
Posted by aarab
Bihar
27-04-2020 08:31 AM
aarab ji yeh fungus hai iske liye aap carbendazim@400 gram ko prati acre ke hisab se spray karen,dhanywad
Posted by Gurpartap singh
Punjab
27-04-2020 08:30 AM
Gurpartap ji eh paudhe nu khushk mausam de vich full lagde han jive april may de mahine vich ate isnu fal august mahine vich lagde han.
Posted by Gurpartap singh
Punjab
27-04-2020 08:27 AM
Gurpartap ji, eda dekh ke nahi dasea ja sakda hai ke eh kehri kism hai, kirpa kar ke isde label di photo bhejo tajo tuhnu is bare dasea ja sake, dhanwad

Posted by Lala Ram
Uttar Pradesh
27-04-2020 08:21 AM
खरीफ की फसल के लिए बिजाई का सही समय जून के आखिरी सप्ताह से जुलाई का पहला सप्ताह है। गर्मियों में खेती करने के लिए इसका सही समय मार्च से अप्रैल महीना है। आप उड़द किस किस्में जैसे के T–9, Narendra Urad–1, Azad Urad–1, Uttar, Azad Urad–2, Sekhar–2, IPU-2-43, Sujata, Mass-479 की बिजाई कर सकते हैं, धन्यवाद
Posted by Manga Rampur kalan
Punjab
27-04-2020 08:20 AM
Manga ji, achar vali makki di biaji march to adh september tak kiti ja sakdi hai, tusi hun isdi bijai kar sakde ho, dhanwad
Posted by Satveer Kaur
Punjab
27-04-2020 08:16 AM
Satveer ji kirpa karke daso ke tuc kehdi kisam di bijai kiti hai ta jo tuhanu osde hisab nal jankari diti ja sake,dhanwad

Posted by Satnam Singh Sandhu
Punjab
27-04-2020 08:09 AM
Satnam Singh Sandhu ji bute len lai tusi surinder Nagra 9814305864 Rehsam Ayurvedic Nursery nal samparak kar sakde ho te is di contact farming lai tusi Aushadhiya kheti vikas sansthan 6268536795 nal samparak kar sakde ho, Thankyou.

Posted by प्रह्लाद
Rajasthan
27-04-2020 08:09 AM
श्रीमान जी, यह फंगस के हमले की वजह से हो रहा है आप इसकी रोकथाम के लिए इसमें carbendazim @ 4 ग्राम यां mancozeb @ 4 ग्राम प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे कर सकते हैं, धन्यवाद

Posted by Gurii sidhu
Punjab
27-04-2020 08:00 AM

Posted by Gurbir Singh
Punjab
27-04-2020 07:58 AM
श्रीमान जी अंगूर के ऊपर M 45 500 ग्राम प्रति एकड़ स्प्रे कर सकते हैं
Posted by Mayur Tighare
Maharashtra
27-04-2020 07:57 AM
श्री मान अनार में M-45@500 ग्राम प्रती एकड़ सप्रे कर सकते हो।
Posted by Gurpartap singh
Punjab
27-04-2020 07:52 AM
Gupartap ji, PR 121:- eh chote kad di sidhi munjar vali kisma hai, is kisan utte jameen vichli jiyada salab da koi asar nahi hunda. isdey patte gude hare rang de ate sidhe hunde han. eh 140 dina gich pakdi hai. isdey dane lambe patle ate chamakrdaar hunde han. isda khaad 30.5 q/acre hunda hai. shrimaan ji motta jhona 13 kism da pura nam daso , tajo tuhnu is bare jankari diti ja sake , dhanwad
Posted by Gurpartap singh
Punjab
27-04-2020 07:46 AM
Gurpartap ji tuc kisman jive 27p31,sava 200,sava 134, PR128,PR129 kisman di bijai kar sakde ho,dhanwad

Posted by hardev singh baath
Punjab
27-04-2020 07:46 AM
श्रीमान जी कद्दू के ऊपर एनपीके 130045 एक किलो प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे कर सकते है।
Posted by शमीम जहूर
Bihar
27-04-2020 07:41 AM
श्री मान कद्दू में M-45@500 ग्राम प्रती एकड़ सप्रे कर सकते हो।
Posted by Goverdhan Thakur
Madhya Pradesh
27-04-2020 07:29 AM
गोवेर्धन जी, देश में मसूर की खेती अधिकांश्त: उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश एवं बिहार में होती है, धन्यवाद
Posted by Goverdhan Thakur
Madhya Pradesh
27-04-2020 07:28 AM
गोवेर्धन जी, देश में चने का सबसे अधिक उत्पादन मध्य प्रदेश में होता है। जो कुल चने उत्पादन का 25.3 प्रतिशत पैदा करता है। इसके पश्चात् आन्ध्र प्रदेश (15.4प्रतिशत), राजस्थान (9.7प्रतिशत), कर्नाटक (9.6प्रतिशत) तथा उत्तर प्रदेश (6.4प्रतिशत) का स्थान आता है। धन्यवाद
Posted by Goverdhan Thakur
Madhya Pradesh
27-04-2020 07:26 AM
Goverdhan Thakur ji chane ka bhusa lene ke lia aap Tulsiram hatta bhidari 6261067847 se samparak kar sakte hai, Thankyou.
Posted by Deepak betu Upadhyay
Madhya Pradesh
27-04-2020 07:11 AM
Deepak ji, karela ki bijai february se march fir june se july ke mahine mein ki jati hai, katar se katar ka fasla 2.0-2.5 m ka rakhein or podhe se podhe mein 40-50 cm ka fasla ka paryog karein. beej ko 3-5 cm gehrai par boyein, dhaniya ki bijai october mein ki jati hai, katar se katar ka fasla 30 cm podhe se podha ka fasla 15 cm rakhein , beej ki gehrai 3 cm rakhein, kheera ki kheti february se march mahine mein karein, katar se katar ka fasla 1.5 m or pode se pode ka 30-45 cm ka fasla rakhein, beej ko 2-3 gehrai par beejai karein, dhanywad

Posted by Sarbjeet Singh
Punjab
27-04-2020 06:57 AM
श्रीमान जी इसके ऊपर एनपीके 13:00:45 @ 10gm प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे कर सकते है।

Posted by hardeep singh chahal
Punjab
27-04-2020 06:51 AM
श्रीमान जी घिया और करेले के ऊपर एनपीके 13:00:45 एक किलो प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे कर सकते है।

Posted by Lakhwant Singh Mann
Punjab
27-04-2020 06:49 AM
आप उसे Brotone liquid 50-50ml सुबह शाम और Enerdyna liquid 100-100ml सुबह शाम और Tonakind gold 25-25gm सुबह शाम रोजाना दें इससे फर्क पड़ जाएगा।
Posted by Alok Kumar
Uttar Pradesh
27-04-2020 06:33 AM
आप पहले इसकी बच्चेदानी में दवा Metricef-iu 1 दिन भरवायें और Keeper plus powder 30gm रोजाना और Concimax tablet रोजाना एक गोली दें और 14 दिन तक देते रहें फिर अगली बार हीट में आने पर हीट खाली छोड़ दें और उससे अगली हीट में आने पर क्रॉस करवाएं।

Posted by RAJESH Yadav
Chattisgarh
27-04-2020 05:04 AM
यह फसल अच्छे जल निकास वाली चिकनी, रेतली और लाल हर तरह की मिट्टी में उगाई जा सकती है खेत में पानी ना खड़ा होने दें क्योंकि खड़े पानी में यह ज्यादा देर बच नहीं पाएगी फसल की वृद्धि के लिए 6-6.5 पी एच वाली मिट्टी अच्छी मानी जाती है उस खेत में अदरक की फसल ना उगाएं जहां पिछली बार अदरक की फसल उगाई गई हो हर साल एक ही ज़मीन पर अदà.... (Read More)
यह फसल अच्छे जल निकास वाली चिकनी, रेतली और लाल हर तरह की मिट्टी में उगाई जा सकती है खेत में पानी ना खड़ा होने दें क्योंकि खड़े पानी में यह ज्यादा देर बच नहीं पाएगी फसल की वृद्धि के लिए 6-6.5 पी एच वाली मिट्टी अच्छी मानी जाती है उस खेत में अदरक की फसल ना उगाएं जहां पिछली बार अदरक की फसल उगाई गई हो हर साल एक ही ज़मीन पर अदरक की फसल ना लगाएं खेत को दो तीन बार जोतें और सुहागे से समतल करें अदरक की बिजाई के लिए 15 सैं.मी. ऊंचे और 1 मीटर चौड़े बैड बनाएं दो बैडों के बीच 50 सैं.मी. का फासला रखें बिजाई मई-जून के पहले सप्ताह में की जाती है पौधों में 15-20 सैं.मी. पंक्तियों की दूरी और एक पौधे से दूसरे पौधे की दूरी 30 सैं.मी. होनी चाहिए बीज की गहराई 3-4 सैं.मी. के करीब होनी चाहिए अदरक की बिजाई सीधे ढंग से और पनीरी लगाकर की जा सकती है बिजाई के लिए ताजे और बीमार रहित गांठों का प्रयोग करें बिजाई के लिए 480-720 किलो प्रति एकड़ बीज का प्रयोग करें बिजाई से पहले गांठों को मैनकोजेब 3 ग्राम प्रति लीटर पानी से उपचार करें गांठों को 30 मिनट के लिए घोल में भिगो दें इससे गांठों को फफूंदी से बचाया जा सकता है उपचार के बाद गांठों को 3-4 घंटें के लिए छांव में सुखाएं खेत की तैयारी के समय मिट्टी में 150 क्विंटल प्रति एकड़ रूड़ी की खाद डालें नाइट्रोजन 25 किलो (55 किलो यूरिया), फासफोरस 10 किलो (60 किलो सिंगल सुपर फासफेट) और पोटाश 10 किलो (16 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश) की मात्रा प्रति एकड़ में प्रयोग करें पोटाश और फासफोरस की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें नाइट्रोजन की मात्रा को दो बराबर भागों में बांटें पहला हिस्सा बिजाई के 75 दिन बाद और बाकी हिस्सा बिजाई के 3 महीने बाद डालें बिजाई के 3 दिन बाद एट्राज़िन 4-5 ग्राम प्रति लीटर पानी की नमी वाली मिट्टी पर स्प्रे करें उन नदीनों को खत्म करने के लिए जो पहली नदीन नाशक स्प्रे के बाद पैदा होते हैं, बिजाई के 12-15 दिनों के बाद गलाइफोसेट 4-5 ग्राम प्रति लीटर पानी की स्प्रे करें नदीन नाशक की स्प्रे करने के बाद खेत को हरी खाद से या धान की पराली से ढक दें

Posted by satnam Singh
Punjab
27-04-2020 05:03 AM
Satnam ji, agar ap dhaan ke PR 129 naye dhaan ke beej ke bare mein baat kar rahe hain to yeh PAU ki taraf se isi saal launch ki gayi kism hai, iski lambai 105 cm hai or yeh ropai ke baad 108 din mein mature ho jati hai yeh bacterial blight jaisi 10 rog ki pratirodhi hai. iska austaan paidawaar 30.0 q/acre hai, dhanywad

Posted by Rakesh Saini
Punjab
27-04-2020 03:41 AM
jekar tuhadi cow appi dudh pee lendi hai tan tuci nakk vich ring(karra) paa skde ho, jiss nal jddo ohh apna dudh peeen di koshish kregi tan khich pwegi tuci ehh photo dekh skde ho..
Posted by Gurmukh Singh
Punjab
27-04-2020 03:17 AM
ਫ਼ਸਲ ਬੀਜਣ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚਲੇ ਤੱਤਾਂ ਦੀ ਜਾਂਚ ਕਰਵਾਉਣੀ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ, ਤਾਂ ਕਿ ਖਾਦਾਂ ਦੀ ਸਹੀ ਲੋੜ ਨੂੰ ਸਮਝਿਆਂ ਜਾ ਸਕੇ। ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ 8 ਟਨ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਰੂੜੀ ਦੀ ਖਾਦ ਮਿਲਾਓ ਜਾਂ ਵਰਮੀਕੰਪੋਸਟ+ਰੈਲੀਗੋਲਡ 8-10 ਕਿਲੋ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਜਾਂ ਜੀਵਾਣੂ ਖਾਦ(PSB) 5-10 ਕਿਲੋ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰੋ।ਬਿਜਾਈ ਦੇ ਸਮੇਂ 66 ਕਿਲੋ ਯੂਰੀਆ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਕਰà.... (Read More)
ਫ਼ਸਲ ਬੀਜਣ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚਲੇ ਤੱਤਾਂ ਦੀ ਜਾਂਚ ਕਰਵਾਉਣੀ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ, ਤਾਂ ਕਿ ਖਾਦਾਂ ਦੀ ਸਹੀ ਲੋੜ ਨੂੰ ਸਮਝਿਆਂ ਜਾ ਸਕੇ। ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ 8 ਟਨ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਰੂੜੀ ਦੀ ਖਾਦ ਮਿਲਾਓ ਜਾਂ ਵਰਮੀਕੰਪੋਸਟ+ਰੈਲੀਗੋਲਡ 8-10 ਕਿਲੋ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਜਾਂ ਜੀਵਾਣੂ ਖਾਦ(PSB) 5-10 ਕਿਲੋ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰੋ।ਬਿਜਾਈ ਦੇ ਸਮੇਂ 66 ਕਿਲੋ ਯੂਰੀਆ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਕਰੋ। ਯੂਰੀਆ ਦਾ ਦੂਜਾ ਹਿੱਸਾ 66 ਕਿਲੋ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੂਜੇ ਪਾਣੀ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਪਾਓ ਅਤੇ ਯੂਰੀਆ ਦਾ ਤੀਸਰਾ ਹਿੱਸਾ 66 ਕਿਲੋ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਚੌਥੇ ਪਾਣੀ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਪਾਓ।ਸਰਦੀਆਂ ਦੇ ਮੌਸਮ ਵਿੱਚ ਤਾਪਮਾਨ ਘੱਟ ਹੋਣ ਕਾਰਨ ਫਸਲ ਤੱਤ ਜਿਆਦਾ ਲੈਂਦੀ ਹੈ, ਜਿਸ ਕਾਰਨ ਪੌਦਾ ਪੀਲਾ ਪੈ ਜਾਂਦਾ ਹੈ। ਇਸ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ N:P:K 19:19:19 ਦੀ ਸਪਰੇਅ 250 ਗ੍ਰਾਮ 150 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਲਈ ਵਰਤੋ। ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਇਲਾਕਿਆਂ ਵਿੱਚ ਪਾਣੀ ਦੀ ਕਮੀ ਹੈ, ਉੱਥੇ ਯੂਰੀਆ+ਪੋਟਾਸ਼ ਦੀ ਵਰਤੋਂ 2.5 ਕਿਲੋ ਨੂੰ 100 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਕਰੋ।

Posted by Bhagwatilal Chavhan
Rajasthan
26-04-2020 11:52 PM
Chavhan ji aapko iske mandi rate local mandi men hi pata chalega.dhanywad
Posted by Jugul kishor
Uttar Pradesh
26-04-2020 11:27 PM
कृप्या आप अपना सवाल विस्तार से पूछें कि आप खुरली किसके लिए तैयार कर रहे है ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके।
Posted by Jugul kishor
Uttar Pradesh
26-04-2020 11:24 PM
मिर्च रेतली से भारी चिकनी हर तरह की मिट्टी में उगाई जा सकती है अच्छे विकास के लिए हल्की उपजाऊ और पानी के अच्छे निकास वाली ज़मीन जिसमे नमी सोखने की क्षमता हो, इसके लिए अनुकूल होती है हल्की ज़मीनें भारी ज़मीनों के मुकाबले अच्छी क्वालिटी की पैदावार देती हैं मिर्च के अच्छे विकास के लिए ज़मीन की pH 6-7 अनुकूल है निम.... (Read More)
मिर्च रेतली से भारी चिकनी हर तरह की मिट्टी में उगाई जा सकती है अच्छे विकास के लिए हल्की उपजाऊ और पानी के अच्छे निकास वाली ज़मीन जिसमे नमी सोखने की क्षमता हो, इसके लिए अनुकूल होती है हल्की ज़मीनें भारी ज़मीनों के मुकाबले अच्छी क्वालिटी की पैदावार देती हैं मिर्च के अच्छे विकास के लिए ज़मीन की pH 6-7 अनुकूल है निम्नलिखित किस्में उत्तर प्रदेश में लगाने के लिए उपयुक्त हैं: Arka Meghana: यह हाइब्रिड किस्म अधिक पैदावार वाली और पत्तों के धब्बे रोग की प्रतिरोधक है इसके फलों की लंबाई 10.6 सैं.मी. और चौड़ाई 1.2 सैं.मी. होती है इसके फल शरू में गहरे हरे और पकने के बाद लाल हो जाते हैं इसकी औसतन पैदावार 135 क्विंटल (हरी मिर्चें) और 20 क्विंटल (सूखी मिर्चें) प्रति एकड़ है Arka Sweta: यह हाइब्रिड किस्म अधिक पैदावार वाली और ताज़ा मंडी में बेचनेयोग्य है यह सिंचित स्थितियों में खरीफ और रबी दोनों में उगाई जा सकती है इसके फल की लंबाई 11-12 सैं.मी. चौड़ाई 1.2-1.5 सैं.मी. होती है इसके फल नर्म और दरमियाने कड़वे होते हैं फल शुरू में हल्के हरे और पकने के बाद लाल हो जाते हैं यह विषाणुओं को सहनयोग्य किस्म है इसकी औसतन पैदावार 130 क्विंटल (हरी मिर्चें) और 20 क्विंटल (सूखी मिर्चें) प्रति एकड़ है Kashi Early: इस किस्म के पौधे का कद लंबा (100-110 सैं.मी.) होता है इसका तना हल्के हरे रंग का बिना टहनियों वाला होता है इसके फल कड़वे, लंबे (8-9x1.0-1.2 सैं.मी.), आकर्षिक, शरू में गहरे हरे जो पकने के बाद चमकीले लाल हो जाते हैं इस किस्म के हरी मिर्च की पहली तुड़ाई पनीरी लगाने के 45 दिन बाद की जा सकती है इसकी औसतन पैदावार 100 क्विंटल (पकी हुई लाल) होती है Kashi Surkh: इस किस्म के पौधे छोटे कद के होते हैं, जिनका तना टहनियों वाला होता है इसके फल हल्के हरे, सीधे, लंबे 11-12 सैं.मी. होते हैं यह हरी और लाल दोनों तरह की मिर्चें उगाने योग्य किस्म है इसकी पहली तुड़ाई पनीरी लगाने के 55 दिनों के बाद की जा सकती है इसमें हरी मिर्च की औसतन पैदावार 100 क्विंटल प्रति एकड़ है Kashi Anmol: इस किस्म के पौधे दरमियाने कद के (60-70 सैं.मी.) होते हैं, जिनका तना टहनियों वाला होता है और यह आकर्षिक, हरे, कड़वे फल पैदा करता है इसकी पहली तुड़ाई पनीरी लगाने के 55 दिनों के बाद की जा सकती है इसकी औसतन पैदावार 80 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pant C-1: यह किस्म अन्य किस्मों से आसानी से अलग है क्योंकि इसके फल की फलियां सीधी होती हैं इसके फल अत्याधिक तीखे, आकार में छोटे, आधार चौड़ा और सिरा पतला होता है यह किस्म चितकबरा और पत्ता मरोड़ रोग की कुछ हद तक प्रतिरोधक है इस किस्म की हरी फलियों की औसतन पैदावार 110 क्विंटल प्रति एकड़ होती है सूखी फलियों की पैदावार 20 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Kashmir Chilly : यह किस्म लंबी और गुद्दे वाली गहरे लाल रंग की होती है यह सर्दियों में खेती के लिए उपयुक्त है Hot Portugal: इसके फल गहरे हरे रंग के होते हैं लेकिन पकने पर लाल रंग के हो जाते हैं इसके फल 11-15 सैं.मी. लंबे होते हैं और औसतन पैदावार 40-50 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Soorajmukhi: इस किस्म का पौधा छोटा, फल गहरे रंग के, पकने पर लाल रंग के और स्वाद में अत्याधिक कड़वे होते हैं एक गुच्छे में 8-12 फल होते हैं इसकी औसतन पैदावार 31-40 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Sweet Banana: फल हल्के पीले रंग के होते हैं जो पकने पर लाल रंग के हो जाते हैं इसके फल 18-20 सैं.मी. लंबे होते हैं और स्वाद में अत्याधिक कड़वे होते हैं इसकी औसतन पैदावार 40 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Hungarian Wax: फल पकने पर लाल रंग के हो जाते हैं, 10-16 सैं.मी. लंबे और स्वाद में थोड़े कड़वे होते हैं इसकी औसतन पैदावार 31-33 क्विंटल प्रति एकड़ होती है खेत को तैयार करने के लिए 2-3 बार जोताई करें और प्रत्येक जोताई के बाद डलियों को तोड़ें बिजाई से 15-20 दिन पहले रूड़ी की खाद 150-200 क्विंटल प्रति एकड़ डालकर मिट्टी में अच्छी तरह मिला दें टमाटर और मिर्च की खेती एक ही या नज़दीक वाले खेत में ना करें, क्योंकि दोनों की बीमारियां एक जैसी होती हैं और इस कारण एंथ्राक्नोस और बैक्टीरिया वाली बीमारीयों के बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है मिर्च की खेती पूरे वर्ष की जाती है खरीफ की फसल के लिए मई-जून और गर्मियों की फसल के लिए फरवरी - मार्च का समय मिर्च की रोपाई के लिए उपयुक्त होता है खरीफ के मौसम में 60-75 सैं.मी. x 45 सैं.मी. और सिंचित क्षेत्रों में 60 x 60 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें नर्सरी में बीजों को 3-5 सैं.मी. की गहराई में बोयें और फिर मिट्टी से ढक दें किस्मों के लिए 200 ग्राम बीज और हाइब्रिड के लिए 80-100 ग्राम बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें बारानी क्षेत्रों के लिए, नाइट्रोजन 50 किलो (110 किलो यूरिया), फासफोरस 16 किलो (सिंगल सुपर फासफेट 100 किलो) और पोटाश 20 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 35 किलो) प्रति एकड़ डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा, फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा पनीरी खेत में लगाने के समय डालें रोपाई के बाद बाकी बची नाइट्रोजन दो बराबर हिस्सों में 30वें और 50वें दिन डालें सिंचित क्षेत्रों के लिए, नाइट्रोजन 84 किलो (182 किलो यूरिया), फासफोरस 24 किलो (सिंगल सुपर फासफेट 150 किलो) और पोटाश 24 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 40 किलो) प्रति एकड़ डालें रोपाई से पहले 24 किलो नाइट्रोजन (यूरिया 52 किलो), फासफोरस की पूरी मात्रा और पोटाश की आधी मात्रा प्रति एकड़ में डालें बाकी बची नाइट्रोजन को पांच भागों में बांटें और पोटाश को तीन बराबर भागों में बांटें नाइट्रोजन 12 किलो (यूरिया 26 किलो) को बिजाई के बाद 45वें, 60वें, 75वें, 95वें और 115वें दिन डालें और पोटाश 4 किलो को बिजाई के बाद 45वें, 60वें, और 75वें दिन डालें 45 दिनों तक गोडाई करें, कही की मदद से मिट्टी चढ़ाएं और खेत को नदीन मुक्त रखें यदि नदीनों की रोकथाम ना की जाये तो यह 70-90 % पैदावार कम कर देते हैं रोपाई से पहले मुख्य खेत में पैंडीमैथालीन 1 लीटर प्रति एकड़ में डालें यदि नदीनों की संख्या ज्यादा हो तो उनके अंकुरण के बाद सेन्कोर 800 मि.ली की स्प्रे प्रति एकड़ में करें नदीनों की रोकथाम के साथ मिट्टी में नमी को बनाए रखने के लिए मलचिंग एक प्रभावी तरीका है मिट्टी में नमी के आधार पर सर्दियों में 6-7 दिनों के अंतराल पर और गर्मियों में 4-5 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें फूल निकलने की अवस्था सिंचाई के लिए गंभीर होती है इस अवस्था पर पानी की कमी से फल गिरते हैं जिससे फलों के उत्पादन में कमी होती है विभिन्न खोजों में यह पाया गया है, कि प्रत्येक पखवाड़े में आधा इंच सिंचाई से जड़ों में नमी ज्यादा होती है जिससे वे अधिक उपज देती हैं मिर्चों की तुड़ाई हरा रंग आने पर करें या फिर पकने के लिए पौधे पर ही रहने दें मिर्चों का पकने के बाद वाला रंग किस्म पर निर्भर करता है अधिक तुड़ाइयां लेने के लिए यूरिया 10 ग्राम प्रति लीटर और घुलनशील K @ 10 ग्राम प्रति लीटर पानी (1 प्रतिशत प्रत्येक का घोल) की स्प्रे 15 दिनों के फासले पर कटाई के समय करें पैकिंग के लिए मिर्चें पक्की और लाल रंग की होने पर तोड़ें सुखाने के लिए प्रयोग की जाने वाली मिर्चों की पूरी तरह पकने के बाद ही तुड़ाई करें
Posted by Jagjeet
Punjab
26-04-2020 10:55 PM
Jagjeet ji chakander sale kran lai tusi Goverdhan Thakur 9993631111, 9425876765 nal samparak kar sakde ho, Thankyou.
Posted by Ramdiya
Haryana
26-04-2020 10:52 PM
रामदिया जी कृपया आप बताये के आप कोनसी फसल के बारे में जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके|

Posted by Ranbir singh
Punjab
26-04-2020 10:41 PM
Ranbir ji tuci buffalo nu Hitek injection 1ml/50kg sarir de bhar de hisab nal chamdi vich lgwao ate makhia lai Butox dwai di varto kr skde ho iss nu 2ml/1litre pani vich milla ke spray kr skde ho jithe pashua ne jakham kite hai pehla uthe changi trahh sarro da tel lgaao ate fir isdi spray kro ate ohna de ass pass v spray kro ate saff safai da purra dian rakho.
Posted by Alok Kumar
Uttar Pradesh
26-04-2020 10:31 PM
कृप्या आप अपना सवाल विस्तार से पूछें कि आप क्या जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके
Posted by Navdeep Singh
Punjab
26-04-2020 10:12 PM
ਹਾਂਜੀ ਨਵਦੀਪ ਜੀ ਤੁਸੀ ਹਰ ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ ਮਿਨਰਲ ਮਿਕਸਚਰ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਸ ਨਾਲ ਪਸ਼ੂ ਦੇ ਸਰੀਰ ਦੀ ਕਮੀ ਪੂਰੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਸਰੀਰ ਦੀ ਵਧਿਆ ਗਰੋਥ ਹੁੰਦੀ ਹੈ
Posted by Navdeep Singh
Punjab
26-04-2020 10:11 PM
ਨਵਦੀਪ ਜੀ ਜੇਕਰ ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ ਦਿਤੀ ਜਾਣ ਵਾਲੀ ਖੁਰਾਕ ਵਿਚ ਸਾਰੇ ਤੱਤ ਜਰੂਰੀ ਮਾਤਰਾ ਵਿਚ ਹੈ ਤਾ ਮਿਨਰਲ ਮਿਕਸਚਰ ਦੇ ਨਾਲ ਕੈਲਸ਼ੀਅਮ ਦੀ ਜਰੂਰਤ ਨਹੀਂ ਹੈ ਬਾਕੀ ਜੇਕਰ ਪਸ਼ੂ ਦਾ ਦੁੱਧ ਵੀ ਜ਼ਿਆਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਖੁਰਾਕ ਵਿਚ ਵੀ ਕਮੀ ਹੈ ਤਾਂ ਤੁਸੀ ਦੋਨੋ ਚੀਜਾਂ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ

Posted by prayanshu
Uttar Pradesh
26-04-2020 10:08 PM
शुष्क खेतों को अच्छा बनाने, नदीन रहित और सेहतमंद वृद्धि के लिए ग्लाफोसेट डालनी चाहिए। गेहूं की कटाई के बाद ज़मीन पर हरी खाद के तौर पर मई के पहले सप्ताह ढैंचा (बीज दर 20 किलोग्राम प्रति एकड़), या सन (बीज दर 20 किलोग्राम प्रति एकड़) या लोबीया (बीज दर 12 किलोग्राम प्रति एकड़) की बिजाई करनी चाहिए। जब फसल 6 से 8 सप्ताह की ह.... (Read More)
शुष्क खेतों को अच्छा बनाने, नदीन रहित और सेहतमंद वृद्धि के लिए ग्लाफोसेट डालनी चाहिए। गेहूं की कटाई के बाद ज़मीन पर हरी खाद के तौर पर मई के पहले सप्ताह ढैंचा (बीज दर 20 किलोग्राम प्रति एकड़), या सन (बीज दर 20 किलोग्राम प्रति एकड़) या लोबीया (बीज दर 12 किलोग्राम प्रति एकड़) की बिजाई करनी चाहिए। जब फसल 6 से 8 सप्ताह की हो जाए तो इसे खेत में कद्दू करने से एक दिन खेत में ही जोत देना चाहिए। इस तरह प्रति एकड़ 25 किलो नाइट्रोजन खाद की बचत होती है। भूमि को समतल करने के लिए लेज़र लेवलर का प्रयोग किया जाता है। इसके बाद खेत में पानी खड़ा कर दें ताकि भूमि के अंदर ऊंचे नीचे स्थानों की पहचान हो सके। इस तरह पानी के रसाव के कारण पानी की होने वाले बर्बादी को कम किया जा सके। यू पी के सिंचित और निम्न बारानी क्षेत्रों में मध्य जून से शुरूआती जुलाई तक का समय उपयुक्त होता है। पौधे की गहराई 2-3 सैं.मी. होनी चाहिए। फासला बनाकर लगाने से पौधे ज्यादा पैदावार देते हैं।उपजाऊ मिट्टी में 20 सैं.मी. x 15 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें जबकि हल्की मिट्टी में रोपाई के लिए 15 सैं.मी. x 10 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें। जल जमाव वाले क्षेत्रों में 20 x 20 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें।सिंचित और कम बारानी क्षेत्रों में रोपाई ढंग प्रयोग किया जाता है।रोपाई के लिए 25-30 दिनों के पौधों का प्रयोग करें।जल जमाव वाले क्षेत्रों में 30-35 दिनों के पौधे रोपाई के लिए प्रयोग करें।ऊंचे क्षेत्रों में, शुष्क और गीली मिट्टी में रोपाई ढंग का प्रयोग करें। सिंचित और कम बारानी वाले क्षेत्रों के लिए लगभग 41-50 किलो नाइट्रोजन (यूरिया 90-110 किलो), 30 किलो फासफोरस (एस एस पी 190 किलो) और 27 किलो पोटाश (म्यूरेट ऑफ पोटाश 45 किलो) प्रति एकड़ में डालें। नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा रोपाई के समय डालें। बाकी बची नाइट्रोजन को दो भागों में बांटकर, नाइट्रोजन का 1/4 हिस्सा शाखाएं निकलने के समय और 1/4 हिस्सा बालियां निकलने के समय डालें।जल जमाव वाले क्षेत्रों में नाइट्रोजन 30-41 किलो (यूरिया 65-90 किलो) प्रति एकड़ में शुरूआती खुराक के तौर पर डालें।कम बारानी क्षेत्रों के लिए नाइट्रोजन 23-32 किलो (यूरिया 52-70 किलो) और फासफोरस 16 किलो (एस एस पी 100 किलो) प्रति एकड़ में प्रयोग करें। नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस की पूरी मात्रा रोपाई से पहले और बाकी बची नाइट्रोजन बालियां निकलने के समय डालें।ऊंचे क्षेत्रों के लिए नाइट्रोजन 23 किलो (यूरिया 52 किलो), फासफोरस 12 किलो (एस एस पी 75 किलो) और पोटाश 12 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 20 किलो) प्रति एकड़ में डालें। नाइट्रोजन की आधी और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के तीन सप्ताह बाद डालें। बाकी बची नाइट्रोजन को दो भागों में बांटे। पहले भाग को बिजाई के 6 सप्ताह बाद और दूसरे भाग को बालियां निकलने के समय डालें।

Posted by prayanshu
Uttar Pradesh
26-04-2020 10:05 PM
चप्पन कद्दू की खेती के लिए अच्छी तरह से तैयार ज़मीन की आवश्यकता होती है। मिट्टी को भुरभुरा करने के लिए 2-3 जोताई करें। उसके बाद हैरो से जोताई करें। 2 मीटर के फासले पर 15 सैं.मी. गहरी खालियां बनायें। बिजाई के लिए मध्य जनवरी से मार्च और अक्तूबर से नवंबर का महीना (संरक्षण में) उपयुक्त होता है।प्रत्येक जगह में दो बीज.... (Read More)
चप्पन कद्दू की खेती के लिए अच्छी तरह से तैयार ज़मीन की आवश्यकता होती है। मिट्टी को भुरभुरा करने के लिए 2-3 जोताई करें। उसके बाद हैरो से जोताई करें। 2 मीटर के फासले पर 15 सैं.मी. गहरी खालियां बनायें। बिजाई के लिए मध्य जनवरी से मार्च और अक्तूबर से नवंबर का महीना (संरक्षण में) उपयुक्त होता है।प्रत्येक जगह में दो बीज बोयें और 45 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें। बीज को 2.5-3.5 सें.मी. की गहराई पर बोना चाहिए।गड्ढा खोदकर विधि का प्रयोग किया जाता है।

Posted by prayanshu
Uttar Pradesh
26-04-2020 10:03 PM
प्रियांशु बताये के आपने बिजाई के समय कोन सी खाद डाली थी ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके|
Posted by ਹਰਵਿੰਦਰ ਸਿੰਘ
Punjab
26-04-2020 09:57 PM
ਫ਼ਸਲ ਦੇ ਝਾੜ ਨੂੰ ਵਧਾਉਣ ਜਾ ਘਟਾਉਣ ਭਾਰੀਆ ਅਤੇ ਦਰਮਿਆਨੀਆ ਚੀਕਣੀਆ ਜ਼ਮੀਨਾਂ ਇਸ ਲਈ ਬਹੁਤ ਢੁਕਵੀਆਂ ਹਨ |ਮੈਰਾ ਜ਼ਮੀਨ ਚ ਸਿਫਾਰਿਸ਼ ਨਹੀਂ ਹੈ |ਝੋਨੇ ਦੀ ਸਿੱਧੀ ਬਿਜਾਈ ਮਈ ਦੇ ਆਖਰੀ ਹਫਤੇ ਤੋਂ ਜੂਨ ਦੇ ਦੂਜੇ ਹਫਤੇ ਚ ਹੋ ਸਕਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਬਾਸਮਤੀ ਜੂਨ ਦੂਜੇ ਹਫਤੇ ਤੋ ਅਾਖਰੀ ਹਫਤੇ ਤੱਕ ਹੋ ਸਕਦੀ ਹੈ|ਸੁੱਕੀ ਜ਼ਮੀਨ ਨੂੰ ਵਾਹ ਕੇ ਫਿਰ ਲੇਜ਼ਰ ਲੈਵਲ ਕਰ ਕੇ ਪਾਣੀ ਲਾਵੋ|ਫਿਰ ਤਰ ਵੱਤਰ ਚ ਰੋਟਾਵੇਟਰ/.... (Read More)
ਫ਼ਸਲ ਦੇ ਝਾੜ ਨੂੰ ਵਧਾਉਣ ਜਾ ਘਟਾਉਣ ਭਾਰੀਆ ਅਤੇ ਦਰਮਿਆਨੀਆ ਚੀਕਣੀਆ ਜ਼ਮੀਨਾਂ ਇਸ ਲਈ ਬਹੁਤ ਢੁਕਵੀਆਂ ਹਨ |ਮੈਰਾ ਜ਼ਮੀਨ ਚ ਸਿਫਾਰਿਸ਼ ਨਹੀਂ ਹੈ |ਝੋਨੇ ਦੀ ਸਿੱਧੀ ਬਿਜਾਈ ਮਈ ਦੇ ਆਖਰੀ ਹਫਤੇ ਤੋਂ ਜੂਨ ਦੇ ਦੂਜੇ ਹਫਤੇ ਚ ਹੋ ਸਕਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਬਾਸਮਤੀ ਜੂਨ ਦੂਜੇ ਹਫਤੇ ਤੋ ਅਾਖਰੀ ਹਫਤੇ ਤੱਕ ਹੋ ਸਕਦੀ ਹੈ|ਸੁੱਕੀ ਜ਼ਮੀਨ ਨੂੰ ਵਾਹ ਕੇ ਫਿਰ ਲੇਜ਼ਰ ਲੈਵਲ ਕਰ ਕੇ ਪਾਣੀ ਲਾਵੋ|ਫਿਰ ਤਰ ਵੱਤਰ ਚ ਰੋਟਾਵੇਟਰ/ਹਲ ਫੇਰ ਕੇ ਉਪਰ ਪਾੜਾ ਜਾਂ ਦੋਹਰਾ ਸੁਹਾਗਾ ਮਾਰ ਕੇ ਵੱਤਰ ਦੱਬ ਲਓ ਲਓ| ਕਿਆਰੇ ਪਾ ਲਓ ਅਤੇ ਉਸਦੇ ਤੁਰੰਤ ਬਾਦ ਡਰਿੱਲ ਨਾਲ ਲਾਇਨ ਤੋਂ ਲਾਇਨ ਬਿਜਾਈ ਕਰਦੇ ਹੋਏ ਸਿਰੇ ਦੇ ਕਿਆਰੇ ਤੋਂ ਮੋਟਰ/ਰਾਹ ਵਾਲੇ ਪਾਸੇ ਨ੍ਹੰ ਬਿਜਾਈ ਕਰਦੇ ਰਹੋ |ਯਾਦ ਰਹੇ ਕਿ ਬਿਜਾਈ ਸ਼ਾਮ ਨੂੰ ਚਾਰ ਵਜੇ ਆਰੰਭ ਕਰੋ|ਇਸ ਕਰਕੇ ਵੱਤਰ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰਨ ਲਈ ਓਨੀ ਹੀ ਜ਼ਮੀਨ ਨੂੰ ਲੇਜ਼ਰ ਤੋਂ ਬਾਦ ਪਾਣੀ ਦਿਓ ਜਿੰਨੇ ਚ ਇਸ ਸਮੇਂ ਤੋਂ ਬਾਦ ਬਿਜਾਈ ਹੋ ਸਕੇ| ਲੱਕੀ ਸੀਡਰ ਡਰਿੱਲ ਚ ਲੱਗੇ ਹੋੲੇ ਦੋ ਸੌ ਲੀਟਰ ਦੀ ਟੈਂਕੀ ਚ ਪ੍ਰਤਿ ਕਿੱਲਾ ਦੋ ਦਵਾਈਆਂ ਸਟੌਂਪ ਅਤੇ ਸਾਥੀ ਵਰਤਣੀਆਂ ਹਨ |ਬੀਜ ਬੀਜਣ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ 6-8 ਘੰਟੇ ਦਵਾਈ ਵਾਲੇ ਪਾਣੀ ਚ ਡੋਬਣਾ ਹੈ ਅਤੇ ਬਾਦ ਚ ਛਾਂਵੇ ਹੀ ਸੁਕਾਉਣਾ ਹੈ ਡਰਿਲ ਚ ਪਾਉਣ ਲਈ ਬੀਜ ਮਾਤਰਾ 8-10 ਕਿਲੋ ਹੈ|ਡਰਿੱਲ ਪਿੱਛੇ ਨਹੀਂ ਚੱਲਣਾ ਹੈ ਤਾਂ ਜੋ ਸਪਰੇ ਦਵਾਈ ਦੀ ਤਹਿ ਸਲਾਮਤ ਰਹੇ|ਝੋਨਾ ਸੱੱਤਵੇਂ ਦਿਨ ਬਾਹਰ ਨਿਕਲ ਆਏਗਾ ਪਰ ਪਹਿਲਾਂ ਪਾਣੀ 18-21 ਦਿਨ ਬਾਦ ਹੀ ਹਾਲਾਤਾਂ ਅਨੁਸਾਰ ਲਗਾਉਣਾ ਹੈ|ਖਾਦ ਚਾਰ ਕਿਸ਼ਤਾਂ ਚ 130 ਕਿਲੋ ਵਰਾਣੀ ਹੈ| ਡਾਇਆ ਦੀ ਜਰੂਰਤ ਨਹੀ ਹੈ ਅਤੇ ਜ਼ਿੰਕ ਜਾਂ ਹੋਰ ਪੌਸ਼ਿਕ ਤੱਤ ਮਿੱਟੀ ਦੀ ਰਿਪੋਰਟ ਮੁਤਾਬਿਕ ਪਾਉਣੇ ਹਨ|ਜੇ ਕਿਸੇ ਕਾਰਨ ਲੱਕੀ ਸੀਡਰ ਨਹੀਂ ਮਿਲਦੀ ਤਾਂ DSR ਡਰਿਲ ਵਰਤ ਲਓ|ਉਸ ਪ੍ਰਕਿਰਿਆ ਚ ਤੁਹਾਨੂੰ ਦਵਾਈ ਆਪ ਸਪਰੇਅ ਕਰਨੀ ਪਵੇਗੀ|ਛਿੜਕੀ ਦਵਾਈ ਉਪਰ ਤੁਰਨ ਤੋਂ ਬਚਣਾ ਹੈ|ਜੇ ਲੱਕੀ ਸੀਡਰ ਅਤੇ DSR ਡਰਿੱਲ ਵੀ ਨਹੀਂ ਮਿਲਦੀ ਤਾਂ ਇਸੇ ਪ੍ਰਕਿਰਿਆ ਚ ਕਿਸੇ ਆਮ ਡਰਿੱਲ ਨਾਲ ਲੀਕਾਂ ਕੱਢ ਕੇ ਸੱਤ ਕਿਲੋ ਬੀਜ ਦਾ ਦੋਹਰਾ ਛੱਟਾ ਦੇਕੇ ,ਉਪਰ ਹਲਕਾ ਸੁਹਾਗਾ ਫੇਰ ਕੇ ਪਾਣੀ ਲਾ ਦਿਓ ਅਤੇ ਚੌਵੀ ਘੰਟਿਆਂ ਦੇ ਅੰਦਰ ਦਵਾਈ ਸਟੌਂਪ+ਸਾਥੀ ਸਪਰੇਅ ਕਰ ਦਿਓ|ਜਿਸ ਪੈਲੀ ਚ ਪਿਛਲੇ ਸਾਲ ਜੋ ਬੀਜ ਕਿਸਮ ਬੀਜੀ ਸੀ ਓਸੇ ਬੀਜ ਨੂੰ ਪਹਿਲ ਦਿਓ..ਇਸ ਨਾਲ ਪੁਰਾਣੇ ਬੀਜ ਦਾ ਰਲਾ ਨਹੀਂ ਹੋਵੇਗਾ...ਅਗਰ ਰਲਾ ਖਤਮ ਕਰਨਾ ਹੈ ਤਾਂ ਕਣਕ ਦੀ ਤੂੜੀ ਬਣਾੳੁਣ ਤੋਂ ਬਾਦ ਰੌਣੀ ਕਰਕੇ ਪੁਰਾਣੇ ਬੀਜ ਅਤੇ ਨਦੀਨਾਂ ਨੂੰ ਉਗਣ ਦਾ ਮੌਕਾ ਦੇਕੇ ,ਵਾਹ ਕੇ ਨਸ਼ਟ ਕਰਕੇ ਫਿਰ ਬਿਜਾਈ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ.. ਕੁਝ ਜ਼ਮੀਨਾਂ ਵਿੱਚ ਚੀੜੇ ਜਾਂ ਚੋਭੇ ਝੋਨੇ ਦੀ ਵੀ ਸ਼ਿਕਾਇਤ ਆਉਂਦੀ ਹੈ ਜੋ ਕਿ ਅਸਲ ਕਿਸਮ ਨੂੰ ਨੱਪ ਲੈਂਦਾ ਹੈ ਇਸਦਾ ਕੋਈ ਇਲਾਜ ਨਹੀਂ ਹੈ ..ਇਸ ਲਈ ਇਸਨੂੰ ਵੀ ਬੀਜਣ ਵਾਲੀ ਰੌਣੀ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਰੌਣੀ ਕਰਕੇ,ਉਗਾ ਕੇ ਨਸ਼ਟ ਕਰਨਾ ਪਵੇਗਾ|ਇਕ ਤਰੀਕਾ ਇਹ ਵੀ ਹੈ ਕਿ ਤੂੜੀ ਬਣਾਉਣ ਤੋਂ ਤੁਰੰਤ ਬਾਦ ਸਸਤੀ ਪਲਟਾਵੀਂ ਹੱਲ ਫੇਰ ਕੇ ਸਾਰੇ ਨਦੀਨਾਂ,ਬੀਜਾਂ,ਵਾੲਿਰਸਾਂ ਨੂੰ ਸਖਤ ਧੁੱਪ(ਸੋਲਰਾਈਜੇਸ਼ਨ) ਨਾਲ ਸੜ ਜਾਣ ਦਿੱਤਾ ਜਾਵੇ... ਸਿੱਧੀ ਬਿਜਾਈ ਦੇ ਸਿਸਟਮ ਨੂੰ ਜਿਸਨੇ ਸਮਝ ਲਿਆ ਅਤੇ ਨਦੀਨ ਪ੍ਰਬੰਧ ਕਰਨ ਦਾ ਵੱਲ ਸਿਖ ਲਿਆ ਉਸਨੂੰ ਇਹ ਕਣਕ ਬੀਜਣ ਵਾਂਗ ਹੀ ਅਸਾਨ ਅਤੇ ਘੱਟ ਖਰਚੇ ਵਾਲੀ ਵਿਧੀ ਲੱਗੇਗੀ ਅਤੇ ਲੇਬਰ ਤੋਂ ਛੁਟਕਾਰਾ ਵੀ ਮਿਲ ਜਾਵੇਗਾ...ਤੂੜੀ ਬਣਾਉਣ ਤੋਂ ਬਾਦ ਅੱਗ ਲਾਉਣ ਦੀ ਜਰੂਰਤ ਵੀ ਨਹੀਂ...
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