाबी होता है खेत की तैयारी के लिए, खेत की अच्छी तरह से जोताई, क्रॉस जोताई और अच्छे से समतल करना चाहिए पहाड़ी क्षेत्रों में ढलानों की बजाय मेंड़ पर रोपण किया जाता है ऐसे क्षेत्रों में उच्च घनत्व रोपण भी संभव है रोपाई से पहले, जोताई करें और समतल करें पंजाब में बसंत के मौसम (फरवरी से मार्च) और मॉनसून के मौसम (15 अगस्त से अक्तूबर के अंत) में रोपाई की जाती है लोबिया, सब्जियों, फ्रैंच बीन्स के साथ अंतर फसली शुरूआती दो से तीन वर्ष में किया जा सकता है पौधों के बीच 4.5x4.5 फासला रखना चाहिए नए पौधों की रोपाई के लिए गड्ढों का आकार 60x60x60 सैं.मी. होना चाहिए गड्ढों में रोपाई के समय गली हुई रूड़ी की खाद 10 किलो और सिंगल सुपर फासफेट 500 ग्राम डालें नए पौधों की रोपाई के लिए गड्ढों का आकार 60x60x60 सैं.मी. होना चाहिए पौधों का प्रजनन कलम लगाकर या एयर लेयरिंग द्वारा किया जाता है 208 पौधे प्रति एकड़ का घनत्व बना कर रखना चाहिए पौधे के तने की अच्छी वृद्धि के लिए, ज़मीनी स्तर के नज़दीक से 50-60 सैं.मी. में शाखाओं को निकाल देना चाहिए पौधे का केंद्र खुला होना चाहिए विकास की शुरूआती अवस्था में आस-पास की टहनियों को निकाल देना चाहिए फसल के 1-3 वर्ष की हो जाने पर, अच्छी तरह से गला हुए गाय का गोबर 5-20 किलो और युरिया 100-300 ग्राम प्रति वृक्ष में डालें 4-6 वर्ष की फसल में, अच्छी तरह से गला हुआ गाय का गोबर 25-50 किलो और युरिया 100-300 ग्राम प्रति वृक्ष में डालें 7-9 वर्ष की फसल में यूरिया 60-800 ग्राम और गाय का गला हुआ गोबर 60-90 किलो प्रति वृक्ष में डालें जब फसल 10 वर्ष की या इससे ज्यादा की हो जाए तो गाय का गला हुआ गोबर 100 किलो या यूरिया 800-1600 ग्राम प्रति वृक्ष में डालें नदीनों को हाथ से गोडाई करके या रासायनों द्वारा नियंत्रित किया जा सकता है ग्लाइफोसेट 1.6 लीटर को प्रति 150 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें ग्लाइफोसेट की स्प्रे सिर्फ नदीनों पर ही करें, मुख्य फसल पर ना करें नींबू की फसल को नियमित अंतराल पर सिंचाई की आवश्यकता होती है सर्दियों और गर्मियों में जीवन रक्षक सिंचाई जरूर करें फूल आने के समय, फल लगने के समय और पौधे के अच्छे विकास के लिए सिंचाई आवश्यक है ज्यादा सिंचाई से जड़ गलन और तना गलन की बीमारियों का खतरा होता है उच्च आवृत्ति की सिंचाई फायदेमंद होती है नमकीन पानी फसल के लिए हानिकारक होता है बसंत ऋतु में अकेली जड़ों को पानी देना पौधे को प्रभावित नहीं करता उचित आकार के होने के साथ आकर्षित रंग, शुगर की मात्रा 12:1 होने पर किन्नू के फल तुड़ाई के लिए तैयार हो जाते हैं किस्म के आधार पर फल मध्य जनवरी से मध्य फरवरी के महीने में तैयार हो जाते हैं कटाई उचित समय पर करें, ज्यादा जल्दी और ज्यादा देरी से कटाई करने पर घटिया गुणवत्ता के फल मिलते हैं उचित आकार और आकर्षक रंग लेने पर जब फल में टी एस एस 12:1 तेज़ाब की मात्रा 12:1 अनुपात हो जाने पर किन्नू तुड़ाई के लिए तैयार हो जाते है किस्म के अनुसार किन्नू आमतौर पर मध्य- जनवरी से मध्य फरवरी में पक जाते है सही समय पर तुड़ाई करना जावश्यक है, क्योंकि समय से पहले या देरी से तुड़ाई करने से फलों की गुणवत्ता पर बुरा प्रभाव पड़ता है इसे मिट्टी की कई किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छी वृद्धि और अच्छी उपज के लिए, इसे गहरी दोमट और जलोढ़ मिट्टी की आवश्यकता होती है यह दोमट और हल्की क्षारीय मिट्टी को भी सहनेयोग्य है इसकी खेती हल्की मिट्टी में भी की जा सकती है अनार की खेती के लिए, मध्यम और काली मिट्टी भी उपयुक्त होती है प्रसिद्ध किस्में: kabul,kandhari,Muscet red मिट्टी के भुरभुरा होने तक ज़मीन की दो से तीन बार जोताई करें ज़मीन को समतल और एक समान करने के लिए तवियों से जोताई करें इसकी बिजाई मुख्यत दिसंबर से जनवरी महीने में की जाती है उचित फासला मिट्टी की किस्म और जलवायु पर निर्भर करता है अनार की रोपाई के लिए, यदि वर्गाकार प्रणाली अपनाई गई है तो 5 मी x 5 मी फासले का प्रयोग करें रोपाई से एक महीना पहले बिजाई के लिए 60x60x60 सैं.मी. आकार के गड्ढे खोदें गड्ढों को 15 दिनों तक धूप में खुला छोड़ें उसके बाद 20 किलो रूड़ी की खाद और 1 किलो सुपर फास्फेट को मिट्टी में मिलाकर गड्ढों को भरें गड्ढे भरने के बाद पानी डालें ताकि मिट्टी अच्छे से नीचे बैठ जाये बिजाई के लिए रोपण विधि का प्रयोग किया जाता है अनार का प्रजनन एयर लेयरिंग विधि द्वारा किया जाता है एयर लेयरिंग बारिश के मौसम के साथ साथ नवंबर-दिसंबर महीने में की जाती है एयर लेयरिंग विधि के लिए, एक से दो वर्ष के स्वस्थ, पकी हुई टहनियां जिनकी लंबाई 45-60 सैं.मी. और मोटाई पैंसिल जितनी हों, चुनें बिजाई से पहले, नए पौधों या कटिंग को IBA के घोल 1000 पी पी एम 1 ग्राम प्रति लीटर पानी में डुबोयें शुरूआती दो से तीन वर्षों में अंतरफसली संभव है अंतरफसली के तौर पर सब्जियों, फलीदार फसलें या हरी खाद वाली फसलें उगाई जा सकती हैं पहले वर्ष में गाय का गोबर 10 किलो प्रति पौधे में डालें कैल्शियम अमोनियम नाइट्रेट 500 ग्राम, एस एस पी 600 ग्राम और म्यूरेट ऑफ पोटाश 250 ग्राम प्रति पौधे में रोपाई के समय डालें गाय के गोबर, एस एस पी, म्यूरेट ऑफ पोटाश और नाइट्रोजन की आधी मात्रा दिसंबर से जनवरी महीने में डालें बाकी की नाइट्रोजन को दो भागों में बांटे पहले भाग को, फलों के पहली बार विकसित होने के समय और दूसरे भाग को, फलों के दूसरी बार विकसित होने के 4-5 सप्ताह पहले डालें रोपाई के तुरंत बाद सिंचाई करें उसके बाद, रोपाई के बाद 3 दिन से 10-15 दिनों के अंतराल पर पानी दें बारिश के मौसम में, निकास का प्रबंध करें क्योंकि यह फसल जल जमाव के हालातों में खड़ी नहीं रह सकती गर्मियों में 7-10 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें और सर्दियों में इसे बढ़ाकर 10-15 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें अनियमित सिंचाई से फूलों के गिरने में वृद्धि हो सकती है फलों के विकसित होने की अवस्था में पानी की कमी ना होने दें और पानी की कमी होने पर अत्याधिक पानी देने से फलों में दरारें पड़ जाती हैं और फल गिर जाता है इसलिए फूल निकलने से लेकर तुड़ाई की अवस्था तक नियमित और पर्याप्त सिंचाई दें तुपका सिंचाई से अनार अच्छे परिणाम देते हैं तुपका सिंचाई से ना केवल पानी की बचत होती है बल्कि पानी की कम मात्रा में अच्छी उपज भी मिलती है नदीनों की रोकथाम के लिए मलचिंग की जा सकती है नदीनों की रोकथाम के साथ साथ मिट्टी में नमी को संरक्षित करने में मदद करता है और और वाष्पीकरण हानि को भी कम करता है कटाई और छंटाई ताजी सेहतमंद टहनियों की वृद्धि करने में मदद करती है बीमारी से और घनी शाखाओं को निकाल दें यह पौधे के आकार को उचित बनाए रखता है फूल निकलने के बाद, फल 5-6 महीनों में पक जाते हैं जब फल हरे से हल्के पीले या लाल रंग का हो जाये, या फल पकना शुरू हो जाये तो यह तुड़ाई के लिए उपयुक्त समय होता है तुड़ाई करने में देरी ना करें क्योंकि इससे फलों में दरारें आ जाती हैं जिससे पैदावार कम हो जाती है तुड़ाई के बाद, फलों को एक सप्ताह के लिए छांव में स्टोर करके रखें यह फल के छिल्के को सख्त होने में मदद करेगा ताकि एक जगह से दूसरी जगह ले जाने में नुकसान कम हो फलों को भार के अनुसान छांटे
Posted by satyendra dwivedi
Uttar Pradesh
09-04-2020 01:18 AM
Rajasthan
04-09-2020 06:41 PM
यदि आप पशुपालन का काम करना चाहते है तो आप अपने नज़दीकी कृषि विज्ञान केन्द्र से ट्रेनिंग ले सकते है वहां समय समय पर किसानों की मांग के अनुसार ट्रेनिंग दी जाती है और उस ट्रेनिंग सर्टीफिकेट से आप लोन और सब्सिड़ी भी ले सकते है आपको इसमें पशु पालन के काम की पूरी जानकारी भी प्राप्त हो जाएगी आप ट्रेनिंग लेने के लिà¤.... (Read More)
यदि आप पशुपालन का काम करना चाहते है तो आप अपने नज़दीकी कृषि विज्ञान केन्द्र से ट्रेनिंग ले सकते है वहां समय समय पर किसानों की मांग के अनुसार ट्रेनिंग दी जाती है और उस ट्रेनिंग सर्टीफिकेट से आप लोन और सब्सिड़ी भी ले सकते है आपको इसमें पशु पालन के काम की पूरी जानकारी भी प्राप्त हो जाएगी आप ट्रेनिंग लेने के लिए Address: KVK Campus, Sultanpur U.P., Uttar Pradesh 228118 Phone: 05362 220 249 से संपर्क कर सकते है। और शुरूआत आप 5 गायों से कर सकते है फिर जैसे जैसे आपको जानकारी होती रहेगी तो आप इस काम को बढ़ा भी सकते है।
Posted by satyendra dwivedi
Uttar Pradesh
09-04-2020 01:12 AM
Rajasthan
04-09-2020 06:37 PM
यदि आप पशुपालन का काम करना चाहते है तो आप अपने नज़दीकी कृषि विज्ञान केन्द्र से ट्रेनिंग ले सकते है वहां समय समय पर किसानों की मांग के अनुसार ट्रेनिंग दी जाती है और उस ट्रेनिंग सर्टीफिकेट से आप लोन और सब्सिड़ी भी ले सकते है आपको इसमें पशु पालन के काम की पूरी जानकारी भी प्राप्त हो जाएगी आप ट्रेनिंग लेने के लिà¤.... (Read More)
यदि आप पशुपालन का काम करना चाहते है तो आप अपने नज़दीकी कृषि विज्ञान केन्द्र से ट्रेनिंग ले सकते है वहां समय समय पर किसानों की मांग के अनुसार ट्रेनिंग दी जाती है और उस ट्रेनिंग सर्टीफिकेट से आप लोन और सब्सिड़ी भी ले सकते है आपको इसमें पशु पालन के काम की पूरी जानकारी भी प्राप्त हो जाएगी आप ट्रेनिंग लेने के लिए Address: KVK Campus, Sultanpur U.P., Uttar Pradesh 228118 Phone: 05362 220 249 से संपर्क कर सकते है।
Posted by dileep
Uttar Pradesh
08-04-2020 11:59 PM
Punjab
04-09-2020 12:52 PM
Dileep ji kripya aap btaye ke isme koi fasl ki bijai ki hai ya nahi taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake,dhanywad
Posted by lu chandra
Uttar Pradesh
08-04-2020 11:27 PM
Rajasthan
04-09-2020 12:48 PM
Moti ki kheti bhut acha kam hai, aap iss kam ko suru krne se pehle iski training jrur len jisme apki iss kam ki puri jankari ho jayegi aur apko practical training v milegi, aap iski jankari aur training lene ke liye iss no. per 9711858258 sampark kr skte hai iska rs.250/- mai registration hota hai
Posted by inderjeet singh
Haryana
08-04-2020 11:16 PM
Punjab
04-09-2020 01:03 PM
inderjeet ji tuc atrazine@500gram nu prati acre de hisab nal spray karo,dhanwad
Posted by Prashant Vaghela
Gujarat
08-04-2020 11:08 PM
Rajasthan
04-09-2020 12:50 PM
यदि आप मोती की खेती के बारे में जानकारी लेना चाहते है तो मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्à¤.... (Read More)
यदि आप मोती की खेती के बारे में जानकारी लेना चाहते है तो मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद
Posted by Jaylal Meena
Rajasthan
08-04-2020 10:58 PM
Punjab
04-09-2020 01:08 PM
महोगनी के पेड़ के लगभग सभी भागों का इस्तेमाल किया जाता है. इसकी लकड़ी का इस्तेमाल जहाज़, फर्नीचर, प्लाईवुड, सजावट की चीजें और मूर्तियों को बनाने में किया जाता हैं. जबकि इसके बीज और फूलों का इस्तेमाल शक्तिवर्धक दवाइयों को बनाने में किया जाता है. महोगनी का वृक्ष जल भराव वाली भूमि को छोड़कर अन्य किसी भी प्रकार की उप.... (Read More)
महोगनी के पेड़ के लगभग सभी भागों का इस्तेमाल किया जाता है. इसकी लकड़ी का इस्तेमाल जहाज़, फर्नीचर, प्लाईवुड, सजावट की चीजें और मूर्तियों को बनाने में किया जाता हैं. जबकि इसके बीज और फूलों का इस्तेमाल शक्तिवर्धक दवाइयों को बनाने में किया जाता है. महोगनी का वृक्ष जल भराव वाली भूमि को छोड़कर अन्य किसी भी प्रकार की उपजाऊ भूमि में लगाया जा सकता है. इसके वृक्ष को पथरीली मिट्टी में नही लगाया जा सकता. इसकी खेती के लिए मिट्टी का पी.एच. मान सामान्य होना चाहिए. महोगनी की खेती के लिए उष्णकटिबंधीय जलवायु सबसे उपयुक्त होती है. इसके वृक्ष को ज्यादा बारिश की भी जरूरत नही होती. सामान्य मौसम में इसके पेड़ अच्छे से विकास करते हैं. शुरुआत में इसके पौधों को तेज़ गर्मी और सर्दी से बचाने की जरूरत होती है. सर्दियों में पड़ने वाला पाला इसके लिए उपयुक्त नही होता है. इनके अलावा तेज़ हवाओं के चलने से इसके वृक्ष को नुक्सान पहुँचता है. क्योंकि इनकी जड़ें जमीन में ज्यादा गहराई में नही जाती है. इसके पौधे को अंकुरित होने और विकास करने के लिए सामान्य तापमान की जरूरत होती है. इसका पूर्ण विकसित वृक्ष सर्दियों में 15 और गर्मियों में 35 डिग्री तापमान पर भी अच्छे से विकास कर सकता है. क्यूबन, मैक्सिकन, अफ्रीकन, न्यूज़ीलैंड, और होन्डूरन किस्में लगाने के लिए उपयुक्त हैं महोगनी के वृक्ष की खेती के लिए शुरुआत में खेत की गहरी जुताई कर उसे खुला छोड़ दें. उसके बाद खेत की दो से तीन तिरछी जुताई कर दे. जुताई करने के बाद खेत में पाटा चलाकर खेत को समतल बना लें. समतल खेत में जल भराव की समस्या का सामना नही करना पड़ता. खेत के समतल होने के बाद उसमें 5 से 7 फिट की दूरी रखते हुए तीन फिट चौड़ाई और दो फिट गहराई के गड्डे तैयार कर लें. इन गड्डों को तैयार करते वक्त ध्यान रखे कि इन गड्डों को पंक्तियों में तैयार करें. और प्रत्येक पंक्तियों के बीच तीन से चार मीटर की दूरी होनी चाहिए. गड्डों को तैयार कर उनमें जैविक और रासायनिक खादों को मिट्टी में मिलाकर गड्डों में भर दें. उसके बाद गड्डों की गहरी सिंचाई कर उन्हें ढक दें. इन गड्डों को पौध रोपाई से एक महीने पहले तैयार किया जाता है. महोगनी के पौधे किसान भाई किसी भी सरकारी रजिस्टर्ड कंपनी से खरीद सकते हैं. इसके अलावा किसान भाई इसकी पौध नर्सरी में भी तैयार कर सकते हैं. लेकिन इसमें बहुत ज्यादा टाइम और मेहनत लगती है. जिस कारण किसान भाइयों के लिए इसकी पौध खरीदकर लगाना सबसे उचित होता है. नर्सरी से हमेशा दो से तीन साल पुराने और अच्छे से विकास कर रहे पौधे को ही खरीदें. इसके पौधों को खेत में तैयार किये गए गड्डों में लगाया जाता है. इसके पौधों को गड्डों में लगाने से पहले खेत में तैयार किये गए गड्डों के बीचोंबीच एक और छोटा गड्डा तैयार कर लेना चाहिए. इस छोटे गड्डे में इसके पौधे को लगाकर उसे चारों तरफ से मिट्टी से दबा दें. इसके पौधों को खेत में लगाने का सबसे उपयुक्त टाइम जून और जुलाई का महीना होता है. क्योंकि इस दौरान भारत में मानसून का दौर होता है. जिससे पौधों को विकास करने के लिए उपयुक्त वातावरण मिलता है. और इस दौरान बारिश के होने से पौधों को सिंचाई की भी जरूरत नही होती. महोगनी के पौधों को खेत में लगाने के बाद उन्हें शुरुआत में सिंचाई की ज्यादा जरूरत होती है. इस दौरान पौधों को गर्मियों में 5 से 7 दिन के अंतराल में पानी देना चाहिए. और सर्दियों में 10 से 15 दिन के अंतराल में पानी देना उचित होता है. जबकि बारिश के वक्त इसके पेड़ों को पानी की जरूरत नही होती है. जैसे जैसे पौधे का विकास होता जाता है. वैसे वैसे ही पानी देने की दर घट जाती है. एक पूर्ण विकसित वृक्ष की साल में 5 से 6 सिंचाई काफी होती है. इसके वृक्ष को भी बाकी पेड़ों की तरह उर्वरक की जरूरत होती है. इसके लिए शुरुआत में गड्डों की भराई के वक्त 20 किलो गोबर की खाद और 80 ग्राम एन.पी.के. की मात्रा मिट्टी में मिलाकर दें. पौधों को उर्वरक की ये मात्रा लगभग चार साल तक देनी चाहिए. उसके बाद पौधों के विकास के साथ साथ उर्वरक की भी मात्रा को बढ़ा देना चाहिए. पूर्ण विकसित पौधे को 50 किलो जैविक और एक किलो रासायनिक खाद की मात्रा साल में तीन बार सिंचाई से पहले देनी चाहिए. महोगनी के वृक्ष की कटाई लगभग 12 साल बाद की जाती है. जब इसका पेड़ पूरी तरह से तैयार हो जाता है. इसके अलावा अधिक देरी से काटने पर भी इसकी खेती से अधिक उपज मिलती है. इसके वृक्षों की कटाई जड़ के पास से की जाती है.
Posted by Manish Chouhan
Madhya Pradesh
08-04-2020 10:55 PM
Punjab
04-09-2020 12:51 PM
यदि आप दूध निकालने वाली मशीन लेना चाहते है तो आप इनमें से किसी भी कंपनी की ले सकते है जैसे Vansum Pvt.Ltd. 9811104804, Solutions packing machine 9569010005 , Milkwell Milking machine 9416003826
Posted by Jaylal Meena
Rajasthan
08-04-2020 10:54 PM
Punjab
04-09-2020 01:12 PM
महोगनी के पेड़ के लगभग सभी भागों का इस्तेमाल किया जाता है. इसकी लकड़ी का इस्तेमाल जहाज़, फर्नीचर, प्लाईवुड, सजावट की चीजें और मूर्तियों को बनाने में किया जाता हैं. जबकि इसके बीज और फूलों का इस्तेमाल शक्तिवर्धक दवाइयों को बनाने में किया जाता है. महोगनी का वृक्ष जल भराव वाली भूमि को छोड़कर अन्य किसी भी प्रकार की उप.... (Read More)
महोगनी के पेड़ के लगभग सभी भागों का इस्तेमाल किया जाता है. इसकी लकड़ी का इस्तेमाल जहाज़, फर्नीचर, प्लाईवुड, सजावट की चीजें और मूर्तियों को बनाने में किया जाता हैं. जबकि इसके बीज और फूलों का इस्तेमाल शक्तिवर्धक दवाइयों को बनाने में किया जाता है. महोगनी का वृक्ष जल भराव वाली भूमि को छोड़कर अन्य किसी भी प्रकार की उपजाऊ भूमि में लगाया जा सकता है. इसके वृक्ष को पथरीली मिट्टी में नही लगाया जा सकता. इसकी खेती के लिए मिट्टी का पी.एच. मान सामान्य होना चाहिए. महोगनी की खेती के लिए उष्णकटिबंधीय जलवायु सबसे उपयुक्त होती है. इसके वृक्ष को ज्यादा बारिश की भी जरूरत नही होती. सामान्य मौसम में इसके पेड़ अच्छे से विकास करते हैं. शुरुआत में इसके पौधों को तेज़ गर्मी और सर्दी से बचाने की जरूरत होती है. सर्दियों में पड़ने वाला पाला इसके लिए उपयुक्त नही होता है. इनके अलावा तेज़ हवाओं के चलने से इसके वृक्ष को नुक्सान पहुँचता है. क्योंकि इनकी जड़ें जमीन में ज्यादा गहराई में नही जाती है. इसके पौधे को अंकुरित होने और विकास करने के लिए सामान्य तापमान की जरूरत होती है. इसका पूर्ण विकसित वृक्ष सर्दियों में 15 और गर्मियों में 35 डिग्री तापमान पर भी अच्छे से विकास कर सकता है. क्यूबन, मैक्सिकन, अफ्रीकन, न्यूज़ीलैंड, और होन्डूरन किस्में लगाने के लिए उपयुक्त हैं महोगनी के वृक्ष की खेती के लिए शुरुआत में खेत की गहरी जुताई कर उसे खुला छोड़ दें. उसके बाद खेत की दो से तीन तिरछी जुताई कर दे. जुताई करने के बाद खेत में पाटा चलाकर खेत को समतल बना लें. समतल खेत में जल भराव की समस्या का सामना नही करना पड़ता. खेत के समतल होने के बाद उसमें 5 से 7 फिट की दूरी रखते हुए तीन फिट चौड़ाई और दो फिट गहराई के गड्डे तैयार कर लें. इन गड्डों को तैयार करते वक्त ध्यान रखे कि इन गड्डों को पंक्तियों में तैयार करें. और प्रत्येक पंक्तियों के बीच तीन से चार मीटर की दूरी होनी चाहिए. गड्डों को तैयार कर उनमें जैविक और रासायनिक खादों को मिट्टी में मिलाकर गड्डों में भर दें. उसके बाद गड्डों की गहरी सिंचाई कर उन्हें ढक दें. इन गड्डों को पौध रोपाई से एक महीने पहले तैयार किया जाता है. महोगनी के पौधे किसान भाई किसी भी सरकारी रजिस्टर्ड कंपनी से खरीद सकते हैं. इसके अलावा किसान भाई इसकी पौध नर्सरी में भी तैयार कर सकते हैं. लेकिन इसमें बहुत ज्यादा टाइम और मेहनत लगती है. जिस कारण किसान भाइयों के लिए इसकी पौध खरीदकर लगाना सबसे उचित होता है. नर्सरी से हमेशा दो से तीन साल पुराने और अच्छे से विकास कर रहे पौधे को ही खरीदें. इसके पौधों को खेत में तैयार किये गए गड्डों में लगाया जाता है. इसके पौधों को गड्डों में लगाने से पहले खेत में तैयार किये गए गड्डों के बीचोंबीच एक और छोटा गड्डा तैयार कर लेना चाहिए. इस छोटे गड्डे में इसके पौधे को लगाकर उसे चारों तरफ से मिट्टी से दबा दें. इसके पौधों को खेत में लगाने का सबसे उपयुक्त टाइम जून और जुलाई का महीना होता है. क्योंकि इस दौरान भारत में मानसून का दौर होता है. जिससे पौधों को विकास करने के लिए उपयुक्त वातावरण मिलता है. और इस दौरान बारिश के होने से पौधों को सिंचाई की भी जरूरत नही होती. महोगनी के पौधों को खेत में लगाने के बाद उन्हें शुरुआत में सिंचाई की ज्यादा जरूरत होती है. इस दौरान पौधों को गर्मियों में 5 से 7 दिन के अंतराल में पानी देना चाहिए. और सर्दियों में 10 से 15 दिन के अंतराल में पानी देना उचित होता है. जबकि बारिश के वक्त इसके पेड़ों को पानी की जरूरत नही होती है. जैसे जैसे पौधे का विकास होता जाता है. वैसे वैसे ही पानी देने की दर घट जाती है. एक पूर्ण विकसित वृक्ष की साल में 5 से 6 सिंचाई काफी होती है. इसके वृक्ष को भी बाकी पेड़ों की तरह उर्वरक की जरूरत होती है. इसके लिए शुरुआत में गड्डों की भराई के वक्त 20 किलो गोबर की खाद और 80 ग्राम एन.पी.के. की मात्रा मिट्टी में मिलाकर दें. पौधों को उर्वरक की ये मात्रा लगभग चार साल तक देनी चाहिए. उसके बाद पौधों के विकास के साथ साथ उर्वरक की भी मात्रा को बढ़ा देना चाहिए. पूर्ण विकसित पौधे को 50 किलो जैविक और एक किलो रासायनिक खाद की मात्रा साल में तीन बार सिंचाई से पहले देनी चाहिए. महोगनी के वृक्ष की कटाई लगभग 12 साल बाद की जाती है. जब इसका पेड़ पूरी तरह से तैयार हो जाता है. इसके अलावा अधिक देरी से काटने पर भी इसकी खेती से अधिक उपज मिलती है. इसके वृक्षों की कटाई जड़ के पास से की जाती है.
Posted by mahendra singh
Rajasthan
08-04-2020 10:28 PM
Punjab
04-09-2020 12:58 PM
आप बकरी पालन की ट्रेनिंग लेने के लिए अपने नज़दीकी ​कृषि विज्ञान केन्द्र से संपर्क कर सकते है वहां समय समय पर किसानों की मांग के अनुसार ट्रेनिंग दी जाती है आप Krishi Vigyan Kendra Rithola, Chittorgarh - 312 001, (Raj.) India Phone : 01472-235448 से संपर्क कर सकते है।
Posted by Parwinder Singh
Punjab
08-04-2020 10:25 PM
Punjab
04-09-2020 01:06 PM
kashmiri apple ber nu red thai apple ber vi bolde han. isdi bijai june to july tak kiti jandi hai . isde paudhe lain layi pawan kumar 9878726420 nal sampark kar sakde ho.dhanwad
Posted by रावेन्द सिंह
Madhya Pradesh
08-04-2020 10:18 PM
Punjab
04-09-2020 01:15 PM
रावेन्द्र जी आप दीमक की रोकथाम के लिए chlorpyriphos @4ml को प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें| चूहों से बचाव के लिए आप नीचे लिखे तरीके प्रयोग कर सकते हैं, पिंजरो का प्रयोग करना - चूहो को पडने के अलग अलग पिजंरो का प्रयोग किया जाता है इन पिजंरो का प्रयोग करने से पहले पिजंरे को अच्छी तरह धोकर प्रयोग करे ताकि किसी भी प्र.... (Read More)
रावेन्द्र जी आप दीमक की रोकथाम के लिए chlorpyriphos @4ml को प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें| चूहों से बचाव के लिए आप नीचे लिखे तरीके प्रयोग कर सकते हैं, पिंजरो का प्रयोग करना - चूहो को पडने के अलग अलग पिजंरो का प्रयोग किया जाता है इन पिजंरो का प्रयोग करने से पहले पिजंरे को अच्छी तरह धोकर प्रयोग करे ताकि किसी भी प्रकार की गंध ना आये साफ पिंजरो को खेत में चूहो के आने जाने वाले रास्ते और नुक्सान करने वाली जगह पर रखे बडी संखिया में चूहो को पकडने के लिए पिंजरे में 10-15 ग्राम अनाज को तेल लगाकर दो से तीन दिनो तक मुंह खोलकर रखे चुहो को मगर लगाने के बाद पिंजरे के अंदर कागज के टूकडो पर 10-15 ग्राम दाने और नालीदार दाखले पर चुटकी भर दाने रखकर मुंह को बंद कर दे ऐसा करके तीन दिन तक चूहे और पकडे हुए चूहो को पानी में डूबो कर मारे पिंजरो का दौबारा प्रयोग करने के लिए कम से कम 20 दिनो का फासला रखें कीडेमार जहरो के प्रयोग से रोकथाम - चूहो की कीडेमार और जहर के प्रयोग से रोकथाम करने के लिए जहरीला चोगा प्रयोग करने में ध्यान और सही तरीका प्रयोग करने की जरूरत है चुहो को इस जहरीले चोगे को खाना प्रयोग किये दानो का मियारपन , स्वाद, और तेल की गंध पर निर्भर करता है जहरीला चोगा बनाना जिंक फॉसफाइड का प्रयोग - एक किलो बाजरा गेहूं ज्वार का दलिया या इनका मिश्रण लेकर इसमे 20 ग्राम तेल हो सके तो मुंगफली का तेल और 25 ग्राम जिंकफॉसफाइड डाल कर अच्छी तरह मिलाये इस प्रकार तैया किये जहरीले चोगे को कागज की पुडीया बनाकर खेत में गेज वाली जगह पर रखे बरोमोडाइओलोन का प्रयोग - 20 ग्राम बरोमोडाइओलोन 0 005 फीसदी पाऊडर, 20 ग्राम बूरा खंड, और 20 ग्राम तेल को एक किलो किसी भी अनाज के दलिये में मिलाये और पूरे खेत में 40 जगह पर रख दें रैकुमिन का प्रयोग- 50 ग्राम रैकुमिन 0 0375 फीसदी पाऊडर , 20 ग्राम मुंगफली या सूरजमुखी का तेल और 20 ग्राम बूरा खंड को किसी भी अनाज के दलीये में मिलाये यह भी चूहो को मारने में बहुत फायदेमंद है
Posted by gurjot
Punjab
08-04-2020 10:10 PM
Punjab
04-09-2020 06:30 AM
shrimaan g barseem vich soondi di roktham Quinalphos @800 ml per acre hi recommended kiti gyi hai g..
Posted by anil samuel
Uttar Pradesh
08-04-2020 10:02 PM
Punjab
04-09-2020 01:20 PM
anil ji gamle men papite ko ugane ke bade gamle ka istemal karna chahiye aapadhik jankari ke liye sath me diye gaye link par click karen https://www.youtube.com/watch?v=OKDK92D4Hg4&vl=en
Posted by simranjit singh sidhu
Punjab
08-04-2020 09:53 PM
Punjab
04-09-2020 01:53 PM
Simranjit ji tuc sabjiyan ja makki di bijai kar sakde ho.dhanwad
Posted by Ashwani kumar
Jammu & Kashmir
08-04-2020 09:34 PM
Punjab
04-09-2020 01:13 PM
Ashwani ji kuroiler chicks ek sall mai lagbhag 145-150 tak egg dete hai baki apki khurak aur sahi dekbhal per nirbhar krta hai.
Posted by sachchida nand
Uttar Pradesh
08-04-2020 09:32 PM
Punjab
04-09-2020 01:55 PM
सच्चिदा जी कृपया आप बताये कि आप कौन सी सब्जी की बिजाई करना चाहते है ताकि आपको उसके हिसाब से ट्रेक्टर के बारे में जानकारी दी जा सके|
Posted by Krishi Jagat
Haryana
08-04-2020 09:30 PM
Punjab
04-09-2020 01:57 PM
यह फंगस के हमले के कारण है इसके लिए आप carbendazim@400 ग्राम प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे करें।
Posted by Muñish
Punjab
08-04-2020 09:25 PM
Punjab
04-09-2020 01:15 PM
Munish ji jekar usda 10 april tak din puure ho jane hai fir ohh lagbhag 5-6 dina vich suun skdi hai jekar ohh bechan rehndi hai ate chara ghatt khndi hai ehh pashu de suun de nazdik honn dia nishania hundia hai.
Posted by mandip ghuman
Punjab
08-04-2020 09:11 PM
Rajasthan
04-09-2020 02:45 PM
jekar tuci pashua nu ghar vich 100kg feed tyar krnn lai uss vich 25kg anaz(jawar, bazri(sardia) kanak, jo(garmia) ehna vicho ek), dal churi 20kg(mungi churri, mahh churri, moth churri(sardia vich) masur churri, arhar(koi ek), DOC 25kg, (chawal da chura), fiber chilka15kg( kanak, chokar, chana chilka, matar chilka, ehna vicho koi ek), khall 15 kg(saro, binola ja soya,(ehna vicho ek), mitha soda 250gm, 1kg namak, gurr 1kg, 1 kg haldi(sardia vich) ehh sara kuj mix krke pashua nu khwa skde ho ehh tuci 3 kg dudh mgar 1 kg de hisab nal de skde ho..
Posted by Kamal Kalia
Punjab
08-04-2020 09:10 PM
Punjab
04-09-2020 02:00 PM
kamal ji jhone di sidhi bijai de layi PR126 kisam di bijai kiti jandi hai.bijai de layi 8 kilo beej di lod hundi hai ate eh tirshi plate vali drill de nalkiti jandi hai.isnu sukke khet vich ja rauni krke beejya janda hai,dhanwad
Posted by Vicky Romana
Punjab
08-04-2020 08:52 PM
Punjab
04-09-2020 01:19 PM
ਵਿੱਕੀ ਜੀ ਤੁਸੀ ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ ਸੂਣ ਤੋਂ 2 ਮਹੀਨੇ ਪਹਿਲਾ ਵਧਿਆ ਖੁਰਾਕ ਦੇਣੀ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਅਤੇ ਉਸ ਨੂੰ ਕਾਰਗਿਲ ਦੀ Transition mix ਫੀਡ ਦੇਣੀ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਅਤੇ Vitamor-H liquid 10-10ml ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦਿਓ, ਇਸ ਨਾਲ ਪਸ਼ੂ ਦੀ ਕਮਜ਼ੋਰੀ ਦੂਰ ਰਹਿੰਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਲੇਵਾ ਵਧਿਆ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਤੁਸੀ ਫੀਡ 1-1.5 ਕਿਲੋ ਰੋਜਾਨਾ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ..
Posted by Navneet Mishra Shivam
Uttar Pradesh
08-04-2020 08:47 PM
Punjab
04-09-2020 02:02 PM
मिश्रा जी कृपया बताये कि आपने कौन सी कंपनी की coragen की स्प्रे की है ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके|
Posted by Khushwinder Singh
Punjab
08-04-2020 08:47 PM
Punjab
04-09-2020 02:06 PM
Khushwinder ji you can grow varities like OD-19 (Sugandhi),Pragathi,Nima,Cauvery.thank you
Posted by Lovepreet Singh
Punjab
08-04-2020 08:38 PM
Punjab
04-09-2020 02:09 PM
lovepreet ji isnu pehli sinchai fasl de 20-25% ugan te hi karo hake isnu sinchai di lod nahi hai,dhanwad
Posted by gurpreet singh
Punjab
08-04-2020 08:32 PM
Punjab
04-09-2020 01:25 PM
ਹਾਂਜੀ ਇਸਦਾ ਵਧਿਆ ਰਿਜਲਟ ਹੈ ਤੁਸੀ ਇਸਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਬਾਕੀ ਉਸਦੀ ਖੁਰਾਕ ਅਤੇ ਰਹਿਣ ਸਹਿਣ ਦਾ ਪੂਰਾ ਧਿਆਨ ਰੱਖੋ ਬਾਕੀ ਉਸ ਨੂੰ ਸੂਣ ਤੋਂ ਇਕ ਮਹੀਨਾ ਪਹਿਲਾ ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਨਾਲ Metabolite ਪਾਊਡਰ ਦੀ ਰੋਜਾਨਾ ਇਕ ਪੁੜੀ ਦੇਣੀ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ..
Posted by chhina saab
Punjab
08-04-2020 08:29 PM
Punjab
04-09-2020 01:27 PM
Manjinder ji tuci uss nu pett de kiria lai Bandykind plus bolus deo ate uss nu ovumin advance tablet rojana 1 goli deo ate 21 din tak dinde rho, iss nal heat vich aa jawegi.
Posted by ਮਨਪ੍ਰੀਤ ਸਿੰਘ
Punjab
08-04-2020 08:24 PM
Punjab
04-09-2020 01:28 PM
ਤੁਸੀ ਗੱਭਣ ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ 30 ਮਿਲੀ ਰੋਜਾਨਾ ਲੀਵਰ ਟੌਨਿਕ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਸ ਨਾਲ ਹਾਜਮਾ ਠੀਕ ਰਹਿੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸਦਾ ਕੋਈ ਨੁਕਸਾਨ ਨਹੀਂ ਹੈ