
Posted by khushi ram
Haryana
12-04-2020 12:19 PM
ख़ुशी राम जी कृपया बताये कि आप हारडा किसे कह रहे है ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके |

Posted by Ravi Choudhary
Rajasthan
12-04-2020 12:15 PM
Ravi ji apke dubara bheji gyi audio upload nhi hui hai aap dubara audio upload kren tan jo apko sahi jankari di ja skee.

Posted by Vinod Kumar
Punjab
12-04-2020 12:08 PM
Vinod Kumar ji fazilka vich 500 price chal reha hai ji. baki es to thoda ghat ya vad v ho sakda hai ji.

Posted by Amarit
Punjab
12-04-2020 12:07 PM
Amrit ji isde uper fungus da hamla hai tuc isde uper mancozeb@4 gram nu prati litre pani de hisab nal spray karo.dhanwad

Posted by Satish Rathore
Rajasthan
12-04-2020 11:51 AM
इसके सख्त होने के कारण इसको कई किस्म की मिट्टी में उगाया जा सकता है| इसको सोडिक, पुअर, नमकीन, चूने वाली और दलदली मिट्टी में उगाया जा सकता है| इसको पानी के घटिया निकास वाली मिट्टी में भी उगाया जा सकता है| यह अच्छे निकास वाली उपजाऊ, घनी दोमट मिट्टी में बढ़िया पैदावार देती है| भारी और रेतली मिट्टी में इसकी खेती नहीं .... (Read More)
इसके सख्त होने के कारण इसको कई किस्म की मिट्टी में उगाया जा सकता है| इसको सोडिक, पुअर, नमकीन, चूने वाली और दलदली मिट्टी में उगाया जा सकता है| इसको पानी के घटिया निकास वाली मिट्टी में भी उगाया जा सकता है| यह अच्छे निकास वाली उपजाऊ, घनी दोमट मिट्टी में बढ़िया पैदावार देती है| भारी और रेतली मिट्टी में इसकी खेती नहीं करनी चाहिए|Badama: इस किस्म के फल आकार में बढे और बहुत ज्यादा रसीले होते हैं|kaatha: इस किस्म के फल आकार में छोटे और खट्टे होते हैं|jathi: इस किस्म के फल मुख्य रूप से मई-जून के महीने में पक जाते हैं|Ashada: इस किस्म के फल मुख्य रूप से जून-जुलाई के महीने में पक जाते हैं|Bhado: इस किस्म के फल मुख्य रूप से अगस्त के महीने में पक जाते हैं |Ra-jamun: इस किस्म के फल आकार में बढे और रसीले होते हैं, जिनका रंग जमुनी होता है और बीज छोटे होते है|जामुन की बिजाई के लिए अच्छी तरह से तैयार की गई ज़मीन की जरूरत होती है| मिट्टी को ठीक स्तर पर लेकर आने के लिए एक बार खेत की जोताई करें| फिर गड्ढे खोदे और रूडी की खाद 3:1 के अनुपात के साथ गड्ढों को भर दें| तैयार किये हुए बैडों पर पनीरी वाले पौधों की बिजाई करें|इसकी खेती बसंत और मानसून - दोनों मौसम में की जा सकती है| बसंत मौसम में इसकी बिजाई फरवरी-मार्च के महीने में और मानसून मौसम में इसकी बिजाई जुलाई-अगस्त के महीने में की जाती है|पनीरी वाले पौधों के लिए दोनों तरफ से 10 मीटर के फासले और गांठों के लिए दोनों तरफ से 8 मीटर के फासले की सिफारिश की जाती है|बीज को 4-5 सै.मी. गहरा बोयें|बीजों को सीधा बैड पर ही बोया जाता है|एक गड्ढे के लिए एक बीज का प्रयोग करें|इसके पौधे आम रूप से कलम या बीजों के द्वारा तैयार किये जाते है|अच्छी तरह से गली-सड़ी हुई 20-25 किलो रूडी की खाद प्रति पौधे को प्रति साल डालें| जब पौधे फल देने की स्थिति में पहुंच जाये तो रूडी की खाद की मात्रा बढ़ा कर 50-60 किलो प्रति पौधे को प्रति साल डालें| पूरी तरह से विकसित हो चुके वृक्ष को नाइट्रोजन 500 ग्राम, पोटाश 600 ग्राम और फास्फोरस 300 ग्राम प्रति पौधे को प्रति साल डालें|

Posted by varinder singh
Punjab
12-04-2020 11:48 AM
श्री मान किन्नू के ऊपर आप NPK 13:0:45@10 gm प्रती लीटर पानी में मिलाकर सप्रे कर सकते हो।

Posted by Mustak Ahmad
Rajasthan
12-04-2020 11:40 AM
अहमद जी आप इनकी मात्रा 300 -500 ग्राम को प्रति पौधे के हिसाब से डाले|

Posted by Jitendra Kumar
Jharkhand
12-04-2020 11:23 AM
aap Kadaknath, punjab brown nasal rakh skte hai aur Improved breed mai gramapriya, vanaraja, giriraja rakh skte hai..
Posted by Surendra Ranawat
Rajasthan
12-04-2020 11:23 AM
सुरेंद्र जी आप इसके लिए अमरुद की बिजाई कर सकते है|

Posted by हितेंद्र सिंह
Rajasthan
12-04-2020 11:20 AM
श्री मान मिर्च रेतली से भारी चिकनी हर तरह की मिट्टी में उगाई जा सकती है अच्छे विकास के लिए हल्की उपजाऊ और पानी के अच्छे निकास वाली ज़मीन जिसमे नमी सोखने की क्षमता हो, इसके लिए अनुकूल होती है हल्की ज़मीनें भारी ज़मीनों के मुकाबले अच्छी क्वालिटी की पैदावार देती हैं मिर्च के अच्छे विकास के लिए ज़मीन की pH 6-7 अनुकूल हà¥.... (Read More)
श्री मान मिर्च रेतली से भारी चिकनी हर तरह की मिट्टी में उगाई जा सकती है अच्छे विकास के लिए हल्की उपजाऊ और पानी के अच्छे निकास वाली ज़मीन जिसमे नमी सोखने की क्षमता हो, इसके लिए अनुकूल होती है हल्की ज़मीनें भारी ज़मीनों के मुकाबले अच्छी क्वालिटी की पैदावार देती हैं मिर्च के अच्छे विकास के लिए ज़मीन की pH 6-7 अनुकूल है निम्नलिखित किस्में उत्तर प्रदेश में लगाने के लिए उपयुक्त हैं: Arka Meghana: यह हाइब्रिड किस्म अधिक पैदावार वाली और पत्तों के धब्बे रोग की प्रतिरोधक है इसके फलों की लंबाई 10.6 सैं.मी. और चौड़ाई 1.2 सैं.मी. होती है इसके फल शरू में गहरे हरे और पकने के बाद लाल हो जाते हैं इसकी औसतन पैदावार 135 क्विंटल (हरी मिर्चें) और 20 क्विंटल (सूखी मिर्चें) प्रति एकड़ है Arka Sweta: यह हाइब्रिड किस्म अधिक पैदावार वाली और ताज़ा मंडी में बेचनेयोग्य है यह सिंचित स्थितियों में खरीफ और रबी दोनों में उगाई जा सकती है इसके फल की लंबाई 11-12 सैं.मी. चौड़ाई 1.2-1.5 सैं.मी. होती है इसके फल नर्म और दरमियाने कड़वे होते हैं फल शुरू में हल्के हरे और पकने के बाद लाल हो जाते हैं यह विषाणुओं को सहनयोग्य किस्म है इसकी औसतन पैदावार 130 क्विंटल (हरी मिर्चें) और 20 क्विंटल (सूखी मिर्चें) प्रति एकड़ है Kashi Early: इस किस्म के पौधे का कद लंबा (100-110 सैं.मी.) होता है इसका तना हल्के हरे रंग का बिना टहनियों वाला होता है इसके फल कड़वे, लंबे (8-9x1.0-1.2 सैं.मी.), आकर्षिक, शरू में गहरे हरे जो पकने के बाद चमकीले लाल हो जाते हैं इस किस्म के हरी मिर्च की पहली तुड़ाई पनीरी लगाने के 45 दिन बाद की जा सकती है इसकी औसतन पैदावार 100 क्विंटल (पकी हुई लाल) होती है Kashi Surkh: इस किस्म के पौधे छोटे कद के होते हैं, जिनका तना टहनियों वाला होता है इसके फल हल्के हरे, सीधे, लंबे 11-12 सैं.मी. होते हैं यह हरी और लाल दोनों तरह की मिर्चें उगाने योग्य किस्म है इसकी पहली तुड़ाई पनीरी लगाने के 55 दिनों के बाद की जा सकती है इसमें हरी मिर्च की औसतन पैदावार 100 क्विंटल प्रति एकड़ है Kashi Anmol: इस किस्म के पौधे दरमियाने कद के (60-70 सैं.मी.) होते हैं, जिनका तना टहनियों वाला होता है और यह आकर्षिक, हरे, कड़वे फल पैदा करता है इसकी पहली तुड़ाई पनीरी लगाने के 55 दिनों के बाद की जा सकती है इसकी औसतन पैदावार 80 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pant C-1: यह किस्म अन्य किस्मों से आसानी से अलग है क्योंकि इसके फल की फलियां सीधी होती हैं इसके फल अत्याधिक तीखे, आकार में छोटे, आधार चौड़ा और सिरा पतला होता है यह किस्म चितकबरा और पत्ता मरोड़ रोग की कुछ हद तक प्रतिरोधक है इस किस्म की हरी फलियों की औसतन पैदावार 110 क्विंटल प्रति एकड़ होती है सूखी फलियों की पैदावार 20 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Kashmir Chilly : यह किस्म लंबी और गुद्दे वाली गहरे लाल रंग की होती है यह सर्दियों में खेती के लिए उपयुक्त है Hot Portugal: इसके फल गहरे हरे रंग के होते हैं लेकिन पकने पर लाल रंग के हो जाते हैं इसके फल 11-15 सैं.मी. लंबे होते हैं और औसतन पैदावार 40-50 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Soorajmukhi: इस किस्म का पौधा छोटा, फल गहरे रंग के, पकने पर लाल रंग के और स्वाद में अत्याधिक कड़वे होते हैं एक गुच्छे में 8-12 फल होते हैं इसकी औसतन पैदावार 31-40 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Sweet Banana: फल हल्के पीले रंग के होते हैं जो पकने पर लाल रंग के हो जाते हैं इसके फल 18-20 सैं.मी. लंबे होते हैं और स्वाद में अत्याधिक कड़वे होते हैं इसकी औसतन पैदावार 40 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Hungarian Wax: फल पकने पर लाल रंग के हो जाते हैं, 10-16 सैं.मी. लंबे और स्वाद में थोड़े कड़वे होते हैं इसकी औसतन पैदावार 31-33 क्विंटल प्रति एकड़ होती है खेत को तैयार करने के लिए 2-3 बार जोताई करें और प्रत्येक जोताई के बाद डलियों को तोड़ें बिजाई से 15-20 दिन पहले रूड़ी की खाद 150-200 क्विंटल प्रति एकड़ डालकर मिट्टी में अच्छी तरह मिला दें टमाटर और मिर्च की खेती एक ही या नज़दीक वाले खेत में ना करें, क्योंकि दोनों की बीमारियां एक जैसी होती हैं और इस कारण एंथ्राक्नोस और बैक्टीरिया वाली बीमारीयों के बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है मिर्च की खेती पूरे वर्ष की जाती है खरीफ की फसल के लिए मई-जून और गर्मियों की फसल के लिए फरवरी - मार्च का समय मिर्च की रोपाई के लिए उपयुक्त होता है खरीफ के मौसम में 60-75 सैं.मी. x 45 सैं.मी. और सिंचित क्षेत्रों में 60 x 60 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें नर्सरी में बीजों को 3-5 सैं.मी. की गहराई में बोयें और फिर मिट्टी से ढक दें किस्मों के लिए 200 ग्राम बीज और हाइब्रिड के लिए 80-100 ग्राम बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें बारानी क्षेत्रों के लिए, नाइट्रोजन 50 किलो (110 किलो यूरिया), फासफोरस 16 किलो (सिंगल सुपर फासफेट 100 किलो) और पोटाश 20 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 35 किलो) प्रति एकड़ डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा, फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा पनीरी खेत में लगाने के समय डालें रोपाई के बाद बाकी बची नाइट्रोजन दो बराबर हिस्सों में 30वें और 50वें दिन डालें सिंचित क्षेत्रों के लिए, नाइट्रोजन 84 किलो (182 किलो यूरिया), फासफोरस 24 किलो (सिंगल सुपर फासफेट 150 किलो) और पोटाश 24 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 40 किलो) प्रति एकड़ डालें रोपाई से पहले 24 किलो नाइट्रोजन (यूरिया 52 किलो), फासफोरस की पूरी मात्रा और पोटाश की आधी मात्रा प्रति एकड़ में डालें बाकी बची नाइट्रोजन को पांच भागों में बांटें और पोटाश को तीन बराबर भागों में बांटें नाइट्रोजन 12 किलो (यूरिया 26 किलो) को बिजाई के बाद 45वें, 60वें, 75वें, 95वें और 115वें दिन डालें और पोटाश 4 किलो को बिजाई के बाद 45वें, 60वें, और 75वें दिन डालें 45 दिनों तक गोडाई करें, कही की मदद से मिट्टी चढ़ाएं और खेत को नदीन मुक्त रखें यदि नदीनों की रोकथाम ना की जाये तो यह 70-90 % पैदावार कम कर देते हैं रोपाई से पहले मुख्य खेत में पैंडीमैथालीन 1 लीटर प्रति एकड़ में डालें यदि नदीनों की संख्या ज्यादा हो तो उनके अंकुरण के बाद सेन्कोर 800 मि.ली की स्प्रे प्रति एकड़ में करें नदीनों की रोकथाम के साथ मिट्टी में नमी को बनाए रखने के लिए मलचिंग एक प्रभावी तरीका है मिट्टी में नमी के आधार पर सर्दियों में 6-7 दिनों के अंतराल पर और गर्मियों में 4-5 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें फूल निकलने की अवस्था सिंचाई के लिए गंभीर होती है इस अवस्था पर पानी की कमी से फल गिरते हैं जिससे फलों के उत्पादन में कमी होती है विभिन्न खोजों में यह पाया गया है, कि प्रत्येक पखवाड़े में आधा इंच सिंचाई से जड़ों में नमी ज्यादा होती है जिससे वे अधिक उपज देती हैं मिर्चों की तुड़ाई हरा रंग आने पर करें या फिर पकने के लिए पौधे पर ही रहने दें मिर्चों का पकने के बाद वाला रंग किस्म पर निर्भर करता है अधिक तुड़ाइयां लेने के लिए यूरिया 10 ग्राम प्रति लीटर और घुलनशील K @ 10 ग्राम प्रति लीटर पानी (1 प्रतिशत प्रत्येक का घोल) की स्प्रे 15 दिनों के फासले पर कटाई के समय करें पैकिंग के लिए मिर्चें पक्की और लाल रंग की होने पर तोड़ें सुखाने के लिए प्रयोग की जाने वाली मिर्चों की पूरी तरह पकने के बाद ही तुड़ाई करें।

Posted by deepraj singh
Punjab
12-04-2020 11:19 AM
deepraj ji kirpa karke daso ke isdi umar kini hai taki usde hisab nl jankari diti ja sake.dhanwad
Posted by jaspreet singh
Punjab
12-04-2020 11:19 AM
jaspreet ji kripa karke mitti daso kis tra di hai tajo tuhanu is bare poori jankari diti ja sake,dhanwad

Posted by Vijay pal
Uttar Pradesh
12-04-2020 11:17 AM
Vijay ji aap btaye ke aapne ganne men koi khaad ya spray ke istemal karne ke bare men jankari lena chahte hai ya isme koi fasl lgane ke bare men jankari lena chahte hai.dhanywad

Posted by Rahul
Chattisgarh
12-04-2020 11:06 AM
Rahul ji kripya aap iske patton ke neeche machar ka hamla check karen yadi maujood hai to aap imidacloprid@1.5ml ko prati litre pani ke hisab se spray karen,dhanywad

Posted by jitendra meena
Madhya Pradesh
12-04-2020 11:01 AM
जितेंदर मीना जी चने का रेट 4875 क्विंटल है। धन्यवाद
Posted by Vikrant Dedha Gurjar
Uttar Pradesh
12-04-2020 11:00 AM
vikrant ji aap ise khaad kya kya daalte hai btaye taki aapko iskebare men poori jankari di ja sake.dhanywad

Posted by रावेन्द सिंह
Madhya Pradesh
12-04-2020 10:56 AM
रावेन्द सिंह जी कद्दू के बाद अगर आप दुबारा कद्दू की फसल लगाते है तो इस से पैदावार कम आती है|

Posted by jitendra meena
Madhya Pradesh
12-04-2020 10:46 AM
उसे आप Dettol liquid 100ml रोजाना 1—1 दिन के फर्क से तीन बार दें बाकि आप उसे Mammidium पाउडर 50 ग्राम रोजाना 3 दिन तक दें इससे फर्क पड़ जाएगा

Posted by khushi ram
Haryana
12-04-2020 10:30 AM
khushi ram ji kripya btaye ke aap harda kise keh rahe hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake,dhanywad

Posted by khushi ram
Haryana
12-04-2020 10:29 AM
khushi ji kripya aap btaye ke aap harda kise keh rahe hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake,dhanywad
Posted by Krishna Yadav
Chattisgarh
12-04-2020 10:28 AM
Shri maan g mirch mein Shamir@400ml per acre spray kr skte ho.....
Posted by deepak
Uttar Pradesh
12-04-2020 10:20 AM
श्री मान मेंथा की बिजाई के लिए सुविधाजनक आकार के बैड तैयार करें खेत की तैयारी के समय खेत की अच्छी तरह जोताई करें जैविक खाद जैसे रूड़ी की खाद 100-120 क्विंटल प्रति एकड़ रूड़ी की खाद डालें रूड़ी की खाद के बाद हरी खाद डालें इसकी बिजाई के लिए दिसंबर-जनवरी का समय अनुकूल होता है पौधे के भागों की बिजाई 40 सैं.मी. के फासले प.... (Read More)
श्री मान मेंथा की बिजाई के लिए सुविधाजनक आकार के बैड तैयार करें खेत की तैयारी के समय खेत की अच्छी तरह जोताई करें जैविक खाद जैसे रूड़ी की खाद 100-120 क्विंटल प्रति एकड़ रूड़ी की खाद डालें रूड़ी की खाद के बाद हरी खाद डालें इसकी बिजाई के लिए दिसंबर-जनवरी का समय अनुकूल होता है पौधे के भागों की बिजाई 40 सैं.मी. के फासले पर और पंक्तियों के बीच का फासला 60 सैं.मी होना चाहिए बीज को 2-3 सैं.मी. की गहराई में बोयें पौधे के जड़ वाले भाग को मुख्य खेत में बोया जाता है खेत की तैयारी के समय रूड़ी की खाद 80-120 क्विंटल प्रति एकड़ में डालें और अच्छी तरह मिलायें नाइट्रोजन 58 किलो (यूरिया 130 किलो), फासफोरस 32-40 किलो (सिंगल सुपर फासफेट 80-100 किलो), पोटाशियम 20 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 33 किलो) प्रति एकड़ में डालें गर्मियों में मॉनसून से पहले जलवायु और मिट्टी के आधार पर 6-9 सिंचाइयां जरूर की जानी चाहिए मॉनसून के बाद 3 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है पहली सिंचाई सितंबर महीने में, दूसरी अक्तूबर में और तीसरी नवंबर महीने में की जानी चाहिए सर्दियों में ज्यादा सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन यदि सर्दियों में बारिश ना पड़े तो एक सिंचाई जरूर देनी चाहिए पौधे 100-120 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं जब निचले पत्ते पीले रंग के होने शुरू हो जायें, तब कटाई करें कटाई दराती से और बूटियों को मिट्टी की सतह के 2-3 सैं.मी. ऊपर से निकालें अगली कटाई पहली कटाई के बाद 80 दिनों के अंतराल पर करें ताजी पत्तियों को उत्पाद बनाने के लिए प्रयोग किया जाता है, धन्यवाद
Posted by ਅਰਸ ਦੀਪ ਸਿੰਘ
Punjab
12-04-2020 10:06 AM
ਅਰਸ਼ਦੀਪ ਜੀ ਇਸਦੇ ਲਈ ਕਲਮ ਤਿਆਰ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸਦੇ ਲਈ 4-6 ਇੰਚ ਕਲਮ ਜਿਹੜੀ ਟਾਹਣੀ ਇਕ ਸਾਲ ਪੁਰਾਣੀ ਹੋਵੇ ਓਹਦੇ ਤੋਂ ਕੱਟੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ| ਪਾਣੀ ਦੇ ਨੁਕਸਾਨ ਨੂੰ ਘੱਟ ਕਰਨ ਲਈ ਇਕ ਪੱਤਾ ਛੱਡ ਕੇ ਸਾਰੇ ਹਟਾ ਦਿੱਤੇ ਗਏ ਹਨ|ਪੌਧੇ ਨੂੰ ਤੁਸੀ ਮਿੱਟੀ ਵਿਚ ਲਗਾ ਦਿਓ |
Posted by ਸਰਬਜੀਤ ਸਿੰਘ
Punjab
12-04-2020 10:05 AM
ਸਰਬਜੀਤ ਜੀ ਇਸਦਾ ਅਸਰ ਹੋਣ ਤੇ ਸਮਾਂ ਲੱਗਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਤੁਸੀ ਇਸਦੀ ਗੋਭ ਵਿਚ ਸੁੰਡੀ ਚੈੱਕ ਕਰੋ|

Posted by khushi ram
Haryana
12-04-2020 10:01 AM
khushi ram ji kripya aap btaye ke aap harda kise keh rahe hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake,dhanywad

Posted by Amarjit singh Boyal
Punjab
12-04-2020 10:00 AM
Amarjit ji eh last stage hai tuc isdi dubara bijai nahi kar sakde.dhanwad

Posted by Nissan singh
Punjab
12-04-2020 09:57 AM
tuci ek gur di pesii nu ratt de sme thode jehe pani vich dubo ke rakh deo ate swer de sme uss pila skde ho ehh tuci 5-6 din de skde ho.

Posted by chhedi lal gulab bai rameswer prasad
Madhya Pradesh
12-04-2020 09:55 AM
chedi ji kripya aap swal vistar se pooche taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad
Posted by Gulab Chand jain
Rajasthan
12-04-2020 09:55 AM
बढ़िया वर्मी कंपोस्ट निम्नलिखित तरीके अनुसार बनायी जा सकती है इसलिए ऐसा स्थान लें जहां धूप ना आये और हवादार हो इस स्थान पर ईंटों या पत्थर के टुकड़े और मिट्टी की 2—3 इंच मोटी परत बिछायें मिट्टी पर थोड़ा सा पानी छिड़ककर गीला करें मिट्टी में 25 प्रतिशत से अधिक नमी नहीं होनी चाहिए इसके ऊपर गंडोए (40 गंडोए प्रति वर्.... (Read More)
बढ़िया वर्मी कंपोस्ट निम्नलिखित तरीके अनुसार बनायी जा सकती है इसलिए ऐसा स्थान लें जहां धूप ना आये और हवादार हो इस स्थान पर ईंटों या पत्थर के टुकड़े और मिट्टी की 2—3 इंच मोटी परत बिछायें मिट्टी पर थोड़ा सा पानी छिड़ककर गीला करें मिट्टी में 25 प्रतिशत से अधिक नमी नहीं होनी चाहिए इसके ऊपर गंडोए (40 गंडोए प्रति वर्ग फीट जगह) में मिलायें इसके बाद वेस्ट जैसे कि बची कुची सब्जियां, फल, कच्चा गोबर, गोबर की सलरी की 8—10 इंच मोटी परत डालें दूसरी परत के बाद इसके ऊपर सूखे पत्ते या पराली से ढक दें हर परत के बाद पानी छिड़कें ताकि नमी बनी रहे वर्मीकंपोस्ट के बैड को 3—4 इंच मोटी गोबर की परत से ढक दें और इसके ऊपर बोरा या तिरपाल रखें ताकि नमी बनी रहे रसोई, फसलों या डेयरी के बचे कुचे की परत को रैक से पलटते रहें और आवश्यकतानुसार थोड़ा थोड़ा करके और वेस्ट भी डाल सकते हैं इसके ऊपर कच्चा गोबर भी डाल सकते हैं पर ध्यान रखें कि यह परत पहले जितनी ही मोटी रहें वर्मी कंपोस्ट की खाद मौसम के हिसाब से 45—60 दिनों में तैयार हो जाती है सबसे ऊपर वाली परत को हटाकर गंडोए छलनी से अलग कर लें और निचली छोड़ दें इसके ऊपर दोबारा रसोई या एग्रो वेस्ट की 6 इंच मोटी परत बिछाकर दोबारा खाद तैयार की जा सकती हैं 45 दिनों के बाद पानी छिड़कना बंद करने से भी गंडोए निचली परत में चले जाते हैं और छलनी से अलग करने में समय कम लगता है तैयार वर्मी कंपोस्ट काले भूरे रंग की गंध रहित और चाय पत्ती जैसी होती है इसे छांव में हवा में सुखकर आवश्यकतानुसार थैले या बोरियों में डालकर रखा जा सकता है एक टन वर्मी कंपोस्ट में 1.0—1.5 किलोग्राम नाइट्रोजन, 5—10 किलोग्राम पोटाश और 3.5—5.0 किलो फासफोरस होता है इसके अलावा इसमें कई तरह के एन्ज़ाइम और सूक्ष्म तत्व कॉपर, आयरन, जिंक, सल्फर, कैलशियम और मैगनीशियम आदि होते हैं
Posted by Gulab Chand jain
Rajasthan
12-04-2020 09:54 AM
बढ़िया वर्मी कंपोस्ट निम्नलिखित तरीके अनुसार बनायी जा सकती है इसलिए ऐसा स्थान लें जहां धूप ना आये और हवादार हो इस स्थान पर ईंटों या पत्थर के टुकड़े और मिट्टी की 2—3 इंच मोटी परत बिछायें मिट्टी पर थोड़ा सा पानी छिड़ककर गीला करें मिट्टी में 25 प्रतिशत से अधिक नमी नहीं होनी चाहिए इसके ऊपर गंडोए (40 गंडोए प्रति वर्.... (Read More)
बढ़िया वर्मी कंपोस्ट निम्नलिखित तरीके अनुसार बनायी जा सकती है इसलिए ऐसा स्थान लें जहां धूप ना आये और हवादार हो इस स्थान पर ईंटों या पत्थर के टुकड़े और मिट्टी की 2—3 इंच मोटी परत बिछायें मिट्टी पर थोड़ा सा पानी छिड़ककर गीला करें मिट्टी में 25 प्रतिशत से अधिक नमी नहीं होनी चाहिए इसके ऊपर गंडोए (40 गंडोए प्रति वर्ग फीट जगह) में मिलायें इसके बाद वेस्ट जैसे कि बची कुची सब्जियां, फल, कच्चा गोबर, गोबर की सलरी की 8—10 इंच मोटी परत डालें दूसरी परत के बाद इसके ऊपर सूखे पत्ते या पराली से ढक दें हर परत के बाद पानी छिड़कें ताकि नमी बनी रहे वर्मीकंपोस्ट के बैड को 3—4 इंच मोटी गोबर की परत से ढक दें और इसके ऊपर बोरा या तिरपाल रखें ताकि नमी बनी रहे रसोई, फसलों या डेयरी के बचे कुचे की परत को रैक से पलटते रहें और आवश्यकतानुसार थोड़ा थोड़ा करके और वेस्ट भी डाल सकते हैं इसके ऊपर कच्चा गोबर भी डाल सकते हैं पर ध्यान रखें कि यह परत पहले जितनी ही मोटी रहें वर्मी कंपोस्ट की खाद मौसम के हिसाब से 45—60 दिनों में तैयार हो जाती है सबसे ऊपर वाली परत को हटाकर गंडोए छलनी से अलग कर लें और निचली छोड़ दें इसके ऊपर दोबारा रसोई या एग्रो वेस्ट की 6 इंच मोटी परत बिछाकर दोबारा खाद तैयार की जा सकती हैं 45 दिनों के बाद पानी छिड़कना बंद करने से भी गंडोए निचली परत में चले जाते हैं और छलनी से अलग करने में समय कम लगता है तैयार वर्मी कंपोस्ट काले भूरे रंग की गंध रहित और चाय पत्ती जैसी होती है इसे छांव में हवा में सुखकर आवश्यकतानुसार थैले या बोरियों में डालकर रखा जा सकता है एक टन वर्मी कंपोस्ट में 1.0—1.5 किलोग्राम नाइट्रोजन, 5—10 किलोग्राम पोटाश और 3.5—5.0 किलो फासफोरस होता है इसके अलावा इसमें कई तरह के एन्ज़ाइम और सूक्ष्म तत्व कॉपर, आयरन, जिंक, सल्फर, कैलशियम और मैगनीशियम आदि होते हैं
Posted by Pankaj Maan
Haryana
12-04-2020 09:44 AM
Pankaj ji usko 20-25kg rojana silage khila skte hai baki uske khane aur hajam krne per nirbhar krta hai baki aap 3kg dudh ke mgar 1kg ke hisab se feed de skte hai.
Posted by KULDEEP SINGH
Punjab
12-04-2020 09:44 AM
tusi menu 94632 26244 number te call kar leni ji.
Posted by संजय सिंह पटेल
Uttar Pradesh
12-04-2020 09:09 AM
संजय सिंह जी आप इसके ऊपर NPK 191919 @1 किलो को 150 लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें|

Posted by Arjunprasad maurya
Uttar Pradesh
12-04-2020 08:56 AM
श्रीमा जी प्याज में झुलस रोग की रोकथाम के लिए आप M-45@500 gm प्रति एकड़ के स्प्रे कर सकते हैं

Posted by tarsem singh
Punjab
12-04-2020 08:53 AM
tuci uss nu Nilzan liquid 1ml/3kg sarir de bhar de hisab nal deo ate Groviplex liquid 7-10ml rojana deo..
Posted by prakash Aanjna
Rajasthan
12-04-2020 08:53 AM
श्री मान इसमें आप NPK 13:0:45@1kg प्रती एकड़ सप्रे कर सकते हो।
Posted by Lakhveer singh
Punjab
12-04-2020 08:53 AM
Lakhveer singh ji tusi 98728 62524 Dr mohidaro nal gal karo ji university vich.

Posted by जैनिशा
Rajasthan
12-04-2020 08:51 AM
कृप्या आप अपना सवाल विस्तार से पूछें कि निमोनिया किसे है और क्या क्या समस्या आ रही है ताकि आपको उसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके।

Posted by जैनिशा
Rajasthan
12-04-2020 08:50 AM
कृप्या आप अपना सवाल विस्तार से पूछें कि निमोनिया किसे है और क्या क्या समस्या आ रही है ताकि आपको उसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके।

Posted by Arjunprasad maurya
Uttar Pradesh
12-04-2020 08:41 AM
श्रीमान जी कीड़े की रोकथाम के लिए आप coragen@40 ml प्रति एकड़ स्प्रे कर सकते हैं
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