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Posted by Kulwinder Singh
Punjab
20-04-2020 09:18 AM
Punjab
04-20-2020 01:03 PM
Kulwinder ji, makki di bijai da sahi sama ant march tak da hunda hai, hun jekar bijai kardeo tan eh late ho gayi hai, dhanwad
Posted by kuldeep
Haryana
20-04-2020 09:17 AM
Maharashtra
04-20-2020 12:57 PM
Kuldeep ji, apke dawara bheji gayi photo puri upload nahi hui hai, kripya ap ise dubara bhejein taki apko dekh kar iske bare mein janakri di ja sake, dhanywad
Posted by Hariom
Uttar Pradesh
20-04-2020 09:16 AM
Maharashtra
04-20-2020 02:08 PM
हरिओम जी, यह मछर के हमले की वजह से हो रहा है, आप इसकी रोकथाम के लिए इसमें imidacloprid @ 60 ml को 150 लीटर पानी में मिला कर प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे कर सकते हैं, धन्यवाद
Posted by ਤੇਜਿੰਦਰ ਸਿੰਘ
Punjab
20-04-2020 09:10 AM
Punjab
04-20-2020 09:12 AM
Posted by Sohit Kumar
Uttar Pradesh
20-04-2020 09:09 AM
Maharashtra
04-20-2020 09:16 AM
Sohit ji, sinchi khetron mein bijai monsoon ke shuru hone se 10-15 din pehle karein. barani khstron mein bijai monsoon ke shuru hone par ki jati hai, iski bijai may se shuru ki jati hai, dhanywad
Posted by kamlesh
Rajasthan
20-04-2020 09:06 AM
Maharashtra
04-20-2020 09:19 AM
Kamlesh ji, bt cotton ke liye April se Madhy May ka samy upyukt hota hai, ap abhi iski bijai kar sakte hain, dhanywad
Posted by ਗੁਰਪਰੀਤ ਸਿੰਘ
Punjab
20-04-2020 08:48 AM
Punjab
04-22-2020 12:48 PM
ਗੁਰਪ੍ਰੀਤ ਜੀ ਤੁਸੀ ਐਚ ਐੱਫ ਨਸਲ ਦੀਆ ਵੱਛੀਆਂ ਲੈਣ ਲਈ ਲਖਵਿੰਦਰਜੀਤ ਸਿੰਘ 7347216759 ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ
Posted by मनोज कुमार
Uttar Pradesh
20-04-2020 08:39 AM
Punjab
04-21-2020 07:51 PM
इसे मिट्टी की कई किस्मों में उगाया जा सकता है पर यह अच्छे निकास वाली रेतली दोमट मिट्टी में उगाने पर अच्छे परिणाम देती है मिट्टी की पी एच 4.7-7.7 होनी चाहिए मिट्टी में नाइट्रोजन की उच्च मात्रा ईसबगोल की रोपाई के लिए अच्छी होती है आप इसकी किसम जैसे Haryana Isabgol-5 की बिजाई कर सकते है ईसबगोल की बिजाई के लिए उपयुक्त समय अक्तà¥.... (Read More)
इसे मिट्टी की कई किस्मों में उगाया जा सकता है पर यह अच्छे निकास वाली रेतली दोमट मिट्टी में उगाने पर अच्छे परिणाम देती है मिट्टी की पी एच 4.7-7.7 होनी चाहिए मिट्टी में नाइट्रोजन की उच्च मात्रा ईसबगोल की रोपाई के लिए अच्छी होती है आप इसकी किसम जैसे Haryana Isabgol-5 की बिजाई कर सकते है ईसबगोल की बिजाई के लिए उपयुक्त समय अक्तूबर से नवंबर का महीना होता है पिछेती बिजाई (दिसंबर के पहले पखवाड़े के बाद) ना करें क्योंकि यह पैदावार में कमी को बढ़ाता है बीजों को बोने के लिए बुरकाव ढंग या कतार में बिजाई ढंग का प्रयोग किया जाता है बुरकाव करने के बाद बिजाई के समय झाड़ू की मदद से बीजों को मिट्टी में मिला दें बीजों को 1-2 सैं.मी. की गहराई में बोयें पौधे से पौधे में 15 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें एक एकड़ खेत में बिजाई के लिए 2-3 किलोग्राम बीजों को प्रयोग करें इसके बीज छोटे होते हैं इसलिए बीजों की मात्रा बढ़ाने के लिए उसमें रेत या खाद मिला ली जाती है मिट्टी से पैदा होने वाली फंगस से बचाने के लिए कार्बेनडाज़िम 2 ग्राम या कप्तान 5 ग्राम से प्रति किलो बीजों का उपचार करें रासायनिक उपचार के लिए PSB + अज़ोटोबैक्टर 200 ग्राम से बीजों का उपचार करें ईसबगोल की पूरी फसल को नाइट्रोजन 20 किलो (यूरिया 45 किलो), फासफोरस 10 किलो (एस एस पी 65 किलो) और पोटाश 12 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 20 किलो) प्रति एकड़ में आवश्यकता होती है नाइट्रोजन की आधी और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन को बिजाई के एक महीना बाद डालें नदीनों की तीव्रता के आधार पर हाथों से गोडाई करें बिजाई के दो महीनों में 2-3 गोडाई की आवश्यकता होती है बिजाई के 20-25 दिनों के आद पहली गोडाई करें किस्म के आधार पर बिजाई के 4-5 महीने बाद फसल कटाई के लिए तैयार हो जाती है कटाई का सही समय तब होता है जब नोक अपना रंग बदलकर भूरे रंग में और निचला पत्ता पीले रंग का हो जाता है उंगलियों के बीच दबाने पर दाने बाहर निकल आते हैं कटाई सुबह के समय 10 बजे के बाद करें कटाई ज़मीनी स्तर से करें धन्यवाद
Posted by मृत्युंजय कुमार
Bihar
20-04-2020 08:38 AM
Punjab
04-20-2020 09:05 AM
श्री मान पपीते की खेती को मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली पहाड़ी मिट्टी पपीते की खेती के लिए उपयुक्त होती है रेतली और भारी मिट्टी में इसकी खेती ना करें पपीते की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6.5-7.0 होनी चाहिए प्रसिद्ध किस्में :-Pusa Dwarf: इसके फल मध्यम आकार के और अंडाकार होते हैं यह सूखे को à¤.... (Read More)
श्री मान पपीते की खेती को मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली पहाड़ी मिट्टी पपीते की खेती के लिए उपयुक्त होती है रेतली और भारी मिट्टी में इसकी खेती ना करें पपीते की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6.5-7.0 होनी चाहिए प्रसिद्ध किस्में :-Pusa Dwarf: इसके फल मध्यम आकार के और अंडाकार होते हैं यह सूखे को सहनेयोग्य किस्म है यह उच्च घनत्व में रोपाई के लिए लाभदायक है Pusa Giant: इस किस्म के पौधे तेज हवा को सहनेयोग्य है यह बड़े फलों का उत्पादन करती है यह पैकिंग के लिए उपयुक्त किस्म है CO 3: इसके फल बड़े आकार के और अंडाकार होते हैं इसे ज्यादा देर तक रखने की गुणवत्ता अच्छी होती है CO 1: यह छोटे कद की किस्म है जिसके फल मध्यम आकार के होते हैं फल गोलाकार, नर्म हरा-पीला छिल्का और संतरी पीले रंग का गुद्दा होता है फल रसदार होता है और इसे ज्यादा देर तक रखने की गुणवत्ता अच्छी होती है Coorg Honey Dew: इसे सीधे तौर पर खाने के लिए और प्रक्रिया के लिए प्रयोग किया जाता है इसके फल आयताकार और गुद्दा मोटा संतरी रंग का होता है Pusa Majesty: इसके फल मध्यम आकार के, गोल होते हैं इन्हें रखने की गुणवत्ता बहुत अच्छी होती है यह किस्म 146 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह किस्म जड़ गलन निमाटोड के प्रतिरोधक किस्म है Pusa Delicious: यह मध्यम लंबी किस्म है इसके फल मध्यम आकार के होते हैं, गुद्दा गहरे संतरी रंग का होता है इस किस्म को कतारों में लगाने के लिए प्रयोग किया जाता है पपीते की खेती के लिए नदीन रहित भूमि का प्रयोग करें मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें आखिरी जोताई के समय अच्छी तरह से गली हुई रूड़ी की खाद या गाय का गला हुआ गोबर मिट्टी में अच्छी तरह मिलाकर डालें सिफारिश किए गए फासलों पर 1 मीटर x 1 मीटर x 1 मीटर आकार के गड्ढे खोदें गड्ढों को मिट्टी और रूड़ी की खाद या गाय के गले हुए गोबर से भरें प्रयोग की गई किस्म के आधार पर प्रत्येक गड्ढे पर 2-4 नए पौधों की रोपाई करें रोपाई के बाद हल्की सिंचाई करें हवा से बचाव के लिए खूंटा लगाएं बीजों को 150 गेज़ की मोटाई वाले, 25 x 10 सैं.मी. के पॉलीथीन बैग में बोयें पानी के उचित निकास के लिए पॉलीथीन बैग के निचले हिस्से में 1 मि.मी. अर्द्धव्यास का छेद करें उसके बाद पॉलीथीन बैग में समान अनुपात में रूड़ी की खाद, मिट्टी और रेत डालें बिजाई से पहले बीजों का उपचार करें रोपाई के लिए 6-7 सप्ताह के पौधों का प्रयोग करें यूरिया 150 ग्राम, फासफोरस 80 ग्राम, पोटाश 100 ग्राम प्रति वृक्ष में प्रति वर्ष डालें खादों को 4 भागों में बांटकर रोपाई के बाद पहले, तीसरे, पांचवे और सातवें महीने में डालें बसंत के मौसम में फरवरी मार्च के महीने में बिजाई करें जबकि मॉनसून के मौसम में बिजाई के लिए जून जुलाई का महीना उपयुक्त होता है और पतझड़ के मौसम में बिजाई अक्तूबर से नवंबर महीने में की जाती है आमतौर पर 1.8 मीटर x 1.8 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है उच्च घनता की रोपाई के लिए 1.5 मीटर x 1.5 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है नर्सरी में बीज को 1 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बीजो की खेत में सीधे बिजाई या मुख्य खेत में नए पौधों की रोपाई की जाती है 100-120 ग्राम बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें मिट्टी की किस्म, जलवायु के हालातों आदि के आधार पर सिंचाई करें सर्दियों में 15 दिनों के अंतराल पर और गर्मियों में 7 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें तने को पानी के संपर्क में ना आने दें और खेत में पानी भी खड़ा ना होने दें पौधे की प्रौढ़ अवस्था के दौरान नदीनों की रोकथाम जरूरी होती है नदीनों की तीव्रता के आधार पर, नियमित और हल्की गोडाई करें फ्लूक्लोरालिन या बूटाक्लोर 800 मि.ली. प्रति एकड़ में डालें नदीनों की रोकथाम के लिए मलचिंग भी एक प्रभावी तरीका है पौधों की रोपाई के कुछ दिनों बाद प्लास्टिक शीट या धान की पराली या गन्ने के बचे कुचे को मलच के रूप में डालें मुख्यत: फल के पूरा आकार लेने और हरे से हल्का पीला रंग होने पर तुड़ाई की जाती है पहली तुड़ाई रोपाई के 14-15 महीनों के बाद की जा सकती है 4-5 तुड़ाइयां प्रति मौसम की जा सकती हैं धन्यवाद
Posted by anandi lal sahu
Madhya Pradesh
20-04-2020 08:36 AM
Maharashtra
04-20-2020 12:49 PM
Anandhi ji, yeh fasal ki kism par nirbhar karta hai ke apne konsi fasal ki bijai ki hai, or kabhi kabhi mausam bhi fasal ke hisaab se anukul nahi hoya jaise bemausmi barish ki vajah se bhi paidawaar kam ho jati hai, dhanywad
Posted by animesh
Rajasthan
20-04-2020 08:35 AM

Punjab
04-20-2020 09:06 AM
श्री मान आप NPK 13:00:45@1kg प्रति एकड़ सप्रे कर सकते हो।
Posted by abhijeet
Haryana
20-04-2020 08:35 AM
Maharashtra
04-20-2020 12:47 PM
Abhijeet ji, yeh fungus ki vajah se ho raha hai ap iski roktham ke liye isme copper oxychloride @ 3 gram prati litre pani ke hisaab se spray kar sakte hain, dhanywad
Posted by Rajesh Kumar maurya
Uttar Pradesh
20-04-2020 08:32 AM
Maharashtra
04-20-2020 12:45 PM
Rajesh ji, urad mein jayda pani ki jarurat nahi hoyi hai, isme pani jalyaju ke adhaar par hi lagaya jata hai agar jarurat pade to, urad ko khraif ki fasal ke tor par ugaya jata hai, dhanywad
Posted by Rajesh Kumar maurya
Uttar Pradesh
20-04-2020 08:30 AM
Maharashtra
04-20-2020 12:42 PM
Rajesh ji, urad ko kharif ki fasal ke tor par ugaya jata hai. yadi jarurat pade to jalvayu ke halatib ke adhar par sinchai karein, dhanywad
Posted by sharad
Uttar Pradesh
20-04-2020 08:30 AM
Maharashtra
04-20-2020 12:36 PM
Sharad ji ganne ki kheti february-march mahine men ki jati hai.ktaro ka faasla 60-120cm ka hona chahiye.bijai ke liye gehri khali, med bnakar,pankti men joda bnakar ya gadda khod kar bijai kar sakte hai.beej ki matra 2 ankh vali 35000 aur teen akh vali 23000 ki bijai kar sakte hai dhanywad
Posted by animesh
Rajasthan
20-04-2020 08:24 AM
Punjab
04-21-2020 09:34 PM
अनिमेष जी यह एक देसी गाय है और इसका रेट इसके दूध और अच्छी नस्ल के हिसाब से होता है आप गिर गाय लेने के लिए विभोर जैन 7665466657 wholeness dairy farm से संम्पर्क कर सकते हैं
Posted by सविकी दलाल
Haryana
20-04-2020 08:23 AM

Punjab
06-10-2020 03:28 PM
सविकी दलाल जी इस के लिए आप अपने नजदीकी शहर की मंडी से सम्पर्क कर सकते है जा
Posted by shaitan Kumar balai
Rajasthan
20-04-2020 08:22 AM
Punjab
04-20-2020 12:28 PM
श्रीमान जी, आप मई महीने में फसलें जैसे के फ्रेंच बीन्स, लोबिया, चलाई, भिंडी, घीया, खीरा, मूली की बिजाई कर सकते हैं, इसके इलावा आप मक्की की बिजाई कर सकते हैं, धन्यवाद
Posted by Sakaldev Sahani
Uttar Pradesh
20-04-2020 08:11 AM
Rajasthan
04-20-2020 12:21 PM
यदि आप मोती की खेती के बारे में जानकारी लेना चाहते है तो मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्à¤.... (Read More)
यदि आप मोती की खेती के बारे में जानकारी लेना चाहते है तो मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद
Posted by Balvir Singh
Punjab
20-04-2020 08:09 AM
Punjab
04-20-2020 12:15 PM
Balvir ji, kaddu di bijai layi adhe kille liaye 500 gram de beej di lirh hundi hai, gobhi layi 200-250 gram beej di lorh hundia , dhanwad
Posted by Kulbir Singh
Punjab
20-04-2020 08:02 AM
Punjab
04-20-2020 11:53 AM
Kulbir ji, sauni rut layi is di bijai da dukwa sama july mahine da pehla pandrvada hai. garmi rut di bijai layi sahi sama march to april tak da hai, dhanwad
Posted by ਸਰਦਾਰ ਗੁਰਭੇਜ ਸਿੰਘ
Punjab
20-04-2020 07:50 AM
Punjab
04-20-2020 12:18 PM
ਸਰਦਾਰ ਜੀ, ਤੁਹਾਡੇ ਦਵਾਰਾ ਭੇਜੀ ਗਈ ਫੋਟੋ ਵਿਚ ਕੁਛ ਸਾਫ ਦਿਖਾਈ ਨਹੀਂ ਦੇ ਰਿਹਾ ਹੈ , ਕਿਰਪਾ ਕਰ ਕੇ ਤੁਸੀਂ ਫੋਟੋ ਦੁਬਾਰਾ ਭੇਜੋ ਤਾਂਜੋ ਤੁਹਾਨੂੰ ਇਸ ਬਾਰੇ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿੱਤੀ ਜਾ ਸਕੇ, ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Jagdish Choudhary
Rajasthan
20-04-2020 07:46 AM

Punjab
04-21-2020 07:54 PM
jagdish ji kripya swal vistar se pooche ke aap konse paudhe ke bare men jankari lena chhate hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake,dhanywad
Posted by IMAMUDDIN
Uttar Pradesh
20-04-2020 07:41 AM
Maharashtra
04-20-2020 07:52 AM
Imamudin ji, sahjan (moringa ki kheti ) sabhi parkar ki miti mein ugaya ja sakta hai. yaha tak ke bejat banjar or kam urvarak bhumi mein bhu uski kheti ki ja sakti hai. mitti ka pH 6-7.5 hona chahiye. sahjan ke podhe ki ropai gadda bnakar ki jati hai. keht ko achi tarah khatpatwar se saaf safai kar dein. gadde a akar 2.5*2.5 m ki doori par 45*45*45 cm akar ka hota hai. 10 kg sada hua gobar dalein. ek hectare ki kheti karne ke liye 500 gram beej prayapt hai beej ko sidha tiyar gadde mein ya fir polythene bag mein podh ek mahine mein lagane yogya tiyar ho jata hai. podhe ko pehle se touar kiye gaye gadde mein mahine july-september tak ropani kar dein. podhe jab 75 ka ho jaye to podhe ke upari bhag ki khitni kar dein, isse bagal ki shakahiyon ko nikalne mein asani hogi. ropai ke baad 100 gra.... (Read More)
Imamudin ji, sahjan (moringa ki kheti ) sabhi parkar ki miti mein ugaya ja sakta hai. yaha tak ke bejat banjar or kam urvarak bhumi mein bhu uski kheti ki ja sakti hai. mitti ka pH 6-7.5 hona chahiye. sahjan ke podhe ki ropai gadda bnakar ki jati hai. keht ko achi tarah khatpatwar se saaf safai kar dein. gadde a akar 2.5*2.5 m ki doori par 45*45*45 cm akar ka hota hai. 10 kg sada hua gobar dalein. ek hectare ki kheti karne ke liye 500 gram beej prayapt hai beej ko sidha tiyar gadde mein ya fir polythene bag mein podh ek mahine mein lagane yogya tiyar ho jata hai. podhe ko pehle se touar kiye gaye gadde mein mahine july-september tak ropani kar dein. podhe jab 75 ka ho jaye to podhe ke upari bhag ki khitni kar dein, isse bagal ki shakahiyon ko nikalne mein asani hogi. ropai ke baad 100 gram urea, 100 gram SSP , 50 gram MOP prati gadde ke hisaab se dalein, dhanywad
Posted by Jitendra kumar nirmalkar Jiten
Chattisgarh
20-04-2020 07:38 AM
Maharashtra
04-20-2020 11:38 AM
जिंतेंद्र जी, मूँग या उड़द यदि खरीफ मौसम में बोई गई हो तो कुसुम फसल बोने का उपयुक्त समय सितम्बर माह के अंतिम से अक्टूबर माह के प्रथम सप्ताह तक है। यदि खरीफ फसल के रुप में सोयबीन बोई है तो कुसुम फसल बोने का उपयुक्त समय अक्टूबर माह के अंत तक है। बारानी खेती है और खरीफ में कोई भी फसल नहीं लगाई हो तो सितम्बर माह के .... (Read More)
जिंतेंद्र जी, मूँग या उड़द यदि खरीफ मौसम में बोई गई हो तो कुसुम फसल बोने का उपयुक्त समय सितम्बर माह के अंतिम से अक्टूबर माह के प्रथम सप्ताह तक है। यदि खरीफ फसल के रुप में सोयबीन बोई है तो कुसुम फसल बोने का उपयुक्त समय अक्टूबर माह के अंत तक है। बारानी खेती है और खरीफ में कोई भी फसल नहीं लगाई हो तो सितम्बर माह के अंत से अक्टूबर माह के प्रथम सप्ताह तक कुसुम फसल सफलतापूर्वक बो सकते हैं। यह एक सूखा सहनशील फसल है अत: यदि फसल का बीज एक बार उग आये तो इसे फसल कटने तक सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती। लेकिन जहाँ सिंचाई उपलब्ध हो, वहां, अधिकतम दो सिंचाई कर सकते हैं। प्रथम सिंचाई 50 से 55 दिनों पर (बढ़वार अवस्था) और दूसरी सिंचाई 80 से 85 दिनों पर (शाखायें आने पर) करना उचित होता है, धन्यवाद
Posted by sangitarawal
Punjab
20-04-2020 07:37 AM
Punjab
04-20-2020 07:56 AM
Sangitarawal ji, kripya ap apna sawal visthar se puchein taki apko uske hisaab se iske bare mein jankari di ja sake, dhanywad
Posted by sangitarawal
Punjab
20-04-2020 07:28 AM
Punjab
04-20-2020 07:57 AM
Sangitarawal ji, kripya ap apna sawal visthar se puchein taki apko uske hisaab se iske bare mein jankari di ja sake, dhanywad
Posted by HARSHIT tiwari
Uttar Pradesh
20-04-2020 07:16 AM
Haryana
04-22-2020 12:32 PM
Haryana main 4 semen station hai 1 Rohtak, Jo ki NDDB ke under hai State Government ke pass 3 hai 1. Jagadhari 2. Hisar 3. Rohtak
Posted by Amin
Haryana
20-04-2020 07:14 AM
Punjab
04-20-2020 11:33 AM
अमिन जी, आप कपास की किस्मे जैसे के HS 6, H 1098, HHH 223, HHH 287, H 1117, H 1226, HD 107, HD 123, HD 324, HHH 287 की बिजाई कर सकते हैं, धन्यवाद
Posted by junaid khan
Uttar Pradesh
20-04-2020 06:43 AM
Maharashtra
04-20-2020 07:42 AM
Junaid ji, kripya ap bataye ke apne abhi tak isme konse khaad ka istemal kiya hai taki apko uske hisaab se iske bare mein jankari di ja sake, dhanywad
Posted by udayraj tiwari
Uttar Pradesh
20-04-2020 06:22 AM
Maharashtra
04-20-2020 07:40 AM
उदयराज जी, पालक की बिजाई लगभग एक साल में की जा सकती है| पर अगस्त से दिसंबर का समय बिजाई के लिए उचित होता है। धन्यवाद
Posted by Shivam Singh Chauhan
Uttar Pradesh
20-04-2020 06:18 AM
Maharashtra
04-21-2020 09:01 PM
Biofloc मछली पालन की नई तकनीक है, जिसका invention Dr.YORRAM AVNIMELECH जो कि ISRAEL के है जहाँ पानी की कमी हैै उस परस्तिथि में मछली पालन कैसे किया जाये, उस तकनीक का invention किया पर फ़िलहाल भारत के कई राज्यों में किसान इस तकनीक का इस्तेमाल करके मछली पालन कर रहे हैं इसमें हम थोड़ी जगह में जहाँ सिर्फ 4 मीटर का टैंक लगता है और 1 मीटर इसकी लम्बाई होतà.... (Read More)
Biofloc मछली पालन की नई तकनीक है, जिसका invention Dr.YORRAM AVNIMELECH जो कि ISRAEL के है जहाँ पानी की कमी हैै उस परस्तिथि में मछली पालन कैसे किया जाये, उस तकनीक का invention किया पर फ़िलहाल भारत के कई राज्यों में किसान इस तकनीक का इस्तेमाल करके मछली पालन कर रहे हैं इसमें हम थोड़ी जगह में जहाँ सिर्फ 4 मीटर का टैंक लगता है और 1 मीटर इसकी लम्बाई होती है मतलब की 10,000 लीटर इसमें हम अपना मछली पालन शुरू करके 1100-1300 किलो fish बना सकते हैं इसमें ज़्यादा पानी की ज़रूरत नहीं पड़ती और ना ही ज़्यादा जगह की ज़रूरत होती है, इसमें 650 -700 रूपये बिकने वाली मछलियां हैं वह हम इसमें डालते हैं और यह मछलियां 6 से 7 महीने तक बिकने योग्य हो जाती है, shrimp farming मतलब की झींगा इसका culture period -90 दिन का होता है BFT टैंक में आपको C:N ratio की सहायता से आपको बढ़िया बैक्टीरिया maintain करना होता है, और drainage की सहायता से sludge removal किया जाता है अगर आपका मैनेजमेंट एकदम सटीक रहा तो 0 % प्रतिशत पानी अदला-बदली किये बिना culture पूरा किया जा सकता है आपको उचित blower की सहायता से DO (dissolved oxygen ) maintain करने की ज़रूरत पड़ती है C:N ratio मतलब की कार्बन: नाइट्रोजन ratio अनुपात बनाएं रखना पड़ता है कार्बन जिससे की बैक्टीरिया (हेट्रोट्रॉपिक बैक्टीरिया) ठीक से काम करके नाइट्रोजन को कम कर सके क्योंकि नाइट्रोजन का एक हिस्सा जो कि non ionised Ammonia [NH3] जो मछली के लिए जानलेवा होता हैैै अधिक जानकारी के लिए 9096843382 पर फ़ोन कीजिये.
Posted by Rachna Rawat
Uttarakhand
20-04-2020 04:30 AM
Punjab
04-21-2020 09:00 PM
यदि आप पोल्ट्री फार्मिंग करना चाहते है तो आप इस काम को ट्रेनिंग लेकर शुरू करें जिससे आपको इस काम की पूरी जानकारी मिलेगी,इसके इलावा आप मुर्गी पालन करने वाले किसान के फार्म पर इस काम को देखे जिससे आपको इस काम aका अंदाजा हो जाएगा बाकि शेड मुख्य सड़क से 100 मीटर की दूरी पर होना चाहिए और वहां ताजे और साफ पानी की सप्लà.... (Read More)
यदि आप पोल्ट्री फार्मिंग करना चाहते है तो आप इस काम को ट्रेनिंग लेकर शुरू करें जिससे आपको इस काम की पूरी जानकारी मिलेगी,इसके इलावा आप मुर्गी पालन करने वाले किसान के फार्म पर इस काम को देखे जिससे आपको इस काम aका अंदाजा हो जाएगा बाकि शेड मुख्य सड़क से 100 मीटर की दूरी पर होना चाहिए और वहां ताजे और साफ पानी की सप्लाई 24 घंटे होनी चाहिए और अंडे देनी वाली मुर्गी को 0.14—0.19 वर्गमीटर जगह प्रति मुर्गी चाहिए पिंजरा सिस्टम में 0.8 से 1 वर्ग फीट और लकड़ी की पतली फट्टियों के फर्श के लिए 1 से 1.3 वर्ग फीट प्रति पंक्षी के हिसाब से जगह चाहिए
Posted by SUSHIL PANDEY
Uttar Pradesh
20-04-2020 02:11 AM
Maharashtra
04-20-2020 11:24 AM
एक बार जब यह लगाया जाता है, तो यह 15 वर्षों तक फल देगा, इसे सेम मिट्टी के अलावा किसी भी तरह की मिट्टी में लगाया जा सकता है। सर्दियों में 10 दिन और महीने में एक बार पानी की जरूरत होती है। एक एकड़ भूमि में 1600 कलम लगते हैं। तीसरे वर्ष से फल बनने में चार साल लगेंगे। इसमें कड़ी मेहनत के आधार पर 50 क्विंटल एकड़ तक का समय लग सà.... (Read More)
एक बार जब यह लगाया जाता है, तो यह 15 वर्षों तक फल देगा, इसे सेम मिट्टी के अलावा किसी भी तरह की मिट्टी में लगाया जा सकता है। सर्दियों में 10 दिन और महीने में एक बार पानी की जरूरत होती है। एक एकड़ भूमि में 1600 कलम लगते हैं। तीसरे वर्ष से फल बनने में चार साल लगेंगे। इसमें कड़ी मेहनत के आधार पर 50 क्विंटल एकड़ तक का समय लग सकता है। अप्रैल से सितंबर तक कभी भी लगाया जा सकता है। समर इसके लिए सबसे सही समय है। ड्रैगन फ्रूट के पौधे लेने के लिए आप vijay kumar -7065414241 से संपर्क कर सकते है धन्यवाद
Posted by santosh kumar patel
Uttar Pradesh
20-04-2020 12:32 AM

Punjab
04-21-2020 09:00 PM
सबसे पहले यदि हम मछली पालन की बात करें तो इसके लिए ट्रेनिंग बहुत जरूरी है यह ट्रेनिंग FFDA(fish farmer development aggency) हर जिले में बनी है जहां हमारा खेतीबाड़ी विभाग है वहां इसके अफसर बैठते हैं वहां जाकर एप्लीकेशन भरवायें वहां आपको 5 दिन की ट्रेनिंग दी जायेगी ट्रेनिंग के लिए दसवीं पास होना ज़रूरी है इस ट्रेनिंग में आपको लोन और स.... (Read More)
सबसे पहले यदि हम मछली पालन की बात करें तो इसके लिए ट्रेनिंग बहुत जरूरी है यह ट्रेनिंग FFDA(fish farmer development aggency) हर जिले में बनी है जहां हमारा खेतीबाड़ी विभाग है वहां इसके अफसर बैठते हैं वहां जाकर एप्लीकेशन भरवायें वहां आपको 5 दिन की ट्रेनिंग दी जायेगी ट्रेनिंग के लिए दसवीं पास होना ज़रूरी है इस ट्रेनिंग में आपको लोन और सब्सिड़ी के बारे में सारी जानकारी प्राप्त हो जाएगी इसकी पुंग छोड़ने के लिए अप्रैल से अक्तूबर का समय बढ़िया होता है, बाकि यदि अपने शुरू करना है तो यूनिवर्सिटी की तरफ से एक एकड़ में शुरू कर सकते हैं. एक एकड़ में 5000 पूंग डाल सकते हैं यह 2 से 3 इंच का होता है यदि 5000 डालना है तो 3000 रोहू, 1000 कतला, 500 कॉमन कॉर्प और 500 मरीगल नस्ल डाली जाए यह पूंग आप मछली पालन विभाग से खरीद सकते हैं यह एक इंच का बच्चा 10 पैसा प्रति बच्चा मिलेगा यदि बढ़िया खुराक डाली जाए तो 8 महीनों में यह लगभग 800—900 ग्राम का हो जाता है बाकी मछली पालन के लिए नहरी पानी बढ़िया होता है और आप गांव का छप्पड़ ठेके से लेकर भी यह काम शुरू कर सकते हैं तालाब में मछली के बीज डालने से पहले इस बात की जांच कर लेनी चाहिए कि उस तालाब में काफी मात्रा में मछली की कुदरती खुराक उपलब्ध है.
Posted by manjinder singh
Punjab
19-04-2020 11:13 PM

Punjab
04-20-2020 12:12 PM
Posted by ਗੁਰਵਿੰਦਰ ਕੌਰ
Punjab
19-04-2020 11:09 PM
Punjab
04-20-2020 07:59 AM
ਗੁਰਵਿੰਦਰ ਕੌਰ ਜੀ, ਲਾਲ ਭੂੰਡੀ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ ਤੁਸੀਂ ਇਸ ਵਿਚ cyper methrin @ 2 ml ਪ੍ਰਤੀ ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Manjeet Dagar
Haryana
19-04-2020 10:49 PM
Punjab
04-20-2020 12:32 PM
कम समय की किस्मों के लिए 15 मई से 30 जून का समय पौध तैयार करने के लिए अनुकूल होता है और दरमियानी समय की किस्मों के लिए 15 मई से 30 मई का समय पौध तैयार करने के लिए अनुकूल होता है।बिजाई से पहले 10 लीटर पानी में 20 ग्राम कार्बेनडाज़िम + 1 ग्राम स्ट्रैप्टोसाईक्लिन घोल लें और इस घोल में बीजों को 8-10 घंटे तक भिगोयें। उसके बाद बीजà.... (Read More)
कम समय की किस्मों के लिए 15 मई से 30 जून का समय पौध तैयार करने के लिए अनुकूल होता है और दरमियानी समय की किस्मों के लिए 15 मई से 30 मई का समय पौध तैयार करने के लिए अनुकूल होता है।बिजाई से पहले 10 लीटर पानी में 20 ग्राम कार्बेनडाज़िम + 1 ग्राम स्ट्रैप्टोसाईक्लिन घोल लें और इस घोल में बीजों को 8-10 घंटे तक भिगोयें। उसके बाद बीजों को छांव में सुखाएं और फिर बीज बिजाई के लिए तैयार हैं।
Posted by ityanand Singh
Bihar
19-04-2020 10:42 PM
Maharashtra
04-20-2020 08:47 AM
इत्यानन्द जी, आप प्याज का कंद बड़ा करने के लिए इसमें NPK 130045 @ 10 ग्राम प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे कर सकते है, इसका इस्तेमाल जब कंद बनना शुरू होता है तब किया जाता है, धन्यवाद
Posted by Babalu Vishwakarma
Uttar Pradesh
19-04-2020 10:28 PM
Punjab
04-20-2020 04:23 PM
फसल को जानवरों से बचाने के लिए आप खेत में फेंसिंग कर सकते है इसके इलावा आप prem raj saini 9719432296 जी से सम्पर्क कर सकते है इन्हो ने एक खाद त्यार की है जिसकी बदबू से जानवर खेत में नहीं आते
Posted by amit kumar
Uttar Pradesh
19-04-2020 10:24 PM
Maharashtra
04-20-2020 08:43 AM
Amit ji, yeh fungus ka hamla hua hai, ap iski roktham ke liye isme carbendazim @ 4 gram ya mancozeb @ 4 gram prati litre pani ke hisaab se spray kar sakte hain, dhanywad
Posted by ਗੁਰਜੰਟ ਸਿੰਘ
Punjab
19-04-2020 10:22 PM
Punjab
04-20-2020 08:36 AM
ਗੁਰਜੰਟ ਜੀ, ਤੁਸੀਂ ਇਸ ਵਿਚ ਮੱਛਰ ਦੇ ਹਮਲੇ ਦੀ ਜਾਂਚ ਕਰੋ, ਜੇਕਰ ਹਮਲਾ ਮੌਜੂਦ ਹੋਵੇ ਤੇ ਤੁਸੀਂ ਇਸ ਵਿਚ imidacloprid @ 1.5 ml ਪ੍ਰਤੀ ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Avadhnath Singh
Uttar Pradesh
19-04-2020 10:06 PM
Punjab
04-20-2020 01:09 PM
Avadhnath ji aap kisme jaise KBH 108 (MH 1737),MPMH 17,MH 1747 ki bijai kar sakte hai.dhanywad
Posted by Ginda
Himachal Pradesh
19-04-2020 10:03 PM
Punjab
04-21-2020 05:32 PM
ginda ji tuhade valo bheji gayi audio vich kuch vi saaf sunayi nahi de reha hai kirpa karke dubara audio bhejo ta jo tuhanu is bare poori jankari diti ja sake,dhanwad
Posted by sunil kumar
Rajasthan
19-04-2020 09:54 PM
Maharashtra
04-20-2020 08:38 AM
Mr. Sunil, Pearl farming is a business of great benefit. its farming is done in same manner as that of the natural process of formation of pearls in the pond of 100 feet , after making pond seeps are purchased which you can easily get from Delhi , depending on quality its cost is around 1.5 to 5 rupees per Pearl, initially the seed of pearl is inserted in the closed seeps by pushing it and then they are thrown in the water using a net and after some months the pearls are formed in it, for making one designer pearl it takes around18 months , for this the different designs such as ganpati, budh, holy cross are made on the pearls, its marketing is done on your own basis, Thank you