
Posted by yogesh kumar
Uttar Pradesh
19-04-2020 09:52 PM
Yogesh kumar ji Ganne ka MSP 275/Q hai, Thankyou.

Posted by Kamal Kalia
Punjab
19-04-2020 09:40 PM
kamal ji silage de layi makki j1006 55-60 dina tak ktayi de layi tyar hundi hai.dhanwad
Posted by Sukhvinder singh
Punjab
19-04-2020 09:38 PM
sukhvinder ji kirpa krke daso ke tuc orhanic farming hale shuru karni hai ja kar rahe ho ta jo tuhanu osde hisab nal jankari diti ja sake,dhanwad

Posted by Kamal Kalia
Punjab
19-04-2020 09:38 PM
kamal ji ik acre vich 10 pashuan de layi 20-25 kilo chara 3-3.5mahine layi ban janda hai.dhanwad
Posted by ravi singh
Punjab
19-04-2020 09:26 PM
Ravi ji, kripya ap bataye apki fasal konsi hai or usme konse keet ka hamla hua hai taki apko uske hisaab se iske bare mein jankari di ja sake, dhanywad

Posted by महेश चौरसिया
Uttar Pradesh
19-04-2020 09:20 PM
महेश जी, यह तत्वों की कमी के कारण हो जाता है आप अपने पौधे में NPK 130045 @ 10 ग्राम प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे कर सकते हैं, धन्यवाद

Posted by जगत नारायण
Uttar Pradesh
19-04-2020 09:17 PM
यह कई तरह की मिट्टी में उगाई जाती है इसकी पैदावार के लिए नमकीन, क्षारीय और पानी खड़ा होने वाली मिट्टी से बचाव करें यह बढ़िया निकास वाली मिट्टी जिसमे बढ़िया जैविक तत्व मौजूद हों, में बढ़िया परिणाम देती है इसके बढ़िया विकास के लिए मिट्टी का pH 5.5-7 होना चाहिए Drudriha Tulsi: यह मुख्य रूप से बंगाल, नेपाल, चटगांव और महाराष्ट्.... (Read More)
यह कई तरह की मिट्टी में उगाई जाती है इसकी पैदावार के लिए नमकीन, क्षारीय और पानी खड़ा होने वाली मिट्टी से बचाव करें यह बढ़िया निकास वाली मिट्टी जिसमे बढ़िया जैविक तत्व मौजूद हों, में बढ़िया परिणाम देती है इसके बढ़िया विकास के लिए मिट्टी का pH 5.5-7 होना चाहिए Drudriha Tulsi: यह मुख्य रूप से बंगाल, नेपाल, चटगांव और महाराष्ट्र क्षेत्रों में पाई जाती है यह गले को सूखेपन से राहत देता है यह हाथों, पैरों और गठिया की सूजन से आराम देता है Ram/Kali Tulsi (Ocimum canum): यह चीन, ब्राज़ील, पूर्व नेपाल और साथ ही बंगाल, बिहार, चटगांव और भारत के दक्षिणी क्षेत्रों में पाई जाती है इसका तना जामुनी और पत्ते हरे रंग के और बहुत ज्यादा सुगंधित होते है इसमें उचित मात्रा में औषधीय गुण जैसे ऐज़ाडिरैकटिन, ऐंटीफंगल , ऐंटीबैक्टीरियल, और पाचन तंत्र को ठीक रखती है यह गर्म क्षेत्रों में बढ़िया उगता है Babi Tulsi: यह पंजाब से त्रिवेंद्रम, बंगाल और बिहार में भी पाई जाती है इसका पौधा 1-2 फीट लम्बा होता है पत्ते 1-2 इंच लम्बे, अंडाकार और नुकीले होते है इसके पत्तों का स्वाद लौंग की तरह और सब्जियों में स्वाद के लिए प्रयोग किया जाता है तुलसी की खेती के लिए, अच्छी तरह से शुष्क मिट्टी की मांग की जाती है मिट्टी के भुरभुरा होने तक हैरो के साथ खेत की जोताई करें, फिर रूड़ी की खाद मिट्टी में मिलाएं तुलसी की रोपाई सीड बैड पर करें फरवरी के तीसरे महीने में नर्सरी बैड तैयार करें पौधे के विकास के अनुसार, 4.5 x 1.0 x 0.2 मीटर के सीड बैड तैयार करें बीजों को 60x60 सैं.मी. के फैसले पर बोयें बीजों को 2 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बिजाई के 6-7 हफ्ते बाद, फसल की रोपाई खेत में करें तुलसी की खेती के लिए 120 ग्राम बीजों का प्रयोग प्रति एकड़ में करें फसल को मिट्टी से पैदा होने वाली बीमारीयों से रोकथाम के लिए, बिजाई से पहले मैनकोजेब 5 ग्राम प्रति किलोग्राम से बीजों का उपचार करें फसल की बढ़िया पैदावार के लिए बिजाई से पहले 15 टन रूड़ी की खाद मिट्टी में डालें तुलसी के बीजों को तैयार बैडों के साथ उचित अंतराल पर बोयें मानसून आने के 8 हफ्ते पहले बीजों को बैड पर बोयें बीजों को 2 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बिजाई के बाद, रूड़ी की खाद और मिट्टी की पतली परत बीजों पर बना दें इसकी सिंचाई फुवारा विधि द्वारा की जाती है रोपाई के 15-20 दिनों के बाद, नए पौधों को तंदरुस्त बनाने के लिए 2% यूरिया का घोल डालें 6 हफ्ते पुराने और 4-5 पत्तों के अंकुरण होने पर अप्रैल के महीने में नए पौधे तैयार होते है तैयार बैडों को रोपाई 24 घंटे पहले पानी लगाएं ताकि पौधों को आसानी से उखाड़ा जा सकें और रोपाई के समय जड़ें मुलायम और सूजी हुई हो खेत की तैयारी के समय, रूड़ी की खाद को मिट्टी में मिलाएं खाद के तौर पर नाइट्रोजन 48 किलो(यूरिया 104 किलो), फासफोरस 24 किलो(सिंगल सुपर फासफेट 150 किलो) और पोटाश 24 किलो(मिउरेट 40 किलो) प्रति एकड़ में डालें नए पौधे लगाने के समय नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफेट पेंटोऑक्साइड की पूरी मात्रा शुरुआती समय में डालें Mn 50 पी पी एम कंसंट्रेशन और Co@100 पी पी एम कंसंट्रेशन सूक्ष्म-तत्व डालें बाकी की बची हुई नाइट्रोजन को 2 हिस्सों में पहली और दूसरी कटाई के बाद डालें खेत को नदीनों से मुक्त करने के लिए कसी की मदद से गोड़ाई करें नदीनों की रोकथाम कम न होने पर यह फसल को नुकसान पहुंचाते है रोपण के एक महीने बाद पहली गोड़ाई और पहली गोड़ाई के चार हफ्ते बाद दूसरी गोड़ाई करें रोपण के दो महीने बाद कसी से अनुकूल गोड़ाई करें गर्मियों में, एक महीने में 3 सिंचाइयां करें और बरसात के मौसम में, सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती एक साल में 12-15 सिंचाइयां करनी चाहिए पहली सिंचाई रोपण के बाद करें और दूसरी सिंचाई नए पौधों के स्थिर होने पर करें 2 सिंचाइयां करनी आवश्यक है और बाकी की सिंचाई मौसम के आधार पर करें

Posted by palwinder singh
Punjab
19-04-2020 09:13 PM
Palwinder ji, tusi bangan vich NPK 130045 @ 10 gram prati litre pani de hisaab nal spray kar sakde ho, dhanwad

Posted by palwinder singh
Punjab
19-04-2020 09:11 PM
Palwinder ji, tusi muli diya kisma jive ke Japanese white, Pusa chetki, Punjab Himani, Punjab Pasand di bijai kar sakde ho, dhanwad

Posted by Sanjay Kumar
Bihar
19-04-2020 09:09 PM
Sanjay ji, agar ap pyaj ka size bda karna chahte hain to ap isme NPK 130045 @ 10 gram prati litre pani ke hisaab se spray kar sakte hain, isse pyaj ka size accha ho sakta hai, dhanywad

Posted by Sanjay Kumar
Bihar
19-04-2020 09:05 PM
Sanajy ji, ap pyaj. bda karne ke liye isme NPK 130045 @ 10 gram prati litre pani ke hisaab se spray kar sakte hain, dhanywad
Posted by Vikram Sharma
Punjab
19-04-2020 09:03 PM
Vikram sharma ji desi kanak me aap bansi kanak use kar sakte hai, adhik janklari or seed lene ke lia aap Sarwan Singh Maan 9340126148, 9478000850 Anmaanat Biotech Amritsar se samparak kar sakte hai, Thankyou.
Posted by sunil porte
Chattisgarh
19-04-2020 08:49 PM
सुनील जी आप इसकी किस्मे जैसे Pusa Chikni,Pusa Supriya,Pusa Sneha की बिजाई के सकते है|

Posted by Manjeet Singh
Haryana
19-04-2020 08:44 PM
Manjeet ji eh leaf miner de attack vala purana patta hai kirpa karke nave patea di photo bhejo ta jo tuhanu is bare poori jankari diti ja sake,flower dropping de layi tuc NPK 130045@10 gram prati litre pani de hisab nal spray karo,dhanwad

Posted by Sundarmani Patel
Chattisgarh
19-04-2020 08:41 PM
इस फल को सभी फलों का राजा कहा जाता है और इसकी खेती भारत में पुराने समय से की जाती है आम की खेती कईं तरह की मिट्टी में की जा सकती है इसकी खेती के लिए घनी ज़मीन, जो 4 फुट की गहराई तक सख्त ना हो, की जरूरत होती है मिट्टी की पी एच 8.5 प्रतिशत से कम होनी चाहिए प्रसिद्ध किस्में:-Dusheri,Langra,Chausa,Ambika,Arunika,Mallika, Amrapali, Ratna, Arka Arjun, Arka Puneet, Arka Anmol, Sindhu, Manjeera.ज़.... (Read More)
इस फल को सभी फलों का राजा कहा जाता है और इसकी खेती भारत में पुराने समय से की जाती है आम की खेती कईं तरह की मिट्टी में की जा सकती है इसकी खेती के लिए घनी ज़मीन, जो 4 फुट की गहराई तक सख्त ना हो, की जरूरत होती है मिट्टी की पी एच 8.5 प्रतिशत से कम होनी चाहिए प्रसिद्ध किस्में:-Dusheri,Langra,Chausa,Ambika,Arunika,Mallika, Amrapali, Ratna, Arka Arjun, Arka Puneet, Arka Anmol, Sindhu, Manjeera.ज़मीन की अच्छी तरह जोताई करें और फिर समतल करें ज़मीन को इस तरह तैयार करें ताकि खेत में पानी ना खड़ा हो ज़मीन को समतल करने के बाद एक बार फिर गहरी जोताई करके ज़मीन को अलग अलग भागों में बांट दें फासला जगह के हिसाब से अलग-अलग होना चाहिए बिजाई का समय पौधे अगस्त से सितंबर और फरवरी मार्च के महीने में बोये जाते हैं पौधे हमेशा शाम को ठंडे समय में बोयें फसल को तेज हवा से बचाएं फासला कलमी किस्मों के लिए 10 मीटर x 10 मीटर फासले का प्रयोग करें और मध्यम घनता की रोपाई के लिए 5 x 5 मीटर फासले का प्रयोग करें रोपाई के लिए वर्गाकार प्रणाली का प्रयोग करें बीज की गहराई बिजाई से एक महीना पहले 1x1x1 मीटर के आकार के गड्ढे 10x10 मीटर के फासले पर खोदें गड्ढों को सूर्य की रोशनी में खुला छोड़ दें फिर इन्हें मिट्टी में 30-40 किलो रूड़ी की खाद और 1 किलो सिंगल सुपर फासफेट मिलाकर भर दें बिजाई का ढंग बिजाई वर्गाकार और 6 भुजाओं वाले तरीके से की जा सकती है 6 भुजाओं वाले तरीके से बिजाई करने से 15 प्रतिशत वृक्ष ज्यादा लगाए जा सकते हैं पौधे लगाने के बाद फूले हुए फलों को 4-5 वर्ष तक हटाते रहें, ताकि पौधे के भाग अच्छा विकास कर सकें फलों के बनने तक यह क्रिया जारी रखें इस क्रिया के समय अंतर फसलों को अधिक आमदन और नदीनों की रोकथाम के लिए अपनाया जा सकता है प्याज, टमाटर, फलियां, मूली , बंद गोभी, फूल गोभी और दालों में मूंग, मसूर, छोले आदि को अंतर फसलों के तौर पर प्रयोग किया जा सकता है आड़ू, आलू बुखारा और पपीता भी मिश्रित खेती के लिए अपनाये जा सकते हैं बीज की मात्रा 10 मीटरx 10 मीटर के फासले पर प्रति एकड़ में 40 पौधे लगाए जाते हैं जबकि मध्यम घनता की रोपाई में 160 पौधे प्रति एकड़ में लगाए जाते हैं फासफोरस को वर्ष में दो बार डालें दूसरे शब्दों में मॉनसून के शुरू होने पर जून जुलाई के महीने में डालें और उसके बाद सितंबर अक्तूबर महीने में डालें नाइट्रोजन और पोटाश को जून - जुलाई, सितंबर - अक्तूबर, जनवरी - फरवरी और मार्च - अप्रैल में बराबर भागों में बांटकर डालें कईं बार मौसम के बदलने पर फल गिरने लगते हैं यदि फलों को गिरना देखा जाए तो 13:00:45 10 ग्राम को प्रति लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें मलचिंग का प्रयोग तापमान के प्रभाव को कम करता है अच्छे फूल और उपज के लिए 00:52:34 150 ग्राम को 15 लीटर पानी में मिलाकर फूल निकलने के शुरू में 8 दिनों के अंतराल पर दो बार स्प्रे करें यह फूल के गिरने को रोकेगा सिंचाई की मात्रा और फासला मिट्टी, जलवायु और सिंचाई के स्त्रोत पर निर्भर करते हैं नए पौधों को हल्की और बार-बार सिंचाई करें हल्की सिंचाई हमेशा दूसरी सिंचाई से अच्छी सिद्ध होती है गर्मियों में 5-6 दिनों के फासले पर सिंचाई करें और सर्दियों में धीरे-धीरे फासला बढ़ा कर 25-30 दिनों के फासले पर सिंचाई करें वर्षा वाले मौसम में सिंचाई वर्षा मुताबिक करें फल बनने के समय, पौधे के विकास के लिए 10-12 दिनों के फासले पर सिंचाई की जरूरत होती है फरवरी के महीने में खादें डालने के बाद हल्की सिंचाई करें नयी फसल के आस-पास गोडाई करें और जड़ों में मिट्टी लगाएं नदीनों की वृद्धि को रोकने के लिए काले रंग की प्लास्टिक की मलच का प्रयोग किया जाता है प्रौढ़ फसल के लिए 1 मीटर x 1 मीटर आकार की काली पॉलीथीन मलच की आवश्यकता होती है जबकि 8 वर्ष या उससे ज्यादा वर्षों के लिए 2.5 मीटर x2.5 मीटर आकार के मलच की आवश्यकता होती है फल का रंग बदलना फल पकने की निशानी है फल का गुच्छा पकने के लिए आमतौर पर 15-16 सप्ताह का समय लेता है सीढ़ी या बांस (जिस पर तीखा चाकू लगा हो) की मदद से पके हुए फल तोड़े और पके फलों को इक्ट्ठा करने के लिए एक जाल भी लगाएं पके फलों को आकार और रंग के आधार पर छांटे और बक्सों में पैक करें तुड़ाई के बाद पॉलीनैट पर फलों के ऊपरी भाग को नीचे की तरफ करके रखें

Posted by Sundarmani Patel
Chattisgarh
19-04-2020 08:40 PM
इस फल को सभी फलों का राजा कहा जाता है और इसकी खेती भारत में पुराने समय से की जाती है आम की खेती कईं तरह की मिट्टी में की जा सकती है इसकी खेती के लिए घनी ज़मीन, जो 4 फुट की गहराई तक सख्त ना हो, की जरूरत होती है मिट्टी की पी एच 8.5 प्रतिशत से कम होनी चाहिए प्रसिद्ध किस्में:-Dusheri,Langra,Chausa,Ambika,Arunika,Mallika, Amrapali, Ratna, Arka Arjun, Arka Puneet, Arka Anmol, Sindhu, Manjeera.ज़.... (Read More)
इस फल को सभी फलों का राजा कहा जाता है और इसकी खेती भारत में पुराने समय से की जाती है आम की खेती कईं तरह की मिट्टी में की जा सकती है इसकी खेती के लिए घनी ज़मीन, जो 4 फुट की गहराई तक सख्त ना हो, की जरूरत होती है मिट्टी की पी एच 8.5 प्रतिशत से कम होनी चाहिए प्रसिद्ध किस्में:-Dusheri,Langra,Chausa,Ambika,Arunika,Mallika, Amrapali, Ratna, Arka Arjun, Arka Puneet, Arka Anmol, Sindhu, Manjeera.ज़मीन की अच्छी तरह जोताई करें और फिर समतल करें ज़मीन को इस तरह तैयार करें ताकि खेत में पानी ना खड़ा हो ज़मीन को समतल करने के बाद एक बार फिर गहरी जोताई करके ज़मीन को अलग अलग भागों में बांट दें फासला जगह के हिसाब से अलग-अलग होना चाहिए बिजाई का समय पौधे अगस्त से सितंबर और फरवरी मार्च के महीने में बोये जाते हैं पौधे हमेशा शाम को ठंडे समय में बोयें फसल को तेज हवा से बचाएं फासला कलमी किस्मों के लिए 10 मीटर x 10 मीटर फासले का प्रयोग करें और मध्यम घनता की रोपाई के लिए 5 x 5 मीटर फासले का प्रयोग करें रोपाई के लिए वर्गाकार प्रणाली का प्रयोग करें बीज की गहराई बिजाई से एक महीना पहले 1x1x1 मीटर के आकार के गड्ढे 10x10 मीटर के फासले पर खोदें गड्ढों को सूर्य की रोशनी में खुला छोड़ दें फिर इन्हें मिट्टी में 30-40 किलो रूड़ी की खाद और 1 किलो सिंगल सुपर फासफेट मिलाकर भर दें बिजाई का ढंग बिजाई वर्गाकार और 6 भुजाओं वाले तरीके से की जा सकती है 6 भुजाओं वाले तरीके से बिजाई करने से 15 प्रतिशत वृक्ष ज्यादा लगाए जा सकते हैं पौधे लगाने के बाद फूले हुए फलों को 4-5 वर्ष तक हटाते रहें, ताकि पौधे के भाग अच्छा विकास कर सकें फलों के बनने तक यह क्रिया जारी रखें इस क्रिया के समय अंतर फसलों को अधिक आमदन और नदीनों की रोकथाम के लिए अपनाया जा सकता है प्याज, टमाटर, फलियां, मूली , बंद गोभी, फूल गोभी और दालों में मूंग, मसूर, छोले आदि को अंतर फसलों के तौर पर प्रयोग किया जा सकता है आड़ू, आलू बुखारा और पपीता भी मिश्रित खेती के लिए अपनाये जा सकते हैं बीज की मात्रा 10 मीटरx 10 मीटर के फासले पर प्रति एकड़ में 40 पौधे लगाए जाते हैं जबकि मध्यम घनता की रोपाई में 160 पौधे प्रति एकड़ में लगाए जाते हैं फासफोरस को वर्ष में दो बार डालें दूसरे शब्दों में मॉनसून के शुरू होने पर जून जुलाई के महीने में डालें और उसके बाद सितंबर अक्तूबर महीने में डालें नाइट्रोजन और पोटाश को जून - जुलाई, सितंबर - अक्तूबर, जनवरी - फरवरी और मार्च - अप्रैल में बराबर भागों में बांटकर डालें कईं बार मौसम के बदलने पर फल गिरने लगते हैं यदि फलों को गिरना देखा जाए तो 13:00:45 10 ग्राम को प्रति लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें मलचिंग का प्रयोग तापमान के प्रभाव को कम करता है अच्छे फूल और उपज के लिए 00:52:34 150 ग्राम को 15 लीटर पानी में मिलाकर फूल निकलने के शुरू में 8 दिनों के अंतराल पर दो बार स्प्रे करें यह फूल के गिरने को रोकेगा सिंचाई की मात्रा और फासला मिट्टी, जलवायु और सिंचाई के स्त्रोत पर निर्भर करते हैं नए पौधों को हल्की और बार-बार सिंचाई करें हल्की सिंचाई हमेशा दूसरी सिंचाई से अच्छी सिद्ध होती है गर्मियों में 5-6 दिनों के फासले पर सिंचाई करें और सर्दियों में धीरे-धीरे फासला बढ़ा कर 25-30 दिनों के फासले पर सिंचाई करें वर्षा वाले मौसम में सिंचाई वर्षा मुताबिक करें फल बनने के समय, पौधे के विकास के लिए 10-12 दिनों के फासले पर सिंचाई की जरूरत होती है फरवरी के महीने में खादें डालने के बाद हल्की सिंचाई करें नयी फसल के आस-पास गोडाई करें और जड़ों में मिट्टी लगाएं नदीनों की वृद्धि को रोकने के लिए काले रंग की प्लास्टिक की मलच का प्रयोग किया जाता है प्रौढ़ फसल के लिए 1 मीटर x 1 मीटर आकार की काली पॉलीथीन मलच की आवश्यकता होती है जबकि 8 वर्ष या उससे ज्यादा वर्षों के लिए 2.5 मीटर x2.5 मीटर आकार के मलच की आवश्यकता होती है फल का रंग बदलना फल पकने की निशानी है फल का गुच्छा पकने के लिए आमतौर पर 15-16 सप्ताह का समय लेता है सीढ़ी या बांस (जिस पर तीखा चाकू लगा हो) की मदद से पके हुए फल तोड़े और पके फलों को इक्ट्ठा करने के लिए एक जाल भी लगाएं पके फलों को आकार और रंग के आधार पर छांटे और बक्सों में पैक करें तुड़ाई के बाद पॉलीनैट पर फलों के ऊपरी भाग को नीचे की तरफ करके रखें

Posted by satnam pannu
Punjab
19-04-2020 08:40 PM
ਸਤਨਾਮ ਜੀ ਤੁਸੀ ਕਣਕ ਦੀਆਂ ਕਿਸਮਾਂ ਜਿਵੇ PBW 752,UNNAT PBW 343,PBW 725 ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ |
Posted by dr.durgesh katija
Madhya Pradesh
19-04-2020 08:34 PM
डॉ दुगेश जी, कृपया आप कीट की फोटो भेजें ताकि आपको उसके हिसाब से इसके बारे में जानकरी दी जा सके, धन्यवाद

Posted by महेश चौरसिया
Uttar Pradesh
19-04-2020 08:29 PM
महेश जी आप इसके ऊपर imidacloprid @1.5 ml की स्प्रे करें| महू की रोकथाम हो जाएगी|

Posted by महेश चौरसिया
Uttar Pradesh
19-04-2020 08:28 PM
महेश जी, आप माहू की रोकथाम के लिए इसमें imidacloprid @ 15 ml प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे कर सकते हैं, धन्यवाद।

Posted by parminder
Punjab
19-04-2020 08:27 PM
parminder ji jekar isde beej tandrust nahi han ta tuc isnu agle saal layi na rakho.dhanwad

Posted by Mandeep Singh
Punjab
19-04-2020 08:18 PM
ਮਨਦੀਪ ਜੀ ਤੁਸੀ ਫ਼ੇਮ @20ml ਜਾ coragen @60ml ਨੂੰ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੋ|

Posted by Gagandeep Singh
Punjab
19-04-2020 08:18 PM
ਗਗਨ ਜੀ, ਜੇਕਰ ਤੁਸੀਂ ML 2056 ਦੀ ਗੱਲ ਕਰ ਰਹੇ ਹੋ ਤਾਂ ML 2056: ਇਹ ਸਾਉਣੀ ਦੀ ਰੁੱਤ ਦੇ ਅਨੂਕੂਲ ਹੈ । ਇਸ ਦੇ ਪੌਦੇ ਮੱਧਮ ਕੱਦ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ । ਇਹ ਕਿਸਮ 75 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਕਟਾਈ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ । ਇਸ ਦੀ ਹਰ ਫਲੀ ਵਿੱਚ 11-12 ਦਾਣੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ । ਇਹ ਚਿਤਕਬਰਾ ਰੋਗ ਅਤੇ ਪੱਤਿਆਂ ਉੱਤੇ ਬਣਨ ਵਾਲੇ ਧੱਬਾ ਰੋਗ ਨੂੰ ਸਹਾਰਣਯੋਗ ਹੈ। ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਇਹ ਰਸ ਚੂਸਣ ਵਾਲੇ ਕੀੜਿਆਂ ਜਿਵੇ ਕਿ ਤੇਲੇ ਅਤੇ ਚ.... (Read More)
ਗਗਨ ਜੀ, ਜੇਕਰ ਤੁਸੀਂ ML 2056 ਦੀ ਗੱਲ ਕਰ ਰਹੇ ਹੋ ਤਾਂ ML 2056: ਇਹ ਸਾਉਣੀ ਦੀ ਰੁੱਤ ਦੇ ਅਨੂਕੂਲ ਹੈ । ਇਸ ਦੇ ਪੌਦੇ ਮੱਧਮ ਕੱਦ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ । ਇਹ ਕਿਸਮ 75 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਕਟਾਈ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ । ਇਸ ਦੀ ਹਰ ਫਲੀ ਵਿੱਚ 11-12 ਦਾਣੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ । ਇਹ ਚਿਤਕਬਰਾ ਰੋਗ ਅਤੇ ਪੱਤਿਆਂ ਉੱਤੇ ਬਣਨ ਵਾਲੇ ਧੱਬਾ ਰੋਗ ਨੂੰ ਸਹਾਰਣਯੋਗ ਹੈ। ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਇਹ ਰਸ ਚੂਸਣ ਵਾਲੇ ਕੀੜਿਆਂ ਜਿਵੇ ਕਿ ਤੇਲੇ ਅਤੇ ਚਿੱਟੀ ਮੱਖੀ ਨੂੰ ਸਹਿਣਯੋਗ ਹੈ ।ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 4.5 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ।
Posted by rajendra bairwa
Rajasthan
19-04-2020 08:16 PM
खरीफ की फसल के लिए नर्सरी में बीजों को जून के महीने में बोयें। खरीफ की फसल के लिए 75 सैं.मी x 75 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें
Posted by Virendra Singh Bhati
Rajasthan
19-04-2020 08:16 PM
Virendra ji aap mousam ke hisab se chara ugga skte hai jaise aab chare wali makki ki bijai kr skte hai.
Posted by Gurinder Singh
Punjab
19-04-2020 08:13 PM
ਮੌਸਮ ਵਿਭਾਗ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ 25 ਤਰੀਕ ਨੂੰ ਮੌਸਮ ਸਾਫ ਰਹੇਗਾ|
Posted by Komal Singh
Punjab
19-04-2020 07:53 PM
komal ji mitti vich nami paryapt matra vich nami hon te isdi bijai karo ate ktara vich faasla 30cm ate paudeya vich faasla 22.5cm rakho. tuc isdi bijai bed ja vattan bna ke kar sakde ho.dhanwad
Posted by Jasbir Singh
Rajasthan
19-04-2020 07:52 PM
सर पपीते की खेती करने का सही समय क्या है, एक एकड़ में कितने पौधे लगेंगे, वेराइटी रेड लेडी ठीक रहेगी ?
बसंत के मौसम में फरवरी मार्च के महीने में बिजाई करें जबकि मॉनसून के मौसम में बिजाई के लिए जून जुलाई का महीना उपयुक्त होता है और पतझड़ के मौसम में बिजाई अक्तूबर से नवंबर महीने में की जाती है।एक एकर में लगभग 800 पौधे लग जाते है|

Posted by govinda pandey
Uttar Pradesh
19-04-2020 07:51 PM
उसे नजदीकी डॉक्टर से जाँच करवाएं उसकी जाँच करके ही सही इलाज हो सकता है।
Posted by indresh kumar
Uttar Pradesh
19-04-2020 07:39 PM
Indresh ji iske liye koi qualification ki nahi balki training ki jrurat hoti hai jis se aap is plant ko sahi tareeke se chla sake. aap training apne najdiki kise farmer se le sakte hai ya krishi vigyan kendra se le ?
Posted by ਕੁਲਦੀਪ ਸਿੰਘ ricki saini
Punjab
19-04-2020 07:31 PM
ਕੁਲਦੀਪ ਜੀ ਇਹ ਮੱਛਰ ਦੇ ਹਮਲੇ ਦੇ ਕਾਰਨ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਇਸਦੇ ਲਈ ਤੁਸੀ imidacloprid @15 ml ਨੂੰ ਪ੍ਰਤੀ ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇਕਰੋ |
Posted by ਅਮਨ ਡੇਅਰੀ ਫਾਰਮ
Punjab
19-04-2020 07:28 PM
ਪਸ਼ੂਆਂ ਨੂੰ ਮੱਖੀ ਮੱਛਰ ਤੋਂ ਬਚਾਉਂਣ ਲਈ ਸਰੋਂ ਦਾ ਤੇਲ ਅਤੇ ਡੀਜ਼ਲ ਨੂੰ ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਮਿਲਾ ਕੇ ਪਸ਼ੂਆਂ ਉੱਪਰ ਸਪਰੇਅ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਸ ਵਿੱਚ ਡੀਜ਼ਲ ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਸਰੋਂ ਦੇ ਤੇਲ ਨਾਲੋਂ ਥੋੜੀ ਘੱਟ ਰੱਖੋ ਡੀਜ਼ਲ ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਜ਼ਿਆਦਾ ਨਹੀਂ ਪਾਉਣੀ ਜੇਕਰ ਜ਼ਿਆਦਾ ਪਾਈ ਜਾਵੇ ਤਾਂ ਇਹ ਪਸ਼ੂ ਦੀ ਚਮੜੀ ਨੂੰ ਨੁਕਸਾਨ ਕਰਦੀ ਹੈ ਸਰੋਂ ਅਤੇ ਡੀਜ਼ਲ ਨੂੰ ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਬੋਤਲ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਜਿà.... (Read More)
ਪਸ਼ੂਆਂ ਨੂੰ ਮੱਖੀ ਮੱਛਰ ਤੋਂ ਬਚਾਉਂਣ ਲਈ ਸਰੋਂ ਦਾ ਤੇਲ ਅਤੇ ਡੀਜ਼ਲ ਨੂੰ ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਮਿਲਾ ਕੇ ਪਸ਼ੂਆਂ ਉੱਪਰ ਸਪਰੇਅ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਸ ਵਿੱਚ ਡੀਜ਼ਲ ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਸਰੋਂ ਦੇ ਤੇਲ ਨਾਲੋਂ ਥੋੜੀ ਘੱਟ ਰੱਖੋ ਡੀਜ਼ਲ ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਜ਼ਿਆਦਾ ਨਹੀਂ ਪਾਉਣੀ ਜੇਕਰ ਜ਼ਿਆਦਾ ਪਾਈ ਜਾਵੇ ਤਾਂ ਇਹ ਪਸ਼ੂ ਦੀ ਚਮੜੀ ਨੂੰ ਨੁਕਸਾਨ ਕਰਦੀ ਹੈ ਸਰੋਂ ਅਤੇ ਡੀਜ਼ਲ ਨੂੰ ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਬੋਤਲ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਜਿਸ ਜਗ੍ਹਾ ਤੇ ਪਸ਼ੂਆਂ ਦੇ ਜ਼ਿਆਦਾ ਮੱਖੀਆਂ ਬੈਠਦੀਆਂ ਹਨ ਉਸ ਜਗ੍ਹਾ ਤੇ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀਂ ਡੀਜ਼ਲ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਨਹੀਂ ਕਰਨੀ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਤੁਸੀਂ ਡੀਜ਼ਲ ਦੀ ਜਗ੍ਹਾ ਮਿੱਟੀ ਦੇ ਤੇਲ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਵੀ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਮਿੱਟੀ ਦੇ ਤੇਲ ਨੂੰ ਵੀ ਓਸੇ ਤਰ੍ਹਾਂ ਸਰੋਂ ਦੇ ਤੇਲ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਪਸ਼ੂਆਂ ਤੇ ਸਪਰੇਅ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਸ ਨਾਲ ਪਸ਼ੂਆਂ ਦਾ ਮੱਖੀ ਮੱਛਰ ਤੋਂ ਬਚਾਅ ਹੁੰਦਾ ਹੈ

Posted by Safal Bhanarkar
Maharashtra
19-04-2020 07:25 PM
Bhanarkar ji yaddi aap kisi ki jameen lekar uss per krna chahte hai tab v aap kr skte hai, per pehle iss kam ki training jrur lenn jisse apko iss kam ki purri jankari milegi aur iss kam ko krne ka trika v ptaa lgega, aap training apne nazdiki krishi vigyan kendra se lee skte hai.

Posted by gurjinder singh
Punjab
19-04-2020 06:51 PM
Gurjinder ji, tusi neem diya jarhan vich. syonk de hamle di jaanch karo, jekar hamla mojood hove te tusi us vich chlorpyriphos @ 4 ml prati litre pani de hisaab nal spray karo, isdey nal syonk mar javegi, dhanwad

Posted by gurjinder singh
Punjab
19-04-2020 06:48 PM
ਗੁਰਜਿੰਦਰ ਜੀ, ਤੁਸੀਂ ਨੀਮ ਦੇ ਤੇਲ ਦੀ ਸਪਰੇ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਇਸਦੀ ਮਾਤਰਾ 4 ml ਪ੍ਰਤੀ ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਵਰਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ, ਇਸਦਾ ਕੋਈ ਨੁਕਸਾਨ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਧੰਨਵਾਦ

Posted by Rpn Singh
Uttar Pradesh
19-04-2020 06:43 PM
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी खà¥.... (Read More)
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी खुम्ब का समय अक्तूबर से मध्य फरवरी तक हैं इस समय हम एक फसल ही ले सकते है पराली खुम्ब का समय अप्रैल से अगस्त तक है इस समय हम चार फसले ले सकते है मिलकी खुम्ब का समय अप्रैल से सितंबर तक है आप अब अप्रैल में मिलकी या पराली खुम्ब लगा सकते है पराली खुमब के लिए आपको पराली, बीज, बांस, सेबा, आदि की जरूरत है पराली के पूले, धानो की पराली 1-1 किलो के पूले दोनो सिरो से सेबे से बांध कर तैयार किये जाते है पूले के सिरे कांट कर एक सार कर लिए जाते है पूलो की क्यिारी लगाना पराली के पूलो को साफ पानी में 16-20 घंटो के लिए डूबो दे गिले पूलो को ढलान पर रख कर फालतू पानी को निकलने दे कमरे ईटो और बांस से एक पलेटफार्म बनाये इस पलेटफार्म पर 5 पूलो की एक तहय लगाये जिसके ऊपर 75 ग्राम बीज डाले इसके ऊपर की तहय उलट होती है इस प्रकार 5-5 पूलो की तहय में 300 ग्राम बीज डाल कर कियारी तैयार करे सबसे ऊपर दो पूलो को खोलकर रख दे खुम्बो का फूटना बिजाई से 7-9 दिनो के बाद खुम्ब फूटने लगती है पानी और हवा का संचार बिजाई के दो दिन के बाद हर रोज पानी का छिडका करे खुम्बो के फूटने के बाद हवा का संचार 6-8 घंटे प्रति दिन किया जाता है खुम्बो की तूडाई खुम्बो के फूटने के बाद 1-2 दिनो के बाद तोडाई के योग्य हो जाती है मिलकी खुम्ब मिलकी खुम्ब के लिए तूडी, बीज, मोमी लिफाफे, सेबा, केसिंग,मिट्टी आदि होने चाहिये तूडी की तैयारी सूकी तूडी को पक्के फर्श पर बिछा कर 16-20 घंटे पानी से गिला करे गिली तूडी को बोरी में भर कर सेबे से बांध दे इस बोरी को उबलते पानी में 45-50 मिनट रखें तूडी को निकालकर पक्के फर्श पर बिछा कर ठंडा करे यह तूडी बिजाई के लिए तैयार है बिजाई ठंडी तूडी में बीज मिलाकर मोमी लिफाफो में भर दें एक मोमी लिफाफें में लगभग 2 किलो गिली तूडी और 70-80 ग्राम बीज पडता है लिफाफे के मुंह को सेबे से अच्छी तरह बांध कर कमरे में रख दे केसिंग बिजाई के दो तीन हफतो के बाद लिफाफे खोलकर केसिंग की 1-1.5 की तहय लगा दें केसिंग में तूडी और रेतली मिट्टी होती है 24 घंटो के लिए 4 प्रतिशत फारमलेन के घोल से जीवाणु रहित किया जाता है खुम्बो का फूटना केसिंग मिट्टी डालने के लगभग दो हफतो में खुम्बो के छोटे छोटे किणके निकलने शुरू हो जाते है और 4-5 दिन के बाद तोडने योग्य हो जाते है खुम्बो की तूडाई लगभग 35-40 दिनो तक की जाती है

Posted by HARVINDER SINGH
Punjab
19-04-2020 06:42 PM
ਹਰਵਿੰਦਰ ਜੀ ਇਸ ਪੌਦੇ ਨੂੰ sage ਦਾ ਪੌਧਾ ਹੈ ਇਹ ਇਕ medicinal plant ਹੈ|

Posted by MANAV
Maharashtra
19-04-2020 06:38 PM
मानव जी यह फंगस की वजह से हो रहा है इसके लिए आप mancozeb @4 ग्राम को प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें|
Posted by Balvir Singh
Punjab
19-04-2020 06:37 PM
Balvir ji, ap apni fasal mein tatvo ki kami puri karne ke liye vermicompost @ 3-4 kilo ke hisaab se dal sakte hain iske ilawa ap upplon (pathi ) ke pani ki spray bhi kar sakte ap ap uplon ko pani mein bhigo kar shaya mein rakh dein or us pani ki spray karein iske ilawa ap gobar ki khaad ka bhi istemal kar sakte hain, dhanywad
Posted by Gurpreet Brar
Punjab
19-04-2020 06:36 PM
gurpreet ji chare de layi makki di best kisam J1006 hai.dhanwad
Posted by Balvir Singh
Punjab
19-04-2020 06:33 PM
Mr. Balvir, please send the photo of the same, so that we can provide you relevant information accordingly, thank you
Posted by ਸਰਬਜੋਤ ਸਿੰਘ ਚੀਮਾਂ
Punjab
19-04-2020 06:30 PM
ਚੀਮਾ ਜੀ ਇਹ ਮੱਖੀ ਦੇ ਹਮਲੇ ਦੇ ਕਾਰਨ ਹੁੰਦਾ ਹੈ| ਇਸਦੇ ਲਈ ਤੁਸੀ fenvelarate @2 ml ਨੂੰ ਪ੍ਰਤੀ ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੋ|
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