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इस तरीके से बड़े बकरी फार्मों में लगाए जाते हैं बकरियों के पहचान चिन्ह

पशु पालन से जुड़े सफल व्यवसाय की पहचान है उसके उचित रिकॉर्ड रखना है। इसी तरह ही बकरी पालन के व्यवसाय में मेमनों का पूरा रिकॉर्ड रखना बहुत ज़रूरी है क्योंकि इससे झुंड में खुराक का प्रबंध रखना, बीमार जानवर की पहचान करनी और दवाई देने का रिकॉर्ड और बीमे की राशि हासिल करने के लिए मलकीयत साबित करने के लिए मेमनों के नंबर लगाकर पहचान चिन्ह लगाने बहुत ज़रूरी है।

किस तरीके से लगाए जाते हैं पहचान चिन्ह ?

पहचान नंबर लगाने के लिए दो तरीके प्रयोग किए जाते हैं

1. टैटूइंग (गोदना)
2. टैगिंग

कैसे की जाती है टैगिंग ?

यह तरीका आजकल बहुत प्रयोग किया जाता है। बाज़ार में कई तरह की टैग लगाने वाली मशीनें आती हैं। इस तरीके में सबसे पहले कान को साफ़ और सपिरिट से कीटाणु रहित करके इसमें धातु या प्लास्टिक के टैग लगा दिए जाते हैं। टैग लगाते समय कान की बड़ी नाड़ियों को बचाना चाहिए।

टैटूइंग (गोदना)

इस तरीके में सबसे पहले जो नंबर लगाना है उसे टैटूइंग मशीन में जकड़कर कागज़ ऊपर लगाकर नंबर लगा कर देख लिया जाता है कि नंबर सही है कि नहीं। इसके बाद कान का अंदरूनी हिस्सा साफ और सपिरिट से कीटाणु रहित कर लिया जाता है फिर टैटूइंग मशीन की सहायता से कान के अंदरूनी ओर नंबर गोद कर उसमें काली स्याही भर दी जाती है जो कभी नहीं मिटती। इस समय भी कान की बड़ी नाड़ियों को बचाना चाहिए। टैटूइंग करने वाले दिन आसमान साफ़ हो और बारिश वाले दिन टैटूइंन नहीं करनी चाहिए।

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